केरल सरकार ने वापस लिया विवादित पुलिस अधिनियम संशोधन अध्यादेश
केरल सरकार ने वापस लिया विवादास्पद संशोधन पुलिस एक्ट, राज्यपाल को भेजे जाएगा कैबिनेट का प्रस्ताव
नई दिल्ली। केरल सरकार ने केरल पुलिस अधिनियम के विवादित सेक्शन 118 ए को वापस ले लिया है। केरल कैबिनेट ने इस संबंध में लाए अध्यादेश को वापस लेने का फैसला किया है। अब अध्यादेश को निरस्त करने का कैबिनेट का निर्णय केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। राज्यपाल की अनुमति मिलने पर केरल पुलिस अधिनियम संशोधन में पुलिस एक्ट सेक्शन 118 ए खत्म हो जाएगा।
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पुलिस एक्ट में संसोधन करते हुए केरल सरकार एक अध्यादेश लेकर आई थी। जिसमें आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट पर पांच साल जेल का प्रावधान रखा गया था। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने पुलिस कानून में बदलाव से जुड़े इस अध्यादेश को मंजूरी देने के बाद इस पर भारी विवाद हो रहा था। विवाद को देखते हुए केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने सोमवार को कहा कि केरल पुलिस एक्ट में संशोधन को लागू नहीं किया जाएगा। मंगलवार को कैबिनेट ने इसे वापस ले लिया।
बता दें कि केरल सरकार ने पिछले सेक्शन 118-ए को जोड़ने के साथ पुलिस एक्ट में बदलाव किया था। इस एक्ट के तहत इंटरनेट या सोशल मीडिया पर किसी आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर पुलिस को असीमित अधिकार दिए गए हैं। इस संशोधन के मुताबिक, अगर सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति के द्वारा डराने और बदनाम करने की कोशिश की जाएगी तो ऐसा करने वाले शख्स को कठोर कार्रवाई का सामन करना पड़ सकता है। साथ ही उसे 5 साल तक की सजा या 10 हजार रुपए का जुर्माना लग सकता है।
केरल पुलिस एक्ट में किए गए संशोधन को लेकर केरल सरकार लगातार विरोध का सामना कर रही थी। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने ट्वीट कर कहा था, मैं एलडीएफ सरकार द्वारा बनाए गए इस फैसले से बहुत हैरान हूं कि सोशल मीडिया पर तथाकथित 'अपमानजनक' पोस्ट डालने को लेकर 5 साल तक की सजा दी जा सकती है। केरल कांग्रेस के प्रमुख मुल्लापल्ली रामचंद्रन ने भी राज्य सरकार के इस अध्यादेश को पूर्ण फासीवादी बताया था। उनका कहना था कि ये मीडिया की आवाज को खामोश करने की सरकार की एक साजिश है।












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