कारगिल युद्ध को याद करते हुए कर्नल विजय कुमार ने सुनाई वीर जवाओं की कहानी, बताया कैसा था उस वक्त का मंजर!
Col S Vijay Kumar: कारगिल विजय दिवस! हर साल 26 जुलाई को कारगिल युद्ध की जीत और इस जीत के लिए दी गई हमारे वीर जवानों की शहादत को याद करते हुए मनाया जाता है। इस साल कारगिल युद्ध की 25वीं वर्षगांठ है।
कारगिल विजय दिवस के मौके पर भारत अपने सभी शहीद बहादुरों को याद करता है। इस युद्ध को कुछ ऐसे लौह पुरुष ने भी देखा जो इस गाथा को बताने और सुनने के लिए जीवित रहे।

कर्नल एस विजय कुमार (सेवानिवृत्त) उन्हीं वीरों में से एक हैं।
विजय कुमार सेना में जाने को लेकर कहते हैं, "यह मेरे खून में है। यह मेरे डीएनए में है। मैं एक सैनिक बनने के लिए ही पैदा हुआ हूं।" कर्नल एस विजय कुमार बचपन से ही सेना में भर्ती होना चाहते थे और उन्होंने अपने इस सपने को पूरा भी किया। साथ ही भारत के लिए वो युद्ध लड़ा जिसे आज भी याद किया जाता है।
आईएमए में प्रशिक्षित विजय कुमार अरुणाचल प्रदेश में अपनी पोस्टिंग को याद करते हुए बताते हैं, "चूंकि भारत को दो-तरफा युद्ध के खतरे का सामना करना पड़ रहा था - सीमा के दूसरी ओर चीन के साथ - सेना ने अरुणाचल में भी अपने सैनिकों को तैनात करने का फैसला किया। यह एक रणनीतिक कदम था जिसने भारत-चीन सीमा को एक और युद्ध क्षेत्र में बदलने से रोका।"
उन्होंने बताया, "मैं उतना भाग्यशाली नहीं था, मुझे अरुणाचल में पोस्टिंग मिली। मैं कारगिल में अपने बैचमेट्स के साथ शामिल होना चाहता था। लेकिन, जब मेरे कमांडिंग ऑफिसर ने मुझसे कहा कि हमें भारत-चीन सीमा की भी रक्षा करने की जरूरत है क्योंकि तनाव बढ़ने की संभावना है। आश्रय की बात रही की ऐसा कुछ महीनों के भीतर ही हो गया।"
विजय कुमार ने आगे बताया, "कारगिल युद्ध में अपने दोस्तों को खोना ऐसी बात नहीं है जिससे हम बहुत खुश हैं, लेकिन मुझे हमारे सैनिकों द्वारा दिखाए गए उच्च स्तर के आचरण और व्यावसायिकता पर गर्व है। मैं अपने सभी सैनिकों को सलाम करता हूं। मुझे उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर गर्व महसूस होता है।"
कारगिल विजय दिवस सभी भारतीयों के लिए सिर्फ स्मरण का दिन नहीं है, बल्कि यह दुश्मन ताकतों पर भारत की जीत का भी दिन है। अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों ने खुद को इतिहास के पन्नों में अमर कर लिया है।












Click it and Unblock the Notifications