Karnataka elections 2023: दक्षिण कर्नाटक के वो जिले जहां लहराता रहा है भगवा, जो हैं भाजपा का गढ़
Karnataka elections 2023: दक्षिण कर्नाटक के वो जिले जहां लहराता रहा हैं भगवा, जो है भाजपा का गढ़

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जीत हासिल कर भारतीय जनता पार्टी सत्ता में वापसी के लिए पूरा जोर लगा रही है। वहीं चुनाव में किस पार्टी को किस विधानसभा सीट से समर्थन मिलेगा इसका अंदाजा पिछले चुनाव परिणाम के आधार पर लगाया जा सकता है। हालांकि रानजीति में निश्चित कुछ भी नहीं होता है। हालांकि इस दक्षिण कर्नाटक के कुछ ऐसे जिले हैं तो प्रदेश के बाकी हिस्सों से अलग हैं। शिमोगा, चिक्कमगलुरु और कोडागु जिले दक्षिण कर्नाटक में राजनीतिक समीकरण हमेशा से भाजपा के पक्ष में ही रहा है।
तीन जिलों में छाया हमेशा छाया रहा भगवा
शिमोगा, चिक्कमगलुरु और कोडागु इन तीन जिलों के राजनीतिक समीकरण कुछ भी रहे हर हाल में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत मिलता रहा है। इन जिलों में बीजेपी अपनी जड़ें जमा चुकी है। बीजेपी ने शिमोगा में बीएस येदियुरप्पा, चिक्कमगलूर में बाबा बुदनगिरी विवाद, कोडागु में टीपू सुल्तान की जयंती विवाद की बुनियाद को आगे बढ़ाकर एक ठोस नींव रखी है।
1983 से भाजपा ने शिवमोगा में अपनी जड़े जमानी शुरू की
1983 से भाजपा ने शिमोगा जिले में अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू की। जब पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा एम उन्होंने आनंद राव के साथ लड़ाई लड़ी और पहली बार राज्य विधानसभा के लिए चुने गए। उसके बाद से हर चुनाव में ने धीरे-धीरे हर चुनाव में पार्टी को मजबूत किया है।
पूर्व मुख्यमंत्री एस बंगरप्पा के भाजपा में आने से मिली मजबूती
समाजवादी नेता शांतावेरी गोपाल गौड़ा के गृहनगर तीर्थहल्ली के लोगों ने पहली बार 1994 में भाजपा के अरागा ज्ञानेंद्र को चुना। इसके अलावा पिछड़े वर्गों के कद्दावर नेता पूर्व मुख्यमंत्री एस बंगरप्पा के भाजपा में शामिल होने के बाद, सागर और सोरबा में भाजपा उम्मीदवारों जीते। माना जाता है कि उन्हीं की वजह से भाजपा ने इन जिलों में इतनी मजबूत पकड़ बनाई है।
सांप्रदायिक दंगोंं ने हिंदुओं को किया लामबंद
भाजपा के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि आरएसएस की गतिविधियों से शिमोगा में बीजेपी का विकास हो सकता है। शिमोगा शहर में बार-बार होने वाले सांप्रदायिक दंगों ने भाजपा को हिंदुओं को लामबंद करने के लिए उत्साहित किया है। 2018 के चुनाव में बीजेपी ने सात में से छह सीटों पर जीत हासिल की थी।
चिक्कमंगलूर में बाबा बुडानगिरी विवाद
चिक्कमगलूर में, 2000 के दशक में श्री गुरु दत्तात्रेय की बाबाबुदन स्वामी दरगाह पर एक विवाद के बाद भाजपा यहां अपना आधार बढ़ाने में सफल रही, जो हिंदुओं और मुसलमानों दोनों द्वारा पूजा की जाने वाली एक गुफा मंदिर है।
1990 के दशक में संघ परिवार से जुड़े संगठनों ने मांग की कि इस स्थल को हिंदू पूजा स्थल घोषित किया जाए। इस वजह से 2004 में पहली बार बीजेपी ने चिकमंगलूर जिले की पांच में से तीन सीटों पर जीत हासिल की थी। इससे पार्टी को नया जोश मिला है। इसके बाद पिछले 2018 के चुनाव में बीजेपी ने पांच में से चार सीटों पर जीत हासिल की थी।
कोडागु में ऐसे बनी भापजा की मजबत पकड़
बीजेपी के पहले प्रदेश अध्यक्ष ए.के. सुब्बैया कोडागु जिले के रहने वाले हैं और उन्होंने लगातार बीजेपी को खड़ा किया है, लेकिन वह बाद में पार्टी के सबसे मुखर आलोचकों में से एक बन गए। भाजपा ने पिछले चुनाव में मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की जयंती मनाने के सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के फैसले को एक प्रचार टूल के रूप में इस्तेमाल किया। यही वजह है कि 2018 में जिले की दोनों सीटों पर बीजेपी को जीत दर्ज की थी।












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