Pakistan: आसिम मुनीर या शहबाज शरीफ, पाकिस्तान का असली राजा कौन? ट्रंप के पोस्ट से उठे सवाल

Pakistan में लंबे समय से यह सवाल पूछा जाता रहा है कि आखिर देश की असली सत्ता किसके हाथ में है- चुनी हुई सरकार के पास या सेना के पास? जवाब इसका जगजाहिर है, बावजूद इसके हाल के घटनाक्रमों ने एक बार फिर इस बहस को तेज कर दिया है। खासकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने यह साफ कर दिया कि पाकिस्तान का असली किंग कौन है।

ट्रंप के पोस्ट ने खोल दी पाकिस्तान की सत्ता की सच्चाई

25 मई 2026 को डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक लंबा पोस्ट शेयर किया। इसमें उन्होंने कई मुस्लिम देशों से Abraham Accords में शामिल होने की अपील की। ट्रंप ने सऊदी अरब, कतर और तुर्किये जैसे देशों के नेताओं का नाम लिया। लेकिन जब पाकिस्तान की बात आई तो उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का नाम लेने की बजाय पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का जिक्र किया।

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यह छोटी सी बात नहीं थी। इसे दुनिया भर के राजनीतिक विश्लेषकों ने पाकिस्तान की असली शक्ति संरचना का संकेत माना। इससे साफ हुआ कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान की सेना को सरकार से ज्यादा प्रभावशाली माना जा रहा है।

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क्या हैं Abraham Accords?

Abraham Accords अमेरिका की मध्यस्थता में 2020 में शुरू हुए समझौतों का समूह है। इसका मकसद इजरायल और अरब देशों के बीच संबंध सामान्य बनाना था। ट्रंप ने अपने पोस्ट में इन समझौतों को "सफल मॉडल" बताया और कहा कि इससे UAE जैसे देशों को आर्थिक और सामाजिक फायदा हुआ है। ट्रंप का दावा है कि अगर ज्यादा मुस्लिम देश इसमें शामिल होते हैं, तो मिडिल ईस्ट में सच्ची शांति और स्थिरता लाई जा सकती है।

कौन हैं फील्ड मार्शल आसिम मुनीर?

2025 के बाद से आसिम मुनीर पाकिस्तान की राजनीति और विदेश नीति के सबसे ताकतवर चेहरे बनकर उभरे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की फौजा का नेतृत्व करने में उनकी बड़ी भूमिका बताई गई थी। हालांकि हार के बावजूद इसके तुरंत बाद उन्हें फील्ड मार्शल के पद पर प्रमोट कर दिया गया। सिर्फ इतना ही नहीं, पाकिस्तान की संसद ने उन्हें अतिरिक्त शक्तियां और गिरफ्तारी से आजीवन प्रतिरक्षा भी दे दी। इससे उनकी स्थिति और ज्यादा मजबूत हो गई।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ता असर

अब आसिम मुनीर सिर्फ सेना प्रमुख नहीं, बल्कि पाकिस्तान की विदेश नीति के प्रमुख चेहरे के रूप में भी देखे जा रहे हैं। वह कई अंतरराष्ट्रीय दौरों पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ गए हैं और कई बार अकेले भी विदेश यात्राएं कर चुके हैं। पिछले जून में वॉशिंगटन में उन्हें राष्ट्रपति स्तर का प्रोटोकॉल दिया गया था। डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें औपचारिक लंच के लिए भी आमंत्रित किया था। इसके अलावा उन्होंने कतर, मिस्र, जॉर्डन, UAE और लीबिया के सैन्य नेताओं से भी हाई-लेवल बैठकें की हैं।

ईरान संकट में भी निभा रहे अहम भूमिका

इसी साल आसिम मुनीर SCO Summit में हिस्सा लेने वाले पहले सेवारत पाकिस्तानी सेना प्रमुख बने। चीन के तियानजिन में उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और अजरबैजान के प्रधानमंत्री अली असदोव से मुलाकात की। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद भी मुनीर बैकडोर डिप्लोमेसी में सक्रिय बताए गए। पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक, उन्होंने अमेरिकी और ईरानी नेताओं के बीच पर्दे के पीछे बातचीत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।

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असल नेता मुनीर हैं!

पाकिस्तान के पूर्व मंत्री फवाद चौधरी ने भी खुलकर कहा था, "आसिम मुनीर ही पाकिस्तान के वास्तविक नेता हैं।" उनका कहना था कि फैसले लेने की असली ताकत सेना प्रमुख के पास है। ट्रंप द्वारा शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर को लगभग समान स्तर पर दिखाना भी इसी धारणा को मजबूत करता है कि पाकिस्तान में नागरिक सरकार सिर्फ औपचारिक चेहरा है, जबकि असली नियंत्रण सेना के पास है।

पाकिस्तान में सेना का पुराना दबदबा

1947 में आजादी के बाद से पाकिस्तान कई बार सैन्य शासन देख चुका है। आखिरी तख्तापलट 1999 में हुआ था, जब जनरल परवेज मुशर्रफ ने तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की सरकार गिरा दी थी। हालांकि 2008 में पाकिस्तान दोबारा लोकतांत्रिक शासन में लौटा, लेकिन सेना का प्रभाव कभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। सेना सिर्फ सुरक्षा मामलों में ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था और बड़े कारोबारों में भी गहरी पकड़ रखती है।

हाइब्रिड सिस्टम में चल रहा पाकिस्तान

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी माना था कि देश में "हाइब्रिड सिस्टम" चल रहा है, जहां सेना और नागरिक सरकार दोनों सत्ता साझा करते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि असली ताकत अब भी सेना के हाथों में है। यही वजह है कि आज दुनिया पाकिस्तान को सिर्फ एक लोकतांत्रिक देश नहीं, बल्कि सेना-प्रभावित राजनीतिक व्यवस्था के रूप में देखती है।

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