अनजान कैंसर मरीज के लिए मसीहा बना पुलिसकर्मी, स्कूटर से 960 KM का सफर तय कर पहुंचाई दवा

बेंगलुरु। देश में कोरोना के प्रकोप को रोकने के लिए 40 दिनों का लॉकडाउन जारी है। जिसके चलते लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी बीमार लोगों को हो रही है। उन्हें दवाईयों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। कर्नाटक में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया है। जहां पर कैंसर मरीज को दवाईयों की जरूरत थी लेकिन लॉकडाउन के चलते दवा नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में कर्नाटक पुलिस का एक जवान उनके लिए मसीहा बनकर आया। पुलिस के जवान ने स्कूटर से 960 किमी का सफर तय कर पेशेंट तक कैंसर की दवा पहुंचाई।

टीवी पर सुनी मरीज की परेशानी

टीवी पर सुनी मरीज की परेशानी

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, कर्नाटक के धारवाड़ में रहने वाले उमेश कैंसर के मरीज है। उन्हें दवाओं की जरूरत थी। लेकिन उन्हें वे दवाएं बेंगलुरु में ही मिल सकती थीं। इसी दौरान 10 अप्रैल को एक स्थानीय चैनल पर बेंगलुरू पुलिस में कार्यरत हेड कान्स्टेबल एस कुमारस्वामी एक स्थानीय चैनल पर न्यूज एंकर आौर धारवाड़ निवासी उमेश की बातचीत सुनी। जिसमें उन्हें पता चला कि, रविवार तक उमेश को यह दवा अवश्य लेनी थी, लेकिन लॉकडाउन के चलते दवा पाना मुश्किल था।

कुमारस्वामी दवा लेकर पहुंचे मरीज के घर

कुमारस्वामी दवा लेकर पहुंचे मरीज के घर

इसके बाद कुमारस्वामी ने अगले दिन अपनी मॉर्निंग शिफ्ट समाप्त की और उस न्यूज चैनल के ऑफिस पहुंचे और उन्होंने उमेश का नंबर लिया। इसके बाद वे दवा लेने बेंगलुरू के डीएस रिसर्च सेंटर पहुंचे। वहां से दवा लेकर उन्होंने पूरी बात अपने अधिकारी एसीपी अजय कुमार सिंह को बताई और धारवाड़ जाने की परमिशन मांगी। उन्हें धारवाड़ जाने की अनुमति मिल गई। वे शनिवार सुबह 4 बजे निकले और 2.30 बजे धारवाड़ पहुंचे। 10 घंटे के सफर में स्वामी ने केवल पानी और बिस्कुट लिया। बेंगलुरु धारवाड़ से 430 किलोमीटर दूर है।

30 घंटे में किया 960 किमी का सफर

30 घंटे में किया 960 किमी का सफर

कुमारस्वामी ने जब उमेश के दरवाजे पर दस्तक तो उमेश उन्हें देखकर दंग रह गए। कुछ देर उमेश के घर रुकने के बाद स्वामी शाम 4 बजे वापस बेंगलुरू का सफर शुरू किया। पिछले 18 घंटों से लगातार स्कूटर चलाकर थक चुके कुमारस्वामी ने 10.30 बजे चित्रदुर्ग के फायर स्टेशन पहुंचे और वहां रात को विश्राम किया। अगले दिन सुबह 5.30 बजे वे फिर बेंगलुरु के लिए निकल पड़े और सुबह 10.30 बजे बेंगलुरु पहुंच गए।

हर कोई कर रहा है तारीफ

कुमार स्वामी ने बताया कि उनका धारवाड़ से कोई रिश्ता नहीं है, वे रामनगरा के रहने वाले हैं। उन्होंने कहा मैंने बस आत्मा की आवाज सुनी और निकल पड़ा। अब कुमारस्वामी के इस जज्बे की हर कोई तारीफ कर रहा है। बेंगलुरू के सिटी कमिश्नर भास्कर राव ने भी कुमारस्वामी के जज्बे को सलाम करते हुए उन्हें सम्मानित किया है। कुमारस्वामी ने 30 घंटे में लगभग 960 किलोमीटर की यात्रा की थी।

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