Karnataka कांग्रेस में घमासान, नेतृत्व संघर्ष के बीच Siddaramaiah ने राजनीतिक सचिव को अचानक क्यों हटाया?
karnatka congress conflict: कर्नाटक कांग्रेस की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच जारी राजनीतिक खींचतान के बीच कर्नाटक कांग्रेस में अंदरूनी कलह और गहरा गई है। यह टकराव अब सिर्फ सत्ता संतुलन तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि संगठनात्मक अनुशासन और नेतृत्व की पकड़ पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
इसी बीच, सिद्धारमैया ने अपने राजनीतिक सचिव नज़ीर अहमद को पद से हटा दिया है। यह कार्रवाई उप-चुनावों में पार्टी विरोधी गतिविधियों में उनकी कथित संलिप्तता के कारण की गई है, जिसने राज्य में कांग्रेस के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं।

नज़ीर अहमद पर कार्रवाई कर अनुशासन का सख्त संदेश
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने यह फैसला दावणगेरे दक्षिण विधानसभा उपचुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों में उनकी कथित संलिप्तता के आरोपों की जांच के बाद लिया गया। खुफिया इनपुट और कांग्रेस समिति की रिपोर्टों में अहमद की भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिसके बाद यह कदम उठाया गया। इसे पार्टी में अनुशासन बनाए रखने की सख्त कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। अहमद की पार्टी के हितों के खिलाफ जाने वाली गतिविधियों में कथित संलिप्तता का स्पष्ट संकेत मिला था।
जांच के घेरे में बड़े नाम, बढ़ा दबाव
इस मामले में ज़मीर अहमद खान का नाम भी जांच के दायरे में आया है। आरोप हैं कि उन्होंने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों का समर्थन किया और उनके चुनाव अभियानों में मदद की। इंटेलिजेंस विंग और अभिषेक दत्त की रिपोर्टों में कई नेताओं की भूमिका पर सवाल उठे हैं, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष और बढ़ गया है। ज़मीर अहमद खान को कैबिनेट से हटाने पर भी विचार किया जा रहा है।
अल्पसंख्यक नेतृत्व और संगठन में असंतोष
कर्नाटक कांग्रेस में अल्पसंख्यक नेतृत्व को लेकर भी लंबे समय से तनाव बना हुआ है। हाल ही में अल्पसंख्यक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष के इस्तीफे ने इस असंतोष को और उजागर कर दिया। पार्टी हाईकमान पहले से ही कुछ करीबी नेताओं की गतिविधियों से नाराज़ बताया जा रहा है, जिससे संगठनात्मक संकट गहराता दिख रहा है।
मंत्रिमंडल विस्तार पर टकराव, दिल्ली तक पहुंची लड़ाई
राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी विवाद तेज हो गया है। करीब एक दर्जन विधायक अपनी मांगों को लेकर दिल्ली पहुंचे और मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। ये विधायक मंत्री पद की दावेदारी कर रहे हैं और आलाकमान पर दबाव बना रहे हैं।
सीएम vs डिप्टी सीएम: सत्ता संघर्ष का असर
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया कैबिनेट में फेरबदल करना चाहते हैं, लेकिन डीके शिवकुमार के विरोध के चलते मामला अटका हुआ है। शिवकुमार की मुख्यमंत्री बनने की इच्छा और सिद्धारमैया की असहमति ने इस संघर्ष को और तीखा बना दिया है। पिछले एक साल से दोनों गुटों के बीच दबाव की राजनीति जारी है, जिसका असर सरकार के कामकाज पर भी पड़ रहा है।
हाईकमान की नजर, जल्द बड़े फैसले के संकेत
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस हाईकमान जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले सकता है। हालांकि, दिल्ली पहुंचे विधायकों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री बदलने की मांग नहीं कर रहे, बल्कि केवल मंत्रिमंडल विस्तार चाहते हैं। वहीं रणदीप सुरजेवाला की अनुपस्थिति ने फिलहाल हालात को और उलझा दिया है।













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