Karnataka: लिंगायतों पर कांग्रेस नेता के बयान से सिद्दारमैया सरकार में मची खलबली,डैमेज कंट्रोल में जुटी पार्टी
कर्नाटक में राजनीतिक रूप से सबसे प्रभावशाली माने जाने वाले लिंगायतों की उपेक्षा को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के दावों ने सिद्दारमैया सरकार को असहज कर दिया है। जबकि, बीजेपी को इससे फ्रंट फुट पर खेलने का मौका मिल गया है।
हालांकि, मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने अपनी ही पार्टी के बुजुर्ग नेता शमनूर शिवशंकरप्पा के आरोपों का खंडन करने की कोशिश की है। लेकिन, 92 वर्षीय नेता के आरोपों ने पार्टी के कई बड़े नेताओं को बैकफुट पर ला खड़ा किया है। शिवशंकरप्पा ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस सरकार में लिंगायतों और खास तौर पर समुदाय के अधिकारियों के हितों को दरकिनार किया गया है।

कांग्रेस के बुजुर्ग नेता के आरोपों से हिली पार्टी और सरकार
कर्नाटक की दावणगेरे दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक शिवशंकरप्पा ऑल इंडिया वीरशैव महासभा के अध्यक्ष भी हैं, जो लिंगायतों का ही एक बहुत प्रभावी संगठन है। इन्होंने लिंगायत के लिए मुख्यमंत्री पद की भी मांग की है, जबकि कुछ दिनों पहले ही कांग्रेस की ओर से ऐसे मुद्दों पर पार्टी नेताओं को सार्वजनिक तौर पर नहीं बोलने की हिदायत दी गई है।
बीजेपी को मिला कांग्रेस को घेरने का मौका
वीरशैव-लिंगायत कर्नाटक में राजनीतिक रूप से सबसे प्रभावी समुदाय माना जाता है और बीजेपी के पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा और बसवराज बोम्मई भी इसी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। कांग्रेस नेता के बयान की वजह से कांग्रेस जहां रक्षात्मक दिख रही है, वहीं आने वाले लोकसभा चुनावों को देखते हुए बीजेपी को इसे भुनाने का बढ़िया मौका दिख रहा है।
सीएम सिद्दारमैया ने कांग्रेस नेता के आरोपों क नकारा
हालांकि, कर्नाटक के सीएम सिद्दारमैया ने अपने सहयोगी के नजरिए को खारिज करते हुए दावा किया है कि उनकी सरकार सब के साथ समान बर्ताव कर रही है। बेंगलुरु में मीडिया वालों से उन्होंने कहा, 'हमारी धर्मनिरपेक्ष सरकार है, जो कि जाति के आधार से ऊपर उठकर काम करती है। हमारी अन्न भाग्य, शक्ति, गृह ज्योति और गृह लक्ष्मी सभी योजनाएं सभी समुदायों तक पहुंच रही हैं।'
कांग्रेस के कई नेता डैमेज कंट्रोल की कोशिश में
हालांकि, कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेता जैसे कि उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, मंत्री जी परमेश्वरा और पार्टी नेता ईश्वर खंड्रे इसपर प्रतिक्रिया देने को लेकर काफी सावधान हैं। इनमें से कुछ इसे तूल देने के पक्ष में नहीं हैं और सिर्फ इतना कह रहे है कि वे इस संबंध में वरिष्ठ नेता से सीधे बात करेंगे।
कांग्रेस सरकार में लिंगायतों को साइडलाइन करने का लगाया था आरोप
शिवशंकरप्पा ने शनिवार को कहा था कि कांग्रेस की सरकार में लिंगायत साइडलाइन किए जा रहे हैं और सरकार में सबसे महत्वपूर्ण पदों पर गैर-लिंगायत अधिकारियों का कब्जा हो गया है। गौरतलब है कि उनके बेटे एसएस मल्लिकार्जुन सिद्दारमैया सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।
लिंगायतों के लिए सीएम पद की भी की थी वकालत
उन्होंने लिंगायतों के लिए उपमुख्यमंत्री पद की मांग भी ठुकरा दी थी और कहा था कि समुदाय को सिर्फ सीएम पोस्ट देकर ही न्याय मिल सकता है। विपक्षी बीजेपी के येदियुरप्पा, बसवराज बोम्मई से लेकर बीवाई विजयेंद्र सब ने उनकी बातों का जोरदार समर्थन किया है और समुदाय से कांग्रेस से सावधान रहने को कहा है। बोम्मई ने कहा, 'लोग उनकी टिप्पणियों को गंभीरता से लेते है।' बीजेपी ने एक्स पर लिखा, 'लोग सिद्दारमैया की तुष्टिकरण की राजनीति और भाई-भतीजावाद से पक चुके हैं।'
10 मई को कर्नाटक विधानसभा के जो चुनाव परिणाम आए थे, उसके नतीजे से साफ है कि लिंगायतों ने कांग्रेस के पक्ष में जमकर वोटिंग की थी। पार्टी के 46 लिंगायत उम्मीदवारों में 37 जीते थे। जबकि, बीजेपी ने 69 पर दांव लगाया था और सिर्फ 15 ही विधासभा पहुंच सके थे। चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस ने बीजेपी पर लिंगायत-विरोधी होने का आरोप लगाया था, क्योंकि जगदीश शेट्टार और लक्ष्मण सावदी जैसे बड़े लिंगायत नेता भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे।












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