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Kerala Floods: दशकों लग जाएंगे केरल को फिर से खड़ा होने में

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    नई दिल्ली। केरल में प्रकृति का कहर जारी है। बाढ़ की विभीषिका ने केरल के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है। पिछले करीब तीन सप्ताह से केरल के ज्यादातर हिस्सों में जमीन तक नहीं दिखाई दे रही है। जहां नजर दौड़ाई जाए, वहां सिर्फ पानी और विनाश दिखाई दे रहा रहा है। केरल में इस विनाशकारी बाढ़ से पता चलता है कि इस राज्य को फिर से खड़े होने में दशकों का टाइम लग सकते हैं। केरल सरकार ने अनुमान लगाया है कि अब तक इडुक्की, मलप्पुरम, कोट्टायम और एर्नाकुलम जिलों के साथ 20,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता लोगों को बचाने और प्रभावित लाखों लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाना है।  हालांकि, वे स्वीकार करते हैं कि राज्य का पुनर्निर्माण एक बहुत ही "कठिन कार्य" होने वाला है।

    Kerala Floods: दशकों लग जाएंगे केरल को फिर से खड़ा होने में

    कठीन दिन आ रहे हैं...
    मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से सोमवार को राज्य पुनर्निर्माण कार्य शुरू करने और उनको सरकार की योजनाओं के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा 'कठिन दिन आने वाले हैं'। इस वक्त केरल में 10 लाख से अधिक लोग राहत शिविरों में हैं। सरकारी अनुमान के अनुसार, अभी तक लाख बिल्डिंग्स, जिसमें लोगों के घर भी शामिल हैं, 10,000 किलोमीटर से अधिक हाइवे और सड़के टूट चुकी है। सैकड़ों पुल बह गए हैं और लाखों हेक्टेयर भूमि की फसल बर्बाद हो चुकी है।

    केरल को खड़ा होने में दशक से ज्यादा टाइम लगेगा
    विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर बाढ़ की वजह से इस क्षेत्र को पूरी तरह से ठीक होने में एक दशक का वक्त लग सकता है। अम्बेडकर विश्वविद्यालय के प्रकाश त्रिपाठी द्वारा 2015 के एक पेपर, जिसका शीर्षक है 'भारत में बाढ़ आपदा: प्रवृत्ति और तैयारी का विश्लेषण' में बताया गया है कि राहत और पुनर्वास कार्यों को पूरा करने में औसतन दो साल लगते हैं जबकि पारिस्थितिक सुधार पांच से अधिक सालों का समय लग सकता है।

    कोसी का कहर और केदारनाथ में प्रलय के हरे हैं जख्म
    देश हर साल कहीं न कहीं बाढ़ या जल प्रलय का सामना करता है, लेकिन उत्तराखंड, बिहार और असम में हुए विनाश के उदाहरण आज भी मौजूद है। उत्तराखंड को याद कीजिए, जब जून 2013 में मंदाकिनी और अलकनंदा नदियों ने जब अपना कहरा बरपाया तो लाखों लोगों को बेघर कर दिया और 200 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। रुद्रप्रयाग जिलों के केदरानाथ में तो विनाश के निशाना आज भी ताजा है। उस दौरान केंद्र सरकार ने 1 हजार करोड़ रु की मदद की थी, लेकिन अभी उत्तराखंड में बहुत कुछ पहला जैसा नहीं है और उस खूबसूरत राज्य को फिर से उठ खड़ा होने में अभी भी कई साल लग जाएंगे। फिर बिहार में कोसी का कहर और 2008 में आई भयानक बाढ़ ने 500 से ज्यादा लोगों को निगल लिया था। इस दौरान 30 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए थे और 60 लाख हेक्टेयर से ज्यादा की उपजाऊ जमीन नष्ट हो गई थी। इस आपदा को 10 साल बीत चुके हैं, सरकार अभी तक किसान को विकल्प देने में नाकाम रही है। नॉर्थ ईस्ट में असम की कहानी सबसे जुदा है, जहां हर साल ब्रम्हपुत्र नदी अपने उफान पर रहती है और लाखों लोग प्रभावित होते हैं।

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    English summary
    Kerala Floods: It might take a decade to recover the state again

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