Kerala:कुछ इस तरह से जान पर खेलकर कैप्टन राजकुमार ने बृचाई 26 लोगों की जान
नई दिल्ली। केरल में आई बाढ़ की वजह से सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि हजारो लोग अब भी इसमे फंसे हुए हैं। भारतीय वायुसेना, एनडीआरएफ की टीमें और तमाम प्रशासनिक अमला राहत बचाव में जुटा है। बाढ़ पीड़ितों को यहां से बचाने के लिए जवान अपनी जान पर खेल रहे हैं। भारतीय जलसेना में कैप्टन पी राजकुमार ने जिस तरह से लोगो की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली उसकी वजह से सोशल मीडिया पर लोग उन्हें हीरो का दर्जा दे रहे हैं।

अबतक का सबसे मुश्किल मिशन
कैप्टन राजकुमार ने सी किंग 42बी चॉपर की मदद से 26 लोगों को सुरक्षित बाढ़ से निकाला, जिसके बाद वह लगातार चर्चा में बने हुए हैं। कैप्टन ने अपने इस ऑपरेशन के बारे में बताया कि मैं इस मिशन को अपने कैरियर की सबसे मुश्किल चुनौती मानता हूं, यह मिशन काफी खतरनाक था। शौर्य चक्र विजेता कैप्टन राजकुमार पिछले वर्ष जब केरल में बाढ़ आई थी उस वक्त भी वह बाढ़ पीड़ितों को बचाने में सबसे आगे थे। उनके अदम्य साहस के लिए उन्हें शौर्य चक्र से नवाजा गया था।

आसान नहीं था यह मिशन
केरल में राहत और बचाव कार्य के दौरान चुनौतियों के बारे में बताते हुए कैप्टन ने कहा कि सी किंग 42बी एक साथ बहुत से लोगों को लेकर जाने के लिए नहीं बना है क्योंकि इसमे काफी सारे औजार होते हैं। लेकिन मैं इसमे कुल 32 लोगों को लेकर निकला था। इस ऑपरेशन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि मुझे इस बात को सुनिश्चित करना था कि सभी लोग हेलीकॉप्टर के भीतर सही जगह पर बैठे जिससे कि इसका संतुलन बना रहे, यही नहीं इसे ऐसे रूट से लेकर जाना था जिससे कि आस-पास के लोगों को जान का खतरा ना हो।

चॉपर को संतुलित करना था मुश्किल
उन्होंने बताया कि यह काफी चुनौतीपूर्ण काम था, ऐसे में आपको बेहतर पता होना चाहिए कि हेलीकॉप्टर को कैसे बेहतर तरीके से चलाएं। जिस वक्त मैं लोगों को लेकर जा रहा था, वहां लैंडिंग की कोई जगह नहीं थी, मौसम काफी खराब था, हर तरफ पेड़ और घर थे, यही नहीं हेलीकॉप्टर में 26 लोग सवार थे, ऐसे में इसे संभालना बहुत चुनौतीपूर्ण था। इस वजह से मुझे रस्सी के लटकाकर लोगों को खुद उठाना पड़ा, इसमे काफी समय लग रहा था।

पिछली बार से मुश्किल था यह मिशन
इन तमाम चुनौतियों के बावजूद कैप्टन राजकुमार इस बात को लेकर खुश हैं कि वह इतने लोगों की जान को बचा सके। ओखी में अपने पिछले मिशन की तुलना मौजूदा मिशन से करते हुए राजकुमार ने बताया कि उस समय मुझे पता था कि समुद्र के उपर मुझे हेलीकॉप्टर उड़ाना है, आस पास पेड़ नहीं थे और किसी भी तरह की बाधा नहीं थी। लेकिन यहां स्थिति बिल्कुल अलग थी, हर तरफ पेड़, रौशनी की कमी, घर की छतों की वजह से काफी मुश्किल हो रही थी।
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