आतंकियों से बोले जम्मू-कश्मीर के गवर्नर सत्यपाल मलिक, जवानों की नहीं, भ्रष्ट नेताओं की हत्या करें!

नई दिल्ली- जम्मू-कश्मीर के गवर्नर सत्यपाल मलिक ने रविवार को एक बहुत ही विवादित बयान दिया है। मलिक ने आतंकवादियों से कहा है कि उन्हें पुलिसवालों की जगह भ्रष्ट नेताओं और अफसरों की हत्या करनी चाहिए। राज्यपाल के इस बयान पर सियासी बवाल भी शुरू हो गया है और सबसे पहले नेशनल कांफ्रेंस के उमर अब्दुल्ला ने उनके इसकी कड़ी निंदा की है।

सत्यपाल मलिक के विवादित बोल

सत्यपाल मलिक के विवादित बोल

लद्दाख में एक कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने आतंकियों से अपील की है कि वे जम्‍मू-कश्‍मीर में पुलि‍स के जवानों और एसपीओ को अपना निशाना बनाना छोड़ दें और उनकी हत्‍या न करें। सत्‍यपाल मलिक ने करगिल पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा है कि 'आतंकी आम नागरिकों को मारते हैं। पुलिस के जवानों को मारते हैं। एसपीओ को मारते हैं। अरे भाई अपने ही लोगों को क्‍यों मारते हो, उन्‍हें मारो, जिन्‍होंने तुम्‍हारे मुल्‍क को लूटा है। जिन्‍होंने कश्‍मीर की सारी दौलत लूटी है। आपने क्‍या इनमें से किसी को मारा है। ये फिजूल में अपनी जान गंवा रहे हैं। इससे कुछ नहीं निकलना। बंदूक से कुछ नहीं निकलेगा। लिट्टे भी कुछ नहीं कर पाया बंदूक के दम पर।'

पहले भी दे चुके हैं ऐसे ही बयान

पहले भी दे चुके हैं ऐसे ही बयान

गौरतलब है कि इससे पहले मलिक का नाम तब विवादों में आ गया था कि जब उन्होंने कहा था कि आतंकियों की मौत पर भी उन्हें उतना ही दुख होता है। तब वे बोले थे, 'पुलिस तो अपना काम बखूबी कर रही है, लेकिन अगर किसी की भी जान जाती है, चाहे वह आतंकी ही क्यों न हो तो मुझे तकलीफ होती है।'

राज्यपाल पर भड़के उमर

इस बीच जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने राज्यपाल के इस विवादित बयान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि,"ये व्यक्ति जाहिरा तौर पर एक संवैधानिक पद पर बैठा एक जिम्मेदार आदमी है, आतंकियों से भ्रष्ट कहे जाने वाले राजनेताओं को मारने के लिए कहता है। शायद इस व्यक्ति को गैर-कानूनी हत्याओं और कंगारू कोर्ट की मंजूरी देने से पहले दिल्ली में अपनी छवि के बारे में पता लगाना चाहिए।"

राज्य में है राष्ट्रपति शासन

राज्य में है राष्ट्रपति शासन

गौरतलब है कि प्रदेश में जून 2018 में तब राज्यपाल शासन लगाना पड़ा था, जब बीजेपी ने प्रदेश में पीडीपी गठबंधन सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था और महबूबा की अगुवाई वाली सरकार अल्पमत में आ गई थी। इसके बाद दिसंबर, 2018 में वहां राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। हाल ही में गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की अवधि को छह महीने बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था। सरकार की दलील है कि राज्य में विधानसभा अस्तित्व में नहीं है, इसलिए ये विधेयक लाना पड़ा।

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