MUDA घोटाले के चलते बड़े राजनीतिक संकट की ओर बढ़ रहा है कर्नाटक?
Karnataka News: कर्नाटक में मैसूर का जमीन घोटाला बड़े राजनीतिक संकट की शक्ल अख्तियार करता जा रहा है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया दिल्ली जाकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के सामने जो सफाई दे आए हैं, उससे उनकी कुर्सी को पार्टी से तो फिलहाल जीवनदान मिल गया है। लेकिन, राजभवन भी उनके प्रति वही नरमी दिखाएगा, इसकी संभावना कम है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मैसूर अर्बन डेबलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) की ओर से जमीन आवंटन में कथित धांधली का मुद्दा राजभवन और मुख्यमंत्री के दफ्तर के बीच अब चिट्ठियों की जंग का रूप ले चुका है।

सिद्दारमैया के खिलाफ मुकदमा चलाने की मिलेगी अनुमति!
जानकारी के मुताबिक गवर्नर थावर चंद गहलोत की ओर से सीएम के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मिलने की स्थिति में सरकार की ओर से उसकी काट की तलाश शुरू कर दी गई है।
सीएम खुद को बता रहे हैं पाक-साफ
इस मामले में राज्यपाल थावर चंद गहलोत को एक ऐक्टिवस्ट से शिकायत मिली है, जिसमें उसने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के खिलाफ किसी सक्षम अदालत में मुकदमा चलाने की इजाजत मांगी है। वैसे मुख्यमंत्री अपने परिवार को मूडा की ओर से आवंटित हुई जमीन को लेकर खुद का बचाव कर रहे हैं और उसे पूरी तरह से प्रावधानों के अनुसार बता रहे हैं।
कौड़ियों के मोल की जमीन के बदले मिली बेशकीमती जमीन
मैसूर अर्बन डेबलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) कर्नाटक सरकार से जुड़ा संगठन है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया पर आरोप है कि उनके प्रभाव में सभी नियमों को ताक पर रखकर मूडा ने उनकी पत्नी पार्वती को कौड़ियों की जमीन के बदले मैसूर के महंगे इलाके में 14 प्लॉट आवंटित कर दिए।
ये प्लॉट मूडा ने उस 3 एकड़ 16 गुंटा जमीन के बदले दिए गए, जो मैसूर के बाहरी इलाके की गांव वाली जमीन थी, जिसकी कीमत बहुत ही मामूली बताई जाती है।
सिद्दारमैया के जवाब से संतुष्ट नहीं राज्यपाल!
रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में शिकायत मिलने के बाद राज्यपाल ने मुख्यमंत्री से उनका स्पष्टीकरण मांगा था। जवाब मिलने पर और स्पष्टीकरण मांगा गया। लेकिन, कहा जा रहा है कि सिद्दारमैया का जवाब राज्यपाल को संतोषजनक नहीं लगा है।
सरकार राज्यपाल से मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं देने का कर सकती है आग्रह
ऐसे में कांग्रेस को डर सता रहा है कि राज्यपाल गहलोत कभी भी मुख्यमंत्री के खिलाफ कथित मूडा घोटाले में मुकदमा चलाने की अनुमति दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में सिद्दारमैया पर इस्तीफे का दबाव बढ़ सकता है और बेंगलुरू से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस की फजीहत शुरू हो सकती है।
ऐसे में माना जा रहा है कर्नाटक कैबिनेट सीएम सिद्धारमैया की कुर्सी बचाने के लिए राज्यपाल से मुकदमे की अनुमति नहीं देने के अनुरोध करने का फैसला ले सकती है। क्योंकि, पार्टी आलाकमान ने पहले ही सिद्दारमैया के साथ डटे रहने का संकेत दे रखा है।
कांग्रेस अदालत में भी फैसले को दे सकती है चुनौती
यह भी चर्चा है कि अगर फिर भी गवर्नर गहलोत मुकदमा चलाने की अनुमति देते हैं तो पार्टी वकीलों की फौज उतारकर उसे हाई कोर्ट में चुनौती दे सकती है। वैसे इस मामले में कांग्रेस पहले पूरी तरह से बीजेपी के दबाव में दिख रही थी।
लेकिन, जिस तरह से बुधवार को जेडीएस नेता और केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने 3 अगस्त से बेंगलुरू से मैसूर तक की भाजपा की एक हफ्ते की पदयात्रा को मौलिक समर्थन देने तक से इनकार कर दिया है, उससे कांग्रेस को अंदर ही अंदर काफी खुशी हो रही है।












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