ट्विटर से 'भाजपा हटाने' की खबरों पर सिंधिया ने तोड़ी चुप्पी, लिखा- 'दुख की बात है कि...'

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सामने आकर अपने ट्विटर प्रोफाइल को लेकर चल रही खबरों का सच बताया है...

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की राजनीति में शनिवार को उस वक्त हलचल मच गई, जब मीडिया में खबर चली कि दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने ट्विटर प्रोफाइल से भाजपा हटा लिया है। दरअसल, सिंधिया के ट्विटर प्रोफाइल पर केवल जन सेवक और क्रिकेट प्रेमी लिखा हुआ है। ट्विटर प्रोफाइल से भाजपा हटाने खबरों के साथ ये चर्चाएं भी चलने लगीं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा से नाराज हैं और उन्होंने सरकार में अपने समर्थक विधायकों को मंत्री बनवाने के लिए ऐसा किया है। अब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने खुद इस बात को स्पष्ट कर दिया है कि उन्होंने अपने ट्विटर प्रोफाइस से भाजपा हटाया था या नहीं।

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    'झूठी खबरें, सच्चाई से कहीं ज्यादा तेजी से फैलती हैं'

    'झूठी खबरें, सच्चाई से कहीं ज्यादा तेजी से फैलती हैं'

    अपने प्रोफाइल से 'भाजपा हटाने' की खबरों पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'दुख की बात है कि झूठी खबरें, सच्चाई से कहीं ज्यादा तेजी से फैलती हैं।' इससे पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दो ऐसे ट्वीट भी रीट्वीट किए, जिनमें उनके भाजपा से नाराज होने या ट्विटर प्रोफाइल से भाजपा हटाने की बात का खंडन था। इन ट्वीट में लिखा था कि भाजपा में शामिल होने के बाद से ही ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने ट्विटर प्रोफाइल में केवल जन सेवक और क्रिकेट प्रेमी ही लिख रखा है।

    उपचुनाव के लिए प्रभारियों की सूची भी की रीट्वीट

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    ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ऐसी खबरों को खारिज करने से पहले आज भाजपा की तरफ से मध्य प्रदेश की 24 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए प्रभारियों की सूची को भी रीट्वीट किया। सूची को रीट्वीट करते हुए सिंधिया ने लिखा, 'मध्य प्रदेश की 24 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा नियुक्त किए गए सभी प्रभारियों को मेरी ओर से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। मुझे पूरा विश्वास है कि आप सभी का अनुभव और कार्यकर्ताओं की मेहनत भाजपा उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करेगा।'

    सियासी गलियारों में चलने लगीं ये चर्चाएं

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    इससे पहले कयास लगाए जा रहे थे कि राज्य की शिवराज सरकार में अपने समर्थक विधायकों को ज्यादा से ज्यादा मंत्री पद दिलाने के लिए यह सिंधिया की दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। दरअसल, पिछले दिनों जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केवल 5 विधायकों को ही मंत्रिमंडल में शामिल किया तो उस समय भी सिंधिया समर्थक मंत्रियों को हल्के विभाग दिए जाने को लेकर कांग्रेस ने तंज कसा था। साथ ही सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के समय इस बात की चर्चा थी की उनके किसी समर्थक विधायक को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। अब इन सारे कयासों पर खुद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने विराम लगा दिया है।

    उपचुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल

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    वहीं, शुक्रवार को ही भाजपा को एक बड़ा झटका उस वक्त लगा था, जब पूर्व मंत्री बालेंदु शुक्ला पार्टी से इस्तीफा देकर कांग्रेस में शामिल हो गए। बालेंदु शुक्ला को खुद पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने घर पर पार्टी की सदस्यता दिलाई। बताया जा रहा है कि बालेंदु शुक्ला पिछले काफी समय से भाजपा से नाराज चल रहे थे। इसके बाद सिंधिया के भाजपा में आने से उनकी नाराजगी और बढ़ गई। दरअसल करीब 10 साल पहले बालेंदु शुक्ला ने सिंधिया पर आरोप लगाते हुए कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश के उपचुनाव में कांग्रेस उन्हें ग्वालियर विधानसभा सीट से मैदान में उतार सकती है।

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