अचानक रुकी महिला शिक्षिका की धड़कनें, फिर भी सात लोगों का जीवन रौशन करेंगी गोपी
47 साल की शिक्षिका बच्चों के पढ़ाने के लिए पॉपुलर थीं। हालांकि, मौत के बाद उनकी जगह तो नहीं भरी जा सकती, लेकिन उनके अंगों से कई परिवारों के जीवन में रौशनी बिखरती रहेगी। kerala teacher organ donation gives life to seven p
तिरुवनंतपुरम, 25 अगस्त : 'मुक्कदर का सिकंदर' फिल्म में गीतकार अनजान का सदाबहार नगमा है, 'रोते हुए आते हैं सब, हंसता हुआ जो जाएगा...'। इसी नग्मे की एक लाइन है- 'जिंदगी तो बेवफा है, एक दिन ठुकराएगी, मौत महबूबा है अपने साथ लेकर जाएगी।' फिल्म के इस प्रसंग का जिक्र इसलिए क्योंकि आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लाइफ एक्सपेक्टेंसी लगातार घट रही है। ऐसे में विज्ञान की मदद से हम मरने के बाद भी जिंदा रहने का विकल्प चुन सकते हैं। यानी मौत के बाद भी कई लोगों की जिंदगी में मुस्कान या रौशनी भरी जा सकती है। इस विकल्प का नाम है- अंगदान।
केरल में ऑर्गन डोनेशन
ऑर्गन डोनेशन धीरे-धीरे लोगों के बीच पॉपुलर हो रहा है। कहना गलत नहीं होगा कि मौत के बाद भी अगर आप किसी के जीवन में अपने सकुशल अंगों के कारण जिंदा रह सकें तो ये सबसे प्यारा उपहार है। दरअसल, सड़क हादसों या किसी अन्य कारण से असमय मौत होने के बाद जरूरतमंद लोगों को शरीर के अंदरुनी अंगों के दान से मरने वाले इंसान जरूरतमंद लोगों को जीवन दान दे रहे हैं। 15 साल की बच्ची के अंगदान की प्रेरक गाथा जानने के बाद आज बात एक शिक्षिका की। मरने वाली महिला टीचर ने सात लोगों को जीवन दान दिया है। हम बात कर रहे हैं केरल में ऑर्गन डोनेशन की।

स्वेच्छा से अंगदान का संकल्प
दरअसल, अंगदान की नौबत हादसों में अचानक होने वाली मौत या कम उम्र में ब्रेन डेड होने की घोषणा के बाद आती है। भारत में नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांटेशन ऑर्गनाइजेशन (National Organ and Tissue Transplant Organization- NOTTO) के माध्यम से लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक किया जा रहा है। लोग अपने जीवनकाल में ही स्वेच्छा से अंगदान का संकल्प ले रहे हैं।
इसी महिला टीचर ने सात लोगों को दिया नया जीवन

सात लोगों को नया जीवन
आज की कहानी में जिस महिला के अंगदान की हो रही है वह पेशे से शिक्षिका थीं। स्कूलों में बच्चों के भविष्य को संवारने वाली ये महिला अपनी मौत के बाद भी अमर हो गईं, ये कहना गलत नहीं होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि इनके शरीर के सात अंग जरूरतमंद मरीजों को ट्रांसप्लांट किए जाएंगे, जिससे सात लोगों को नया जीवन मिलेगा।

47 साल की शिक्षिका
केरल की शिक्षिका के ऑर्गन डोनेशन से जुड़ी न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 47 साल की शिक्षिका अपने क्षेत्र में काफी लोकप्रिय थीं। खबरमें कहा गया कि मौत के बाद उनके अंगों से सात लोगों को नया जीवन मिलेगा। अंगदान का फैसला शिक्षिका के परिवार ने लिया।

गोपीकरणी बच्चों के बीच लोकप्रिय टीचर
बुधवार को 47 वर्षीय शिक्षिका जी गोपीकरणी का निधन हो गया। अब सात लोगों को एक नया जीवन मिलेगा। गोपीकरणी सस्थमंगलम में आरकेडी एनएसएस स्कूल में पढ़ाती थीं। अपनी शैक्षणिक प्रतिभा और प्रेरक कौशल के लिए छात्रों के बीच पॉपुलर रहीं गोपीकरणी की मौत का कारण हार्ट अटैक है। छह दिन पहले उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचाने में नाकाम रहे। अब उनकी मौत के बाद अंगदान से सात लोगों को नया जीवन मिलेगा।

परिवार ने अंगदान के लिए सहमति दी
केरल पुलिस की छात्र पुलिस कैडेट योजना के तहत सामुदायिक पुलिस अधिकारी के रूप में टीचर गोपीकरणी Hope नाम की संस्था से भी जुड़ी थीं। ड्रॉपआउट बच्चों की शिक्षा जारी रखने के लिए Hope संस्था मुफ्त ट्यूशन देती है। शिक्षिका गोपीकरणी की मौत के बाद परिवार ने अंगदान के लिए सहमति दी।

15 साल की मासूम बासु का अंगदान
गौरतलब है कि केंद्र सरकार और विशेष रूप से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 23 अगस्त को अंगदान करने वाली 15 साल की मासूम बासु की तारीफ करते दिखे थे। बासु की मौत सड़क हादके में गत 15 अगस्त को हो गई थी। मरने से पहले बासु का दिल 32 साल की मां को ट्रांसप्लांट किया गया। कुछ अन्य अंग बाकी पांच नरीजों को लगाए गए।

सड़क हादसे के बाद किशोर का अंगदान
गौरतलब है कि पिछले महीने चेन्नई में कॉलेज के फाइनल ईयर स्टूडेंट को भयानक चोट लगी थी। किशोर को तमाम प्रयासों के बावजूद, नहीं बचाया नहीं जा सका। किशोर के परिवार ने भी अंगदान पर सहमति जताई, जिसके कारण पांच लोगों को नई जिंदगी मिली। भले ही किशोर की मौत भयानक सड़क हादसे में असमय हुई थी, लेकिन कम आयु में मौत के कारण किशोर के महत्वपूर्ण अंग स्वस्थ थे। किशोर की किडनी और हृदय को उन रोगियों में प्रत्यारोपित किया गया जो उसी अस्पताल में पहले से इलाज करा रहे थे। दूसरी किडनी, दो फेफड़े और एक लीवर अतिरिक्त रोगियों को दान किए गए।












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