दिल्ली में दक्षिण भारतीय राज्य सरकारों का प्रदर्शन, सियासी 'संयोग' है या चुनावी 'प्रयोग'
दिल्ली में लगातार दो दिनों से दक्षिण भारतीय राज्य सरकारों की ओर से प्रदर्शन हुए हैं। बुधवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की अगुवाई में 'आवर टैक्स, आवर मनी' के नाम से जंतर-मंतर पर जमावड़ा लगा। गुरुवार को केरल के सीएम पिनराई विजयन की अगुवाई में 'फाइट टू प्रोटेक्ट फेडरलिज्म' के नाम पर उत्तर से दक्षिण तक के विपक्षी नेताओं को जुटा लिया गया।
दो दिनों के प्रदर्शन में दो बातें गौर करने वाली हैं। एक तो इस तरह के प्रदर्शन के लिए ऐसा समय चुना गया है, जब देश में आम चुनावों की तैयारी शुरू हो चुकी है। दूसरी बात ये है कि ये प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं, जब कई विपक्षी नेताओं पर ईडी और आयकर विभाग जैसी केंद्रीय एजेंसियों का शिकंजा कसा जा रहा है।

कर्नाटक पर भारी पड़ा केरल सरकार का प्रदर्शन
गुरुवार को हुए प्रदर्शन के दायरे को बुधवार के जमावड़े से इसलिए बड़ा कहा जा सकता है कि इसमें सीपीएम की अगुवाई वाली केरल की लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट सरकार के नेताओं को तमिलनाडु की डीएमके सरकार और नेशनल कांफ्रेंस के साथ-साथ आम आदमी पार्टी के नेताओं का भी समर्थन हासिल हुआ है।
केरल और कर्नाटक फंड मिलने में भेदभाव का लगा रहे हैं आरोप
केरल की पिनराई विजयन सरकार का आरोप है कि बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार राज्य को मिलने वाले फंड में सौतेला बर्ताव कर रही है। दिलचस्प बात ये है कि कर्नाटक सरकार का आरोप है कि प्रदेश को केंद्र से टैक्स में जो हिस्सा मिलना चाहिए, वह नहीं दिया जा रहा है।
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार का आरोप है कि उनके कर आवंटन में अन्यायपूर्ण तरीके से कमी कर दी गई है। उनका दावा है कि बीते चार वर्षों में उन्हें वापस मिलने वाली टैक्स की हिस्सेदारी 4.71% से घटकर 3.64% रह गई है।
जनसंख्या के आधार पर फंड का आवंटन गलत- कर्नाटक की कांग्रेस सरकार
कर्नाटक के सीएम का आरोप है कि फंड का आवंटन जनसंख्या के आधार पर करना गलत है। उनका कहना है, 'उत्तर भारतीय राज्यों ने जनसंख्या विकास को ठीक से नियंत्रित नहीं किया है।' 'इसलिए जनसंख्या नियंत्रण हमारे लिए अभिशाप बन गया है। क्या ये अन्याय नहीं है?'
केरल सरकार के प्रदर्शन से कांग्रेस की अगुवाई वाला यूडीएफ गायब
लेकिन, इसी कांग्रेस की अगुवाई वाले केरल के विपक्षी गठबंधन यूडीएफ ने एलडीएफ सरकार के प्रदर्शन से खुद को अलग रखा है। तमिलनाडु में सीएम एमके स्टालिन की अगुवाई वाली डीएमके ने भी पिनराई के प्रदर्शन को तब समर्थन देने का फैसला किया, जब प्रदेश में बाढ़ राहत फंड को लेकर संसद में बीजेपी और उनकी पार्टी के सांसदों के बीच तीखी बहस हो गई।
बिना भेदभाव के वित्त आयोग की सिफारिश पर आवंटन- केंद्र सरकार
उधर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि कर्नाटक और अन्य सभी राज्यों को करों और अनुदानों का भुगतान वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार बिना किसी भेदभाव के किया गया है।
सीतारमण ने साफ किया है कि कर हस्तांतरण का निर्धारण वित्त आयोग को प्राप्त संवैधानिक मैनडेट के तहत होता है और सभी राज्यों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद ही किया जाता है।
चुनावी गारंटियों वाले वादे से ध्यान भटकाना चाहती है कांग्रेस- केंद्रीय वित्त मंत्री
उन्होंने कहा कि केंद्र से कर्नाटक को मिलने वाले करों और अनुदानों में करीब 250% की वृद्धि देखी गई है और वहां की कांग्रेस सरकार उन गारंटियों से ध्यान भटकाने के लिए भ्रामक दावे कर रही है, जो पिछले साल विधानसभा चुनाव जीतने के लिए किए गए थे।
आरोप शरारतपूर्ण और अनुचित- निर्मला सीतारमण
कर्नाटक सरकार के इस दावे पर कि राज्य को कर हस्तांतरण में नुकसान हुआ है, वित्त मंत्री ने कहा है कि कर्नाटक सरकार ने इस बात को नजरअंदाज कर दिया है कि उसे 15वें वित्त आयोग की सिफारिश पर 1,631 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान प्राप्त हुआ है।
उन्होंने कहा, 'इसी तरह केरल और अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों को भी 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर राजस्व घाटा अनुदान प्राप्त हुआ है। जबकि, यूपी, एमपी, गुजरात और बिहार जैसे राज्यों को राजस्व घाटा अनुदान नहीं मिला है...हस्तांतरण पर चुनिंदा संदर्भ और अनुदान की अनदेखी शरारतपूर्ण और अनुचित है....'
प्रधानमंत्री ने जतायी बड़ी नाराजगी
इस मुद्दे पर गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में बहुत ही गंभीरता से जवाब दिया था और उनके भाव काफी नाराजगी भरे थे उन्होंने कहा, 'देश को तोड़ने वाला ये कौन सा नैरेटिव चलाया जा रहा है.....आवर टैक्स, आवर मनी, यह किस तरह की भाषा बोली जा रही है?'
उन्होंने कहा, 'देश को तोड़ने के लिए ऐसे नए-नए नैरेटिव बनाना बंद करें....इससे देश के भविष्य को खतरा पैदा होता है...देश को एकसाथ लेकर चलने के प्रयास कीजिए.....'












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