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इस राज्य में आवारा कुत्तों की आई शामत! रेबीज से मौतों के बाद सरकार करेगी नसबंदी और चिपिंग

Kerala Stray Dog Policy: आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और हाल ही में रेबीज से हुई दर्दनाक मौतों के बाद केरल सरकार ने इस गंभीर समस्या पर सख्त रुख अपनाया है। राज्य के स्थानीय स्वशासन मंत्री एम. बी. राजेश ने ऐलान किया है कि जल्द ही प्रदेश के 152 ब्लॉकों में मोबाइल एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) यूनिट्स की शुरुआत की जाएगी।

ताकि कुत्तों की आबादी पर नियंत्रण पाया जा सके। इसके साथ ही, गंभीर रूप से बीमार या घायल कुत्तों को मानवीय आधार पर 'दया मृत्यु' देने की अनुमति भी दी जाएगी। जानिए क्या है केरल की आवारा कुत्तों वाली नई नीति...

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पायलट प्रोजेक्ट नेदुमनगड़ में शुरू होगा

16 जुलाई को प्रेल कॉन्फ्रेंस में राजेश ने बताया कि इन मोबाइल यूनिट्स की शुरुआत नेदुमनगड़ से पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर होगी, जहां पशुपालन विभाग की निगरानी में एक यूनिट कार्यरत की जाएगी। इसके सफल परीक्षण के बाद इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। मंत्री के मुताबिक, "स्थायी नसबंदी केंद्रों की तुलना में ये पोर्टेबल यूनिट्स अधिक किफायती साबित होंगी।"

एक मोबाइल एबीसी यूनिट की लागत करीब ₹28 लाख बताई गई है। ऑर्डर दिए जाने के दो महीने के भीतर ये यूनिट्स राज्य को प्राप्त होंगी। इस दौरान, संबंधित पंचायतों और नगरपालिकाओं द्वारा इन यूनिट्स को संचालित करने के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान की जाएगी।

कुत्ते पकड़ने वालों को ₹300 प्रति कुत्ता

सरकार ने यह भी बताया कि अगस्त में आवारा कुत्तों के लिए एक बड़े स्तर का टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा, ताकि रेबीज जैसी जानलेवा बीमारियों से सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। पशुपालन विभाग के पास वर्तमान में 158 प्रशिक्षित कर्मी उपलब्ध हैं, जो कुत्तों को पकड़ने का कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा, कुदुंबश्री के माध्यम से और अधिक लोगों की पहचान की जाएगी, जिन्हें इस काम के लिए प्रतिकुत्ता ₹300 की दर से भुगतान किया जाएगा। नसबंदी की प्रक्रिया में इंडियन वेटरनरी एसोसिएशन की सेवाएं ली जाएंगी।

सितंबर में पालतू कुत्तों के लिए विशेष कैंप

मंत्री ने जानकारी दी कि सितंबर महीने में पालतू कुत्तों के लिए टीकाकरण और लाइसेंस देने हेतु विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा। स्थानीय निकायों के स्तर पर जनसहयोग समितियां बनाई जाएंगी जो मोबाइल एबीसी केंद्रों के कामकाज की निगरानी करेंगी। जो लोग इन कार्यवाहियों में बाधा डालेंगे, उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 186 और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 107 के तहत पुलिस कार्रवाई की जाएगी।

गंभीर रूप से बीमार कुत्तों को दी जा सकेगी दया मृत्यु

राजेश ने स्पष्ट किया कि जो कुत्ते गंभीर रूप से घायल या बीमार होंगे, उन्हें पशु चिकित्सक के प्रमाण पत्र के आधार पर दया मृत्यु दी जा सकेगी। यह कार्रवाई पशुपालन नियमों की धारा 8 के तहत की जाएगी।

मंत्री ने यह भी कहा कि केंद्रीय नियमों की कठोरताओं और आम जनता की ओर से हो रहे विरोध के कारण राज्य में संकट की स्थिति उत्पन्न हो रही है। इसलिए, राज्य सरकार केंद्र सरकार से एबीसी नियमों में ढील की मांग भी करेगी।

अब कुत्तों में भी लगाए जाएंगे माइक्रोचिप्स

बैठक में मौजूद पशुपालन मंत्री जे चिन्चू रानी ने जानकारी दी कि विभाग सात और मोबाइल एबीसी यूनिट्स खरीदेगा। फिलहाल राज्य में 17 स्थायी एबीसी केंद्र कार्यरत हैं, जबकि 13 और निर्माणाधीन हैं। 28 नए केंद्रों के लिए स्थानों की पहचान की जा चुकी है।

रानी ने बताया कि जैसे मवेशियों में चिप्स लगाए जाते हैं, वैसे ही अब कुत्तों में भी 12 अंकों वाला माइक्रोचिप लगाया जाएगा। इस चिप से कुत्ते के मालिक का पता, उसका टीकाकरण और लाइसेंस संबंधित विवरण आसानी से पता चल सकेगा।

रेबीज से चार बच्चों की मौत ने बढ़ाई चिंता

गौरतलब है कि इस वर्ष अप्रैल से अब तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में चार बच्चों की मौत आवारा कुत्तों के काटने के बाद हो चुकी है, जबकि उन्हें एंटी-रेबीज वैक्सीन भी दी गई थी। इस त्रासदी ने राज्य सरकार को कठोर कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है।

मंत्री ने आम जनता से अपील की कि वे कचरा फेंकने से बचें और नसबंदी केंद्रों के कार्यों में सहयोग करें ताकि आवारा कुत्तों की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।

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