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इस्लामिक एकेडमी के सिलेबस में गीता और संस्कृत, केरल की ASAS ने पेश की मिसाल

कोझिकोड, 27 अगस्त: केरल की एकेडमी ऑफ शरिया एंड एडवांस स्टडीज (एएसएएस) ने मुस्लिम संस्थानों के पाठ्यक्रम में गीता और संस्कृत को शामिल कर एक मिसाल कायम की है। त्रिशूर स्थित एएसएएस द्वारा पेश किए जाने वाले इस्लामिक शरिया पाठ्यक्रम को इस तरह से डिजाइन किया गया है, जो दिखाता है कि ऐसे विचारों के बारे में सीखने से व्यक्ति के ज्ञान का विस्तार कैसे होता है। अपने सिलेबस की वजह से यह संस्था को अन्य इस्लामी संस्थानों से अलग खड़ा करता है। मलिक बिन दिनार इस्लामिक कॉम्प्लेक्स द्वारा संचालित ASAS एक सुन्नी संगठन केरल जाम-अय्यातुल उलेमा के प्रबंधन के अधीन आता है।

इस्लामी शिक्षक दे रहे तालीम

इस्लामी शिक्षक दे रहे तालीम

हालांकि यह जानकर लोग हैरान होंगे लेकिन यह सच है। यहां इस्लामी शिक्षकों द्वारा इसे पढ़ाया जाता है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पलक्कड़ के पट्टांबी के रहने वाले रिंशाद सीपी इस्लामिक शरिया का कोर्स कर रहे हैं। वह संस्कृत सीखने के अलावा उपनिषद, अद्वैत दर्शन और भगवद गीता पर भी क्लास ले रहे हैं। रिंशाद खुद को भाग्यशाली मानते हैं कि उन्होंने संस्कृत और गीता का अध्ययन किया है। यहां विशेषज्ञों से संस्कृत सीखने के अलावा अन्य विषयों में भी ज्ञान का प्रसार किया जा रहा है।

जानिए क्या है इसके पीछे मकसद

जानिए क्या है इसके पीछे मकसद

रिंशाद ने कहा कि संस्था का मुख्य उद्देश्य इस्लामी विषयों के अलावा पाठ्यक्रम में गीता और संस्कृत को शामिल कर छात्र के ज्ञान का विस्तार करना है। उन्होंने कहा कि यहीं कारण है कि शरिया एंड एडवांस स्टडीज एकेडमी (एएसएएस) अन्य संस्थानों से थोड़ा अलग है। एर्नाकुलम जिला सुन्नी संगठन सचिव ओनाम्पिली मोहम्मद फैजी स्वयं संस्कृत के विद्वान के रूप में जाने जाते हैं। उनका दावा है कि शरिया एंड एडवांस स्टडीज एकेडमी छात्रों को भारतीय संस्कृति की समृद्ध विविधता से अवगत कराने का प्रयास करती है।

उच्च शिक्षा के लिए भेजा जाता है बाहर

उच्च शिक्षा के लिए भेजा जाता है बाहर

सुन्नी संगठन के सचिव फैजी ने यह भी कहा कि इस शिक्षण संस्थान में सिद्धरूपम से शुरू होकर संस्कृत के विभिन्न विषयों को चरणबद्ध तरीके से पढ़ाया जाता है। कहा जाता है कि जो लोग संस्कृत सीखने में रुचि रखते हैं उन्हें संस्थान द्वारा उच्च शिक्षा के लिए कहीं और भेजा जाता है। फैजी ने कहा, "यहां, हम अपने छात्रों को भारतीय संस्कृति की समृद्ध विविधता के बारे में जागरूक करने की कोशिश करते हैं और उनमें एक सकारात्मक खिंचाव पैदा करते हैं। बता दें कि फैजी ने श्री शंकर कॉलेज, कलाडी से अद्वैत में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।

संस्कृत पर कार्यशालाएं भी होती है आयोजित

संस्कृत पर कार्यशालाएं भी होती है आयोजित

फैजी ने कहा कि संस्कृत को व्यवस्थित तरीके से पढ़ाया जाता है, जिसकी शुरुआत सिद्धरूपम से होती है। उन्होंने कहा कि जो लोग इसे सीखने में अधिक रुचि रखते हैं उन्हें उच्च स्तर पर भेजा जाता है। संस्कृत विद्वान के पी नारायण पिशारोदी के शिष्य यतींद्रन हमारे संकाय सदस्यों में से एक हैं। मैं भगवद गीता पढ़ाता हूं। इसके अलावा ASAS नियमित रूप से संस्कृत पर कार्यशालाएं आयोजित करता है और छात्रों को इसे बोलना सीखने के लिए प्रोत्साहित करता है।

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