तेलंगाना: केसीआर बोले, कांग्रेस नेताओं को कृषि क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति के मुद्दों की जानकारी नहीं
बीआरएस अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव ने गुरुवार को तेलंगाना में कृषि कनेक्शनों को बिजली आपूर्ति पर गैरजिम्मेदाराना टिप्पणियों के लिए कांग्रेस नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने महसूस किया कि कांग्रेस नेताओं को कृषि क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति से जुड़े व्यावहारिक मुद्दों के बारे में जानकारी नहीं थी।
महेश्वरम, विकाराबाद, जहीराबाद और पाटनचेरु निर्वाचन क्षेत्रों में प्रजा आशीर्वाद सभाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने टीपीसीसी अध्यक्ष ए रेवंत रेड्डी पर हमला बोलते हुए कहा कि, 30 लाख से अधिक कृषि पंप सेट हैं जिनमें अधिकतर 3 एचपी या 5 एचपी क्षमता हैं। इन्हें बदलने में करीब 50,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इसका वित्तपोषण कौन करेगा?

कांग्रेस नेताओं पर कटाक्ष करते हुए चंद्रशेखर राव ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को यह बुनियादी ज्ञान नहीं है कि अगर केवल तीन घंटे बिजली की आपूर्ति की जाती है और किसान उस अवधि के दौरान सभी मोटरों को चालू कर देते हैं, तो पूरी बिजली वितरण प्रणाली ध्वस्त हो जाएगी। क्या मौजूदा नेटवर्क इतना बड़ा भार उठा पाएगा? क्या ट्रांसफार्मर पटाखों की तरह नहीं फटेंगे और वायरिंग नेटवर्क जल नहीं जाएगा? ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस नेताओं में सामान्य ज्ञान की भी कमी है।
बीआरएस अध्यक्ष ने याद दिलाया कि जब तेलंगाना का गठन हुआ था, तो बिजली संकट और अन्य मुद्दों के साथ-साथ पीने और सिंचाई के पानी की उचित सुविधाएं नहीं थीं, जिसके चलते स्थिति अराजक थी। राज्य सरकार ने राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने के साथ-साथ कल्याण और विकास के बीच एक अच्छा संतुलन बनाने के लिए कई उपाय किए।
उन्होंने कहा कि भारत के किसी भी अन्य राज्य के विपरीत तेलंगाना जल उपकर हटाने वाला एकमात्र राज्य है और किसानों को 24 घंटे मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण बिजली भी प्रदान करता है। इसके अलावा बीआरएस सरकार ने राज्य में कृषि में सुधार के लिए रायथु बंधु, रायथु बीमा और अन्य सहायक योजनाओं का भी विस्तार किया। उन्होंने कहा, "अगर यही उपाय अगले 10 से 15 वर्षों तक जारी रखे जाते हैं, तो किसान अपनी परेशानियों से बाहर आ जाएंगे और अपनी फसलों के लिए धन जुटा सकेंगे।
चंद्रशेखर राव ने आगाह किया कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है और धरणी भूमि प्रशासन प्रणाली को खत्म कर देगी। इसके परिणामस्वरूप पूर्ववर्ती आंध्र प्रदेश में पिछली कांग्रेस सरकारों के बिचौलियों और भ्रष्ट अधिकारियों का शासन फिर से शुरू हो जाएगा।












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