America Vs Iran: ईरान में मुनीर, सऊदी में शहबाज! पाकिस्तान के 'डबल गेम' से चकराया अमेरिका,क्या होगा बड़ा धमाका

US Iran peace talks: मिडिल ईस्ट में तनाव की आग बुझाने के लिए पाकिस्तान इस वक्त 'मैसेंजर' की भूमिका में नजर आ रहा है। एक तरफ प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सऊदी अरब और कतर जैसे अमीर मुल्कों के दौरे पर हैं, तो दूसरी तरफ आर्मी चीफ आसिम मुनीर तेहरान (ईरान) में डेरा डाले हुए हैं।

8 अप्रैल को शुरू हुआ दो हफ्तों का सीजफायर 22 अप्रैल को खत्म होने वाला है, जिससे पहले दूसरे दौर की बातचीत का दबाव बढ़ गया है। अमेरिका की घेराबंदी और ईरान की जिद के बीच पाकिस्तान खुद को एक ऐसे पुल की तरह पेश कर रहा है, जो युद्ध रोकने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को बचाने की चाबी बन सके।

US Iran peace talks

Islamabad peace summit 2026: आसिम मुनीर का तेहरान दौरा और शांति की कोशिश

पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का ईरान पहुंचना महज एक शिष्टाचार मुलाकात नहीं है। वह अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बनकर पहुंचे हैं। पहले दौर की बातचीत विफल होने के बाद अब कोशिश है कि 22 अप्रैल से पहले कोई ठोस रास्ता निकाला जाए। मुनीर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची के बीच बातचीत का मुख्य मुद्दा युद्ध को टालना और यूरेनियम संवर्धन जैसे पेचीदा मसलों पर ईरान को लचीला रुख अपनाने के लिए राजी करना है।

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शहबाज शरीफ का मिशन: आर्थिक और क्षेत्रीय समर्थन

जब सेना प्रमुख ईरान में हैं, तब प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सऊदी अरब, कतर और तुर्की के दौरे पर निकले हैं। इन देशों का मिडिल ईस्ट की राजनीति में बड़ा रसूख है। शहबाज की कोशिश है कि अरब जगत और तुर्की को इस शांति प्रक्रिया में शामिल किया जाए ताकि अमेरिका और ईरान, दोनों पर दबाव बनाया जा सके। साथ ही, युद्ध की वजह से लड़खड़ाती पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था के लिए वे इन देशों से निवेश और सुरक्षा गारंटी की उम्मीद भी रख रहे हैं।

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Hormuz Strait blockade: होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी और चीन का फैक्टर

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, जिसे ईरान ने लगभग बंद कर रखा है। अमेरिका ने वहां अपनी नाकेबंदी सख्त कर दी है, लेकिन चीन के जहाज का वहां से निकल जाना अमेरिका की रणनीति को बड़ी चुनौती है। ट्रंप प्रशासन अब और ज्यादा आक्रामक है। पाकिस्तान जानता है कि अगर यहां युद्ध बढ़ा, तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिसका सबसे बुरा असर दक्षिण एशिया पर पड़ेगा।

ट्रंप की डेडलाइन और दूसरे दौर की वार्ता का दबाव

डोनाल्ड ट्रंप जल्द से जल्द युद्ध खत्म करने का दावा कर रहे हैं, लेकिन उनकी शर्तें ईरान के लिए सख्त हैं। जेडी वेंस ने माना है कि 49 सालों का अविश्वास इस बातचीत के आड़े आ रहा है। अब सबकी नजरें इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जहां दूसरे दौर की वार्ता होने की संभावना है। पाकिस्तान के लिए यह 'करो या मरो' की स्थिति है, अगर वह दोनों महाशक्तियों को मेज पर ले आता है, तो उसकी अंतरराष्ट्रीय साख बढ़ेगी, वरना क्षेत्र में महायुद्ध का खतरा मंडरा रहा है।

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