MUDA Case में कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया को बड़ी राहत, जानिए क्या है पूरा मामला
MUDA Case: मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) घोटाले मामले में कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया को बड़ी राहत मिली है। भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी संस्था लोकायुक्त मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) मामले में कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया, उनकी पत्नी और अन्य को क्लिनचीट दे दी है। लोकायुक्त कोर्ट ने कहा है कि इन लोगों के खिलाफ कोई कोई सबूत नहीं है।

पिछले साल शुरू हुई थी जांच
बता दें कि सितंबर 2024 में बेंगलुरु की एक विशेष आदालत ने इस मामले की जांच लोकायुक्त को सौंपी थी। वहीं एक सप्ताह पहले सीएम सिद्धारमैया और उनके परिवार से जुड़े MUDA साइट आवंटन मामले की व्यापक जांच के बाद लोकायुक्त ने यह रिपोर्ट सौंप दी। जिस पर आज फैसला आया है।
याचिकाकर्ता को भेजा पत्र
लोकायुक्त ने MUDA मामले में सिद्धारमैया और उनकी पत्नी के खिलाफ याचिका दायर करने वाली याचिकाकर्ता कृष्णा को एक पत्र भेज कर ये जानकारी दी है। पत्र में लिखा गया है कि, MUDA मामले में सिद्धारमैया और उनकी पत्नी के खिलाफ कोई भी सबूत नहीं पाया गया है जिससे उसके ऊपर कार्रवाई हो सके।
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जानिए सिद्धारमैया पर क्या है आरोप ?
कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया पर आरोप है कि वे अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए MUDA द्वारा अधिग्रहित तीन एकड़ 16 गुंटा भूमि के बदले अपनी पत्नी बीएम पार्वती के नाम पर 14 साइटों का मुआवज़ा लिया।
यह भूमि मूल रूप से MUDA द्वारा 3,24,700 रुपये में अधिग्रहित की गई थी। जबकि सीएम की पत्नी को जमीन से कहीं अधिक मुआवजा मिला। उन्हें खेती की जमीन के बदले पॉश इलाके में 14 साइटें आवंटिट की गई। जिसकी कीमत 56 करोड़ रुपये है।
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विपक्षी दलों ने सिद्धारमैया का मांगा था इस्तीफा
वहीं इस मामले को लेकर विपक्षी दलों ने विधानसभा से लेकर सड़क तक जोरदार प्रदर्शन किया था। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस मामले में 3000 करोड़ से ज्यादा का घोटाला हो सकता है। लेकिन इस मामले पर अब लोकायुक्त ने सीएम सहित इस मामले के सभी आरोपी को क्लिनचीट दे दी है।












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