पीएम मोदी के नाम खुला खत लिखने वालों पर भड़कीं कंगना, कही ये बात
नई दिल्ली। देश में मॉब लिंचिंग की वारदात पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद मोदी को विभिन्न क्षेत्रों की 49 हस्तियों ने पत्र लिखा था। इसके तीन दिन बाद ही 61 शख्सियतों ने एक खत लिखकर पीएम मोदी को चिट्ठी लिखने वाले 49 हस्तियों पर कई आरोप लगाए हैं। उन्होंने इन हस्तियों को चुनिंदा घटनाओं पर गुस्सा जताने, झूठे किस्से सुनाने और राजनीतिक पक्षपात करने का आरोप लगाया है। इन 61 लोगों में फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत भी है।

'कुछ लोग गलत बातें गढ़ने के लिए अपने ओहदे का दुरुपयोग कर रहे हैं'
खुले खत के जवाब में पत्र लिखने वालों में अभिनेत्री कंगना रनौत भी हैं। इस पूरे मामले पर कंगना रनौत ने कहा, 'कुछ लोग गलत बातें गढ़ने के लिए अपने ओहदे का दुरुपयोग कर रहे हैं कि इस सरकार में गलत चीजें हो रही हैं, जबकि पहली बार चीजें सही दिशा में जा रही हैं। इस फिल्म अभिनेत्री ने कहा, 'जो बदलाव हो रहे हैं वे देश की तरक्की के लिए हैं, हम इसका हिस्सा हैं, लेकिन इससे कुछ लोगों को परेशानी है। आम जनता ने अपने नेताओं को चुना है।' कंगना ने कहा कि जो लोगों की इच्छाओं का सम्मान नहीं करते, ये वही लोग हैं जिनका लोकतंत्र के प्रति सम्मान नहीं हैं।

मॉब लिंचिंग को लेकर खुले खत के जवाब में आया एक और खत
61 हस्तियों ने जो खत लिखा है, उसका शीर्षक है- 'Against Selective Outrage and False Narratives', इसमें लिखा गया है कि 23 जुलाई को पीएम मोदी के नाम लिखे गए खुले खत ने हमें हैरत में डाल दिया है। देश की चेतना के 49 स्वयंभू रखवालों और अभिभावकों ने चुनिंदा चिंता जाहिर की है और साफतौर पर राजनैतिक पक्षपात का प्रदर्शन किया है। इन्होंने 49 हस्तियों के खत पर कहा है कि वे लोग तब कहां थे जब भारत को तोड़ने की मांग की गई थी।

लिंचिंग की घटनाओं पर 49 हस्तियों ने जताई थी चिंता
बता दें कि बीते 23 जुलाई को पीएम को जिन 49 लोगों ने खुला खत लिखा था उसमें मणिरत्नम, अदूर गोपालकृष्णन, अनुराग कश्यप और अपर्णा सेन, कोंकणा सेन शर्मा, सौमित्र चटर्जी जैसे कई फिल्म निर्देशक और अभिनेता शामिल थे। इन लोगों ने देश में मॉब लिंचिंग घटनाओं पर अपनी चिंता व्यक्त की थी। इस लेटर में पीएम मोदी को संबोधित करते हुए कहा गया था कि उन्होंने संसद में ऐसी लिंचिंग की आलोचना कि लेकिन ये पर्याप्त नहीं है। वास्तव में अपराधियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? अफसोस है कि 'जय श्री राम' एक भड़काऊ युद्ध बन गया है। आज ये कानून व्यवस्था के लिए समस्या बन गया है और कई लिंचिंग की घटनाएं इसके नाम पर हो रही हैं।












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