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'फोकट प्रश्न मत पूछो,क्या घंटा होकर आया', इंदौर पानी कांड पर मंत्री विजयवर्गीय का निर्लज्ज जवाब, अब मांगी माफी

kailash vijayvargiya on Indore Water Contamination: देश के सबसे स्वच्छ शहर के तमगे पर इंदौर को लंबे समय से गर्व रहा है, लेकिन नए साल से ठीक पहले यहां सामने आई दूषित पेयजल की घटना ने प्रशासन से लेकर सियासत तक सबको कटघरे में खड़ा कर दिया है।

भागीरथपुरा इलाके में गंदा पानी पीने से अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 212 से ज्यादा लोग अलग-अलग अस्पतालों में इलाजरत हैं। इस गंभीर संकट के बीच मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया, जिसमें वह मीडिया के सवाल पर भड़कते नजर आए।

kailash vijayvargiya on Indore Water Contamination

सवाल पर बिगड़ा मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का मिजाज

31 दिसंबर की रात जब मीडिया ने दूषित पानी से हुई मौतों, इलाज के खर्च और पेयजल व्यवस्था को लेकर सवाल किए, तो शुरुआत में मंत्री विजयवर्गीय संयमित दिखे। लेकिन जैसे ही निजी अस्पतालों के बिल के रिफंड और इलाके में सुरक्षित पानी की उपलब्धता पर सवाल उठा, उनका लहजा अचानक बदल गया। कैमरों के सामने उन्होंने कहा, "फोकट प्रश्न मत पूछो," और इसके बाद आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल भी किया। पत्रकार को उन्होंने कहा कि, ''क्या-क्या घंटा होकर आए हो'' यह पूरा वाकया कैमरे में कैद हो गया और कुछ ही घंटों में वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

भागीरथपुरा, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का ही विधानसभा क्षेत्र

यह मामला इसलिए भी ज्यादा संवेदनशील हो गया क्योंकि भागीरथपुरा क्षेत्र खुद कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र इंदौर-1 में आता है। इस इलाके में डायरिया और उल्टी-दस्त के प्रकोप ने भयावह रूप ले लिया। प्रशासन के मुताबिक, 212 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से करीब 50 लोगों को इलाज के बाद छुट्टी मिल चुकी है, लेकिन कई की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है।

वायरल वीडियो से बढ़ा राजनीतिक तापमान

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान का वीडियो सामने आते ही विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने वीडियो साझा करते हुए कहा कि जहरीला पानी पीने से लोगों की जान जा रही है, लेकिन जिम्मेदारी तय करने के सवाल पर मंत्री पत्रकारों को गालियां दे रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मांग की कि नैतिकता के आधार पर कैलाश विजयवर्गीय से तुरंत इस्तीफा लिया जाए।

माफी और सफाई, बदले सुर

विवाद बढ़ता देख मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बाद में सोशल मीडिया के जरिए सफाई दी और माफी मांगी। उन्होंने कहा कि वह और उनकी टीम पिछले दो दिनों से बिना सोए प्रभावित इलाके में हालात सुधारने में जुटी है। दूषित पानी से लोगों की मौत ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया है।

इसी भावनात्मक स्थिति में मीडिया के एक सवाल पर उनके शब्द गलत निकल गए, जिसके लिए उन्होंने खेद जताया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब तक इलाके के लोग पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ नहीं हो जाते, वह चैन से नहीं बैठेंगे।

लापरवाही मानी, अधिकारियों पर कार्रवाई का दावा

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने यह भी स्वीकार किया कि इस पूरे मामले में प्रशासनिक लापरवाही हुई है। उन्होंने साफ कहा कि जो भी अधिकारी दोषी पाए जाएंगे, चाहे वे कितने ही बड़े पद पर क्यों न हों, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।

मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर नगर निगम के एक जोनल अधिकारी और एक असिस्टेंट इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया गया है, जबकि एक सब-इंजीनियर की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। मामले की जांच के लिए एक आईएएस अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति भी गठित की गई है।

फिलहाल कोई भी मरीज खतरे की स्थिति में नहीं है: कैलाश विजयवर्गीय

मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, "दूषित पानी पीने के बाद करीब 198 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल कोई भी मरीज खतरे की स्थिति में नहीं है। हमारी पूरी प्रतिबद्धता है कि हर जान बचाई जाए और सभी लोगों को बेहतर इलाज मुहैया कराया जाए। अधिकारियों के मुताबिक चार लोगों की मौत हुई है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि नौ लोगों की जान गई है। हम इस पूरे मामले की जांच करेंगे और पीड़ितों को मुआवजा दिया जाएगा।"

दूषित पानी की वजह आई सामने

नगर निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव के मुताबिक, जांच में यह सामने आया है कि मुख्य पानी की सप्लाई पाइपलाइन में एक जगह लीकेज था, जिसके ऊपर शौचालय बना हुआ पाया गया। इसी वजह से पानी दूषित होने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल इलाके में अतिरिक्त एम्बुलेंस, मेडिकल टीमें और स्वास्थ्य कर्मी तैनात किए गए हैं। सरकारी महाराजा यशवंतराव अस्पताल और निजी श्री अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में मरीजों के लिए अलग वार्ड बनाए गए हैं।

इलाज का खर्च सरकार उठाएगी

विजयवर्गीय ने कहा कि निजी अस्पतालों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि प्रभावित मरीजों का पूरा इलाज राज्य सरकार के खर्च पर किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि मरीजों की संख्या में धीरे-धीरे कमी आ रही है, लेकिन स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

इंदौर की यह घटना सिर्फ एक स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और संवेदनशीलता का भी बड़ा इम्तिहान बन गई है। मंत्री का गुस्सा, फिर माफी और कार्रवाई के दावे, इन सबके बीच एक सवाल अब भी कायम है-क्या भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराई जाएगी या यह हादसा व्यवस्था को सचमुच झकझोर कर बदलाव लाएगा।

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