Katchatheevu: कच्चाथीवू से विदेश मंत्रालय ने बनाई दूरी, कहा-MEA का द्वीप पर राजनीति से कोई लेना- देना नहीं
कच्चाथीवू द्वीप पर राजनीतिक विवाद से विदेश मंत्रालय ने दूरी बना ली है। गुरुवार को एक बयान में एमईए ने कहा कि विदेश मंत्रालय द्वीप पर राजनीतिक विवाद से दूर है। गुरुवार को विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान प्रवक्ता रणधीर जयसवाल से कच्चाथीवू द्वीप को लेकर कई सवाल पूछ गए। जिनके जवाब में उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय पहले ही इस विषय में स्पष्ट कर चुका है। एमईए के एक बयान के मुताबिक विदेश मंत्रालय का द्वीप विवाद से कोई लेना देना नहीं है।
वर्ष 1974 और 1976 में कच्चाथीवू द्वीप भारत और श्रीलंका की और हस्ताक्षरित दो समझौतों के तहत, भारतीय समुद्र तट से लगभग 20 किमी दूर स्थित द्वीप समुद्री सीमा के श्रीलंकाई हिस्से में माना गया। जब भारत सरकार ने श्रीलंका के साथ ये समझौता किया उस वक्त केंद्र में कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी और प्रधानमंत्री दिवंगत इंदिरा गांधी की थीं।

वहीं दूसरी और तमिलनाडु में भाजपा के प्रमुख के अन्नामलाई ने सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से दस्तावेज प्राप्त किए हैं। जिससे पता चला है कि पिछली कांग्रेस सरकारों ने इस द्वीप को ज्यादा महत्व नहीं दिया। ऐसे में चुनावी मौसम में बीजेपी इस मुद्दे पर कांग्रेस को निशाने पर ले रही है।
इस बीच गुरुवार को विदेश मंत्रायल ने साप्ताहित मीडिया ब्रीफिंग में एमआईए प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा, "मैं आपको बताना चाहूंगा कि जो मुद्दे उठाए गए हैं, विदेश मंत्री ने यहां दिल्ली में और गुजरात में भी प्रेस से बात की है, और सभी मुद्दों को स्पष्ट किया है...कृपया उनकी प्रेस वार्ता को देखें, आपको अपने उत्तर वहां मिल जाएंगे।"












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