चीन पर बोले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह- पंडित नेहरू की मंशा पर सवाल नहीं उठाऊंगा, नीति खराब हो सकती है नीयत नहीं
श्रीनगर, 24 जुलाई: कारगिल विजय दिवस के मौके पर रविवार को जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना के जवानों के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहुंचे। इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि देश की सेवा में अपने प्राण न्यौछावर करने वाले शहीदों को हम आज याद कर रहे हैं। हमारी सेना ने हमेशा देश के लिए यह सर्वोच्च बलिदान दिया है। 1999 के युद्ध में हमारे कई बहादुर सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी, मैं उन्हें नमन करता हूं। इस दौरान उन्होंने कहा कि चीन को लेकर मैं पंडित नेहरू की आलोचना नहीं करूंगा।

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अपने संबोधन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 1962 में चीन ने लद्दाख में हमारे इलाके पर कब्जा कर लिया, उस वक्त पंडित नेहरू हमारे देश के प्रधानमंत्री थे। मैं उसकी मंशा पर सवाल नहीं उठाऊंगा। इरादे अच्छे हो सकते हैं लेकिन यह नीतियों पर लागू नहीं होता है। उन्होंने आगे कहा कि मैं भी एक विशेष राजनीतिक पार्टी से आता हूं, लेकिन मैं भारत के किसी भी पीएम की आलोचना नहीं करना चाहता। हालांकि, आज का भारत दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों में से एक है।
वहीं पीओके पर सिंह ने कहा कि पाक अधिकृत कश्मीर पर भारत की संसद में प्रस्ताव पारित हुआ था। पाक अधिकृत कश्मीर भारत का हिस्सा था, भारत का हिस्सा है और रहेगा। ये कैसा हो सकता है कि शिव के स्वरूप बाबा अमरनाथ हमारे यहां हो और मां शारदा शक्ति स्वरूपा LoC के पार हो। इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कारगिल दिवस के मौके पर जम्मू में ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले सुरक्षाकर्मियों के परिजनों से मुलाकात की।
'दुश्मनों के मंसूबों को नाकाम किया'
आजादी के बाद से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का ये पूरा इलाका 'मेन वॉर थिएटर' बना हुआ है। आजादी के बाद से ही इस पूरे इलाके पर दुश्मनों की गिद्ध दृष्टि लगी हुई थी, लेकिन भारतीय सेनाओं ने अपने पराक्रम और बलिदान के परिणास्वरूप दुश्मनों के मंसूबों को नाकाम किया। भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता को बनाए रखने के लिए हमारे सेना ने जो योगदान दिया है उसे भारत कभी भूल नहीं सकता है और देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए जिन जवानों ने शहादत दी है मैं उन सभी जवानों की स्मृति में शीश झुकाकर नमन करता हूं।












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