बाबरी विध्वंस केस: 5 प्वाइंट में अहम मुद्दे जिन पर CBI कोर्ट के फैसले का पड़ा सबसे ज्यादा असर
नई दिल्ली। बाबरी विध्वंस केस (Babri Demolition Case) मामले में बुधवार को 28 साल बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। सीबीआई की विशेष अदालत के जज एसके यादव ने 2300 पन्नों के फैसले में बीजेपी नेता लालकृष्ण अडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, विनय कटियार, कल्याण सिंह समेत सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ढांचा किसी साजिश के तहत नहीं गिराया गया। ये एक अचानक हुई घटना थी। कोर्ट ने सीबीआई के द्वारा पेश साक्ष्यों को नाकाफी मानते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया। मामले में 49 आरोपी बनाए गए थे लेकिन इन 28 वर्षों में 17 लोगों की मौत हो गई। वहीं फैसले के दौरान 32 में 6 आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए जबकि 26 अदालत में उपस्थित रहे। कोर्ट के फैसले को इन 5 प्वाइंट में समझने की कोशिश करते हैं।
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फैसले पर टिकी थी तीन सांसदों की सदस्यता
मामले में तीन लोग लल्लू सिंह, साक्षी महाराज और ब्रजभूषण शरण सिंह वर्तमान में सांसद हैं। ऐसे में इनकी सदस्यता भी फैसले पर टिकी थी। केस के दौरान इन पर जो धाराएं लगी थीं उसके मुताबिक अगर ये दोषी पाए जाते तो इन्हें 5 साल की सज़ा हो सकती थी। इस तरह अगर इन्हें सज़ा मिलती तो इनकी संसद सदस्यता खत्म हो सकती थी। ये सभी सांसद बीजेपी के ही हैं जो कि बीजेपी के लिए झटका होता। लेकिन अब कोर्ट के फैसले से बरी होने के बाद इन सभी को बड़ी राहत मिली है।

सिर्फ नेताओं ही नहीं बीजेपी को भी मिली राहत
इस मामले में बीजेपी के लालकृष्ण अडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह जैसे दिग्गज नेता आरोपी थे। ये ऐसे नेता थे जो कभी बीजेपी का चेहरा हुआ करते थे। इन नेताओं पर फैसले के साथ ही पार्टी की साख भी जुड़ी थी। बीजेपी हमेशा कहती रही है कि वह संविधान और कानून में विश्वास करती है और बाबरी ढांचा को तोड़ने में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। वहीं विपक्ष और अन्य पार्टियां बीजेपी को ढांचा तोड़ने का जिम्मेदार मानती हैं जिसके चलते देश भर में दंगे हुए थे। अगर कोर्ट के फैसले में ये नेता दोषी पाए जाते तो बीजेपी की छवि के लिए भी बड़ा नुकसान होता। वो ऐसी पार्टी होती जिसके नेता बाबरी विध्वंस केस में सज़ायाफ्ता हैं। ऐसे में कोर्ट के इस फैसले से बीजेपी बड़ी राहत महसूस कर रही होगी।

अयोध्या मुद्दे से जुड़े सारे केस का अंत
बाबरी विध्वंस पर फैसला आने के बाद अयोध्या से जुड़े सारे केस का अंत हो गया है। पिछले साल 9 नवम्बर को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। इस फैसले में कोर्ट ने जमीन का मालिकाना हक हिंदू पक्ष को दिए जाने का आदेश दिया था। वहीं मामले से जुड़ी अन्य याचिकाओं पर भी कोर्ट का फैसला आ गया था लेकिन बाबरी विध्वंस केस का मामला कोर्ट में लंबित था। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रोजाना सुनवाई शुरू हुई और अब जाकर 28 साल बाद कोर्ट ने फैसला सुना दिया। इसके साथ ही अयोध्या से जुड़े सभी केस पर कोर्ट का फैसला आ गया है।

मथुरा और काशी का मुद्दा होगा गरम
बाबरी विध्वंस केस के बाद जब अयोध्या से जुड़े सारे केस समाप्त हो चुके हैं। ऐसे में हिंदू संगठन अयोध्या के बाद अब काशी और मथुरा में कृष्ण जन्मभूमिक का मामला उभार सकते हैं। पहले ही विश्व हिंदू परिषद काशी विश्वनाथ और कृष्ण जन्मभूमि का मामले को समय-समय पर उठाती रही है। अब अयोध्या से जुड़े अंतिम मामले में कोर्ट के फैसले के बाद ये दोनों मामले गरम हो सकते हैं। विध्वंस मामले में आरोपी रहे आचार्य धर्मेंद्र देव और विनय कटियार ने तो फैसले के बाद काशी विश्वनाथ और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुद्दे को लेकर बयानबाजी भी शुरू कर दी है।

बिहार चुनाव में विपक्ष के हाथ से निकला मुद्दा
विपक्ष बाबरी विध्वंस को बीजेपी की साजिश बताकर वर्तमान सत्ताधारी दल को मुसलमानों से नफरत करने वाला बताता रहा है। ऐसे में कोर्ट से बाबरी विध्वंस मामले में राहत मिलने के बाद बीजेपी विपक्ष पर हमलावर होगी। खासतौर पर बिहार में जहां मुख्य विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल भाजपा को कम्युनल पार्टी कहकर हमला बोलती रही है। ऐसे में सीबीआई कोर्ट का फैसला आने के बाद विपक्षी दलों के पास इस मुद्दे पर भाजपा के खिलाफ कोई ठोस आरोप नहीं होंगे। अगर आरोप लगाते भी हैं तो भाजपा इस मुद्दे को विपक्ष के ऊपर खुद को बदनाम करने की साजिश रचने का आरोप बताते हुए पलटवार कर सकती है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने तो कांग्रेस को इस मुद्दे पर घेरने की शुरुआत भी कर दी है। यूपी के मुख्यमंत्री बीजेपी आदित्यनाथ तो फैसले के बाद कांग्रेस पर पलटवार कर चुके हैं। योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि फैसले से साबित हो चुका है कि कांग्रेस सरकार ने हिंदू संतों, बीजेपी नेताओं और विहिप पदाधिकारियों को बदनाम करने की नीयत से उन पर मामले दर्ज करवाए थे।
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