NGT चेयरमैन स्वतंत्र कुमार हुए रिटायर, जानिए उनके कुछ फैसले जिसने प्रदूषण फैलाने वालों के अंदर 'खौफ' पैदा कर दिया

नई दिल्‍ली। दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर में प्रदूषण को लेकर कड़े फैसले देने वाले एनजीटी (ग्रीन ट्रिब्यूनल कोर्ट) के चेयरमैन जस्टिस स्‍वतंत्र कुमार मंगलवार को रिटायर हो गए। जस्टिस स्‍वतंत्र कुमार इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के न्‍यायधीश रह चुके थे। साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर होने के बाद उन्हें एनजीटी का चेयरमैन बनाया गया था। स्‍वतंत्र कुमार को उस दौरान जितनी सुर्खियां नहीं मिली थीं उससे ज्‍यादा एनजीटी चेयरमैन रहते मिली। आपको शायद पता नहीं होगा स्‍वतंत्र कुमार के नाम एक दिन में 209 मामलों का निपटारा करने और 56 केस में फैसला सुनाने का रिकॉर्ड है। वैष्णोदेवी श्रद्धालुओं की संख्या एक दिन में 50 हजार तक सिमित करने और अमरनाथ यात्रा के दौरान शांति बनाए रखने के उनके हालिया निर्देशों के कारण उन्हें विभिन्न वर्गों की नाराजगी झेलनी पड़ी थी आइए आपको बताते हैं स्‍वतंत्र कुमार के उन बड़े फैसलों के बारे में जिसे लेकर वो काफी चर्चा में रहे।

स्‍मॉग के चलते दिल्‍ली-एनसीआर में बंद करवाया निर्माण कार्य

स्‍मॉग के चलते दिल्‍ली-एनसीआर में बंद करवाया निर्माण कार्य

आपको दिल्‍ली-एनसीआर की वो तस्‍वीर तो याद ही होगी वायू प्रदूषण को लेकर हाहाकार मचा हुआ था। स्‍मॉग ने दिल्‍ली-एनसीआर को परेशान कर रखा था। हालात तो यहां तक पहुंच गए थे कि दिल्‍ली में भारत-श्रीलंका टेस्‍ट मैच के दौरान श्रीलंका के खिलाडि़यों को मास्‍क पहनना पड़ा था। हालांकि ये उनका हार को छिपाने का एक स्‍टंट मात्र था। लेकिन इन हालातों के मद्देनजर जस्टिस स्‍वतंत्र कुमार ने दिल्‍ली-एनसीआर में निर्माण कार्यों, औद्योगिक गतिविधियों और ट्रकों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी थी। साथ ही पड़ोसी राज्यों उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और हरियाणा को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि किसी भी सूरत में पराली यानी खेतों में धान की फसल के अवशेष न जलाए जाएं। उसने दिल्ली सरकार व स्थानीय निकायों को आड़े हाथों भी लिया था। जस्टिस स्‍वतंत्र कुमार की पीठ ने यह भी फैसला लिया था कि निर्माण स्थलों पर कार्य बंद होने के बावजूद भी कार्यरत मजदूरों की दिहाड़ी देय होगी।

10 साल से ज्यादा की डीजल और पेट्रोल गाड़ियों पर प्रतिबंध

10 साल से ज्यादा की डीजल और पेट्रोल गाड़ियों पर प्रतिबंध

न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार को राष्ट्रीय हरित अधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद एनजीटी तब सबसे पहले चर्चा में आई जब उसने दिल्‍ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्‍ली एनसीआर में दस साल से ज्यादा की डीजल और 10 साल से ज्यादा की पेट्रोल गाड़ियों के परिवहन पर प्रतिबंध लगा दिया। इस फैसले को लेकर केंद्र सरकार ने भी राहत की अपील की लेकिन ट्रिब्यूनल ने किसी की नहीं सुनी।

आर्ट ऑफ लीविंग पर 5 करोड़ का जुर्माना

आर्ट ऑफ लीविंग पर 5 करोड़ का जुर्माना

न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता में आर्ट ऑफ लिविंग पर पांच करोड़ का जुर्माना लगाया गया था। ट्रिब्यूनल ने ये जुर्माना आर्ट ऑफ लिविंग की ओर से दिल्‍ली में यमुना किनारे हुए आयोजन के बाद प्रदूषण फैलाने के आरोप में लगाया। इस मामले में आर्ट ऑफ लिविंग हाईकोर्ट भी पहुंचा लेकिन उसे वहां से भी राहत नहीं मिली। ये मुद्दा इसलिए भी बड़ा था क्योंकि जिस कार्यक्रम के कारण एनजीटी ने ये कदम उठाया, उसमें प्रधानमंत्री मोदी, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी समेत तमाम बड़ी हस्तियों ने भी शिरकत की थी।

दिल्‍ली के 4 रेलवे स्‍टेशनों पर जुर्माना

दिल्‍ली के 4 रेलवे स्‍टेशनों पर जुर्माना

कचरा प्रबंधन में असफल रहने पर एनजीटी ने दिल्‍ली के चार रेलवे स्टेशनों आनंद विहार, विवेक विहार, शाहदरा और शकूरबस्ती रेलवे स्टेशन पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया था। जुर्माने की ये रकम बेशक छोटी हो लेकिन सरकारी संस्‍थाओं के खिलाफ ये कड़ी कार्रवाई का संकेत जरूर है। इसके अलावा जस्टिस स्‍वतंत्र कुमार की अध्‍यक्षता में गंगा किनारे को नो डेवलेपमेंट जोन घोषित किया गया। एनजीटी ने स्‍वतंत्र कुमार की अध्यक्षता में ही गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए यह कड़ा फैसला सुनाया जिसमें गंगा के 100 मीटर के हिस्से को नो डेवलपमेंट जोन घोषित किया गया। इसके अलावा गंगा किनारे से 5 सौ मीटर की दूरी में कूडा निस्तारण पर भी रोक लगाते हुए 50 हजार के दंड का प्रावधान किया गया था।

मैली से निर्मल यमुना पुनर्जीवन प्रोजेक्ट

मैली से निर्मल यमुना पुनर्जीवन प्रोजेक्ट

यमुना नदी की सफाई के लिए एनजीटी ने ‘मैली से निर्मल यमुना पुनर्जीवन प्रोजेक्ट, 2017' के तहत 28 निर्देश जारी किए। साथ ही उसने यमुना में शौच करने और कूड़ा डालने पर 5000 और निर्माण सामग्री फेंकने पर 50000 रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया। जस्टिस स्वतंत्र कुमार की बेंच ने नदी के दायरे में आने वाले मैदानी क्षेत्र में किसी तरह का निर्माण कार्य करने से भी रोक लगा दी थी।

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