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क्‍या प्रधानमंत्री को छूट दी जाएगी? PM, CM व मंत्रियों को हटाने संबंधी विधेयक पर किरेन रिजिजू का बड़ा खुलासा

PM CM and ministers removel bill: केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने खुलासा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंभीर अपराधों के लिए जेल जाने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को पद से हटाने से संबंधित विधेयकों में खुद को छूट देने से इनकार कर दिया। इन विधेयकों के मसौदे पर सरकार काम कर रही थी।

रिजिजू ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रिमंडल को सूचित किया था कि इन विधेयकों के दायरे से प्रधानमंत्री को बाहर रखने की सिफारिश की गई है। हालांकि, प्रधानमंत्री ने इस सिफारिश से असहमति जताई।

Modi Kiren Rijiju

रिजिजू ने एएनआई को दिए अपने बयान में कहा, "पीएम मोदी ने मंत्रिमंडल से कहा कि सिफारिश है कि प्रधानमंत्री को इस विधेयक से बाहर रखा जाए, लेकिन वह इससे सहमत नहीं थे। पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री को कोई विशेष छूट देने से इनकार कर दिया। प्रधानमंत्री भी एक नागरिक हैं, और उन्हें कोई विशेष सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए।"

उन्होंने आगे कहा, "अधिकांश मुख्यमंत्री हमारी पार्टी से हैं। यदि वे कुछ गलत करते हैं, तो उन्हें अपना पद छोड़ना होगा। नैतिकता का भी कुछ अर्थ होना चाहिए। यदि विपक्ष नैतिकता को केंद्र में रखता, तो वे इस विधेयक का स्वागत करते।"

भाजपा का मत है कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को हटाने के लिए लाए गए नए विधेयक नैतिकता और ईमानदारी सुनिश्चित करेंगे। इन प्रस्तावित विधेयकों में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेशों का शासन (संशोधन) विधेयक शामिल हैं।

इन विधेयकों में प्रावधान है कि यदि किसी मौजूदा मंत्री, मुख्यमंत्री या यहां तक कि प्रधानमंत्री को ऐसे अपराध के लिए लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार या हिरासत में रखा जाता है, जिसमें पांच साल या उससे अधिक की जेल की सजा का प्रावधान है, तो वे एक महीने के भीतर अपना पद खो सकते हैं।

ये विधेयक अमित शाह द्वारा विपक्षी विरोध और नारेबाजी के बीच पेश किए गए थे। विरोध इतना तीव्र था कि विधेयक के मसौदे को फाड़ दिया गया और उसके टुकड़े केंद्रीय गृह मंत्री पर फेंके गए। हालांकि, बाद में इन विधेयकों को ध्वनि मत से पारित कर एक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया गया।

विपक्षी नेताओं ने इन विधेयकों में प्रस्तावित संशोधनों को "कठोर" और "असंवैधानिक" करार दिया है। उनका आरोप है कि इन विधेयकों का उपयोग केंद्रीय एजेंसियों के इशारे पर विपक्ष शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को निशाना बनाने के लिए किया जाएगा।

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