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Karnataka: उपचुनाव में तीनों सीटें कैसे हारी BJP, क्या गुटबाजी से कांग्रेस को मिला फायदा?

Karnataka BJP Factionalism: कर्नाटक विधानसभा के लिए हुए हालिया उपचुनाव में बीजेपी तीनों सीटें हार गई। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई की सीट भी शामिल है, जिसे उन्होंने लोकसभा चुनाव जीतने की वजह से खाली किया था। कर्नाटक की मौजूदा कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री सद्दारमैया पर लगे अनेक भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद भी बीजेपी जिस तरह से हारी है,उसके बाद पार्टी की आंतरिक गुटबाजी भी सतह पर आ गई है।

कर्नाटक बीजेपी में यह गुटबाजी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र और एमएलए बसनगौड़ा पाटिल यतनाल के समर्थकों के बीच दिख रही है। इसी गुटबाजी के बीच यतनाल के खिलाफ पार्टी की केंद्रीय अनुशासन समिति ने एक नया कारण बताओ नोटिस जारी किया है। हालांकि, फिर भी उनके तेवर नरम पड़ते नहीं दिख रहे हैं।

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बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने मानी गुटबाजी की बात
यतनाल के खिलाफ नोटिस जारी होने के बाद विजयेंद्र ने कहा, 'यतनाल जब चाहते हैं वो राज्य के सबसे बड़े नेता येदियुरप्पा के खिलाफ बोलते हैं, अन्य यतनाल के कंधे पर रखकर बंदूक चला रहे हैं। इससे निश्चित तौर पर पार्टी को फायदा नहीं होगा।'कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा इस समय बीजेपी के फैसले लेने वाली सबसे बड़ी संस्था पार्लियामेंटरी बोर्ड के सदस्य हैं और विजयेंद्र के पिता भी।

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यतनाल के पीछे बीएल संतोष?
विजयेंद्र ने जिस तरह की बातें कही हैं, उससे लगता है कि उनका इशारा बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष की ओर है। क्योंकि येदियुरप्पा कैंप को लगता है कि यतनाल के पीछे उन्हीं का हाथ है। तथ्य यह है कि येदियुरप्पा को कर्नाटक में लिंगायतों का सबसे बड़ा नेता माना जाता है और वह अपनी सियासी विरासत अपने बेटे विजयेंद्र को सौंपना चाहते हैं।

वहीं यतनाल भी लिंगायत समुदाय के ही नेता हैं और माना जा रहा है कि संतोष उनके माध्यम से कर्नाटक बीजेपी में येदियुरप्पा के प्रभुत्व को खत्म करना चाहते हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुतबिक एक बीजेपी नेता ने कहा, 'यतनाल देश के एक वरिष्ठ बीजेपी नेता पर नियमित हमला करने से नहीं हिचकते हैं, इससे लगता है कि उनके पीछे के शीर्ष नेतृत्व में से किसी का समर्थन है।'

विधानसभा चुनावों में भी बीजेपी को हो चुका है गुटबाजी से नुकसान
दरअसल, पिछले साल कर्नाटक विधानसभा चुनाव के समय ही येदियुरप्पा और संतोष खेमे में मतभेद गहरा गया था। तब संतोष खेमे के उम्मीदवारों को करारी हार का सामना करना पड़ा था और येदियुरप्पा की ओर से इसे गलत प्रत्याशियों को टिकट देना वजह बताया गया। इसी के बाद संतोष के करीबी माने जाने वाले नलीन कटील को हटाकर प्रदेश भाजपा की कमान येदियुरप्पा के बेटे विजयेंद्र को सौंप दिया गया।

लेकिन, यतनाल नहीं रुके और विधानसभा चुनावों के बाद भी वह लगातार येदियुरप्पा को निशाना बनाते रहे। उन्होंने भाजपा के खराब प्रदर्शन के लिए उन्हें निशाना बनाया और उनपर कांग्रेस नेताओं के साथ 'समझौते की राजनीति' करने का भी आरोप लगा दिया। बाद में जब विजयेंद्र को कमान मिल गया तो उन्होंने उनपर भी हमले शुरू कर दिए। इन वजहों से यतनाल को पार्टी तीन नोटिस दिए जा चुकी है, लेकिन वह अपने रवैए पर कायम रहे हैं।

वक्फ बोर्ड के विरोध में पार्टी लाइन से अलग चलने का है यतनाल पर आरोप
इसी कड़ी में यतनाल ने पार्टी के निर्देशों को दरकिनार करते हुए वक्फ बोर्ड के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करने का फैसला किया है। इसी मुद्दे पर पार्टी ने प्रदेश भर में यात्रा के लिए तीन टीमें बनाने का एलान किया था, लेकिन यतनाल और उनके समर्थकों ने अलग से यात्रा निकाली।

इससे पहले मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उनकी पत्नी पार्वती के खिलाफ बीजेपी ने एक 'मैसुरु चलो' पदयात्रा आयोजित की थी, लेकिन यतनाल और रमेश जारकीहोली और कुमार बंगरप्पा जैसे नेताओं ने उसमें हिस्सा नहीं लिया था। ये दोनों नेता भी संतोष कैंप के माने जाते हैं।

क्या गुटबाजी से कांग्रेस को मिला फायदा?
लेकिन, इस गुटबाजी के बीच बीजेपी को हालिया विधानसभा चुनावों में बहुत ही बड़ा झटका लगा। कांग्रेस सरकार के खिलाफ तमाम आरोपों के बावजूद पार्टी तीनों सीटें हार गई। इसको लेकर यतनाल ने आरोप लगाया कि यह 'कांग्रेस नेताओं के साथ अंदरूनी समझदारी की राजनीति' का नतीजा है।

वैसे यतनाल को मिले ताजा नोटिस के बारे में विजयेंद्र ने कहा है कि इसके पीछे वो नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग हो रही है।'

अब सवाल है कि जब बीजेपी कर्नाटक में अपनी आपसी गुटबाजी से ही नहीं निपट पा रही है तो वह कांग्रेस को जनता से जुड़े मुद्दों पर घेरने में कैसे सफल होगी। क्योंकि, जानकारी के मुताबिक आरएसएस के वरिष्ठ नेताओं की ओर से भी दोनों कैंप में सुलह की कोशिशों के निर्देश मिल चुके हैं, लेकिन लगता नहीं है कि पार्टी में इसके लिए फिलहाल कोई तैयार है।

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