Kerala Economic Crisis: God's Own Country को क्या हुआ, केरल की अर्थव्यवस्था को रसातल में पहुंचाने वाले कौन?
Kerala Economic Crisis: कभी केरल मॉडल को पूरे देश में एक आदर्श उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जाता था, लेकिन आज वही केरल आर्थिक संकट के कगार पर खड़ा है। इस स्थिति के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं, जिनमें बढ़ता कर्ज, सरकारी खर्चों का असंतुलन और कल्याणकारी योजनाओं की बढ़ती लागत बड़ी वजह हैं।
केरल में पिछले 9 वर्षों से लगातार सीपीएम की अगुवाई वाली लेफ्ट गठबंधन एलडीएफ (LDF) की सरकार है। यहां की अर्थव्यवस्था का आलम ये हो चुका है कि राज्य सरकार एक बार सुप्रीम कोर्ट के सामने जाकर अपना दर्द जाहिर कर चुकी है।

Kerala Economic Crisis:कर्ज का बढ़ता अंबार
अंग्रेजी अखबार टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक केरल की अर्थव्यवस्था में गिरावट का सबसे बड़ा कारण राज्य का बढ़ता कर्ज है। साल 2016-17 में जहां राज्य पर 1,86,453 करोड़ रुपए का कर्ज था, वह 2021-22 में बढ़कर 3,35,641 करोड़ रुपए हो गया। मात्र पांच वर्षों में 80% की बढ़ोतरी ने राज्य की वित्तीय स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
Kerala Government Financial Issues: विकास योजनाओं के नाम पर मचा हाहाकार
राज्य सरकार को इस कर्ज का बोझ उठाने के लिए कई विकास योजनाओं में कटौती करनी पड़ रही है। राज्य के इतिहास में पहली बार विकास योजनाओं पर खर्च की जाने वाली राशि में 50% की कटौती की गई, जिससे यह 38,000 करोड़ रुपए से घटकर मात्र 19,000 करोड़ रुपए रह गई है। इसका सीधा असर बुनियादी ढांचे के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर पड़ रहा है।
Kerala Financial Management: सरकारी खर्चों का असंतुलन
केरल सरकार के राजस्व खर्च का बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान पर खर्च हो रहा है। मौजूदा समय में राज्य सरकार का 87% खर्च इन तीन मदों में चला जाता है, जिससे विकास कार्यों के लिए केवल 13% ही रकम बच जाती है।
वहीं अगर अन्य राज्यों से तुलना करें तो केरल में सरकारी कर्मचारियों की संख्या बहुत ही ज्यादा है। उदाहरण के तौर पर प्रति लाख जनसंख्या पर कर्नाटक की तुलना में यहां 86% अधिक सरकारी कर्मचारी हैं,तो तेलंगाना की तुलना में यह संख्या 25% अधिक है। इस वजह से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।
Kerala Welfare Schemes: कल्याणकारी योजनाओं के नाम पर खर्च का पहाड़
एक समय था जब केरल अपने कल्याणकारी मॉडल के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यही मॉडल आर्थिक संकट का कारण बन रहा है। 2011 में राज्य में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभार्थियों की संख्या 16.2 लाख थी, जो 2023 में बढ़कर 57.7 लाख हो चुकी थी। सरकार पर इन योजनाओं के तहत पेंशन और अन्य लाभ देने का भारी दबाव है।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि इन पेंशनों की चार किस्तें लंबित पड़ी हैं। एलडीएफ (LDF) ने यह पेंशन बढ़ाकर 2,500 रुपए करने का वादा किया था, लेकिन मौजूदा पेंशन ही दे पाना मुश्किल हो गया है तो बढ़ी हुई राशि कहां से आएगी?
Kerala Economic Crisis: कर राजस्व और उधारी पर निर्भरता
राज्य सरकार के कर राजस्व में भी गिरावट आई है। केवल मोटर वाहन से जुड़े टैक्स में कुछ वृद्धि देखी गई है, लेकिन यह राज्य की समग्र वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए अपर्याप्त है।
साल 2021-23 के बीच केरल सरकार को 40,000 करोड़ रुपए सिर्फ कर्ज के ब्याज के रूप में चुकाने पड़े। 2023 की शुरुआत में तो केरल सरकार को सुप्रीम कोर्ट में यह स्वीकार करना पड़ा था कि कैश (Liquidity) की भारी किल्लत के कारण सरकारी खजाना खाली हो सकता है।
Kerala Economic Crisis: क्या हो सकता है समाधान?
वित्तीय अनुशासन ठीक रखना होगा: राज्य सरकार को अपने खर्चों को नियंत्रित करना होगा और गैर-जरूरी खर्चों को कम करना होगा।
नए राजस्व स्रोत तलाशने पड़ेंगे: कर संरचना में सुधार कर नए राजस्व स्रोत तलाशने होंगे।
कल्याणकारी योजनाओं का फिर से मूल्यांकन करना होगा: जरूरतमंदों तक ही योजनाओं का लाभ पहुंचे, इस पर ध्यान देना होगा।
निजी निवेश को बढ़ावा देना होगा: राज्य में अधिक निजी निवेश आकर्षित कर औद्योगिक विकास पर जोर देना होगा।
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