Justice N Anand Venkatesh: क्यों भ्रष्टाचार से पीड़ित देश को आज ऐसे और भी जजों की जरूरत है?
मद्रास हाई कोर्ट के जज जस्टिस आनंद वेंकटेश इन दिनों खास वजह से चर्चा में हैं। उनके फैसले भ्रष्ट नेताओं की नींदें हराम कर रहे हैं। लेकिन, देश की जनता को उनके फैसलों पर गर्व होना चाहिए। दरअसल, उन्होंने नेताओं के खिलाफ ऐसे मामले खोलने शुरू किए हैं, जो कभी संदिग्ध वजहों से आए-गए कर दिए गए थे।
खेलों और खासकर क्रिकेट में गहरी रुचि रखने वाले जस्टिस आनंद की ओर से भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ उठाए गए कदमों ने आम जनता के सामने नजीर पेश किया है। संगीत और किताबों के प्रेमी जस्टिस वेंकटेश ने तमिलनाडु में हाल के दिनों में कुछ ऐसे मामलों पर स्वत: संज्ञान लिए हैं, जिसके बारे में शायद कभी किसी ने सोचा भी नहीं था।

भ्रष्टचार के बंद केस को फिर से खोलने शुरू किए
मद्रास हाई कोर्ट के जज जस्टिस आनंद वेंकटेशन तमिलनाडु में एमपी और एमएलए के खिलाफ विभिन्न अदालतों में चलने वाले मुकदमो के पोर्टफोलियो जज हैं। उन्होंने ऐसे मामलों को दोबारा खोलने का फैसला किया है, जो काफी पहले ही शुरू होने चाहिए थे। जस्टिस वेंकटेश ने अगस्त महीने में प्रदेश के चार बड़े नेताओं को भ्रष्टाचार के मामलों में बरी किए जाने या आरोप मुक्त किए जाने के फैसलों की समीक्षा के लिए स्वत: संज्ञान लिया है।
डीएमके के तीन मौजूदा मंत्री और एआईएडीएमके के एक पूर्व सीएम का केस खोला
इनमें सत्ताधारी डीएमके के तीन मौजूदा मंत्री और एक एआईएडीएम के पूर्व मुख्यमंत्री शामिल हैं। देश में अबतक किसने सोचा था कि नेताओं पर लगे भ्रष्टाचार के मामले एक बार अदालत से बंद हो जाए तो वह फिर से खुल भी सकता है। यहां तो भ्रष्टाचार के केस में दशकों की सजा पाए नेता भी अदालतों के रास्ते से ही जेल की जगह राजनीतिक मंचों पर सरकार बनाने और गिराने की प्लानिंग करते नजर आते हैं। नेताओं के ऐसे भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता के लिए जस्टिस वेंकटेश एक उम्मीद की किरण बनकर आए हैं।
कैसे निचले स्तर पर चलता रहा है खेल?
दरअसल, निचली अदालतों और प्रशासनिक दखल से जिस तरह से निचले स्तर पर ऐसे मामलों को रफा-दफा करने की एक प्रवृत्ति बन चुकी है, उसे जस्टिस वेंकटेश के फैसलों ने उजागर कर दिया है। उन्होंने हर मामले में केस की दिशा बदलने के लिए अपनाए गए तरीकों पर विस्तार से बात की है। उन्होंने ऐसे मामलों के 'ट्रांसफर', जांच को 'झटपट' पूरा करने और निचली अदालतों से जांच रिपोर्ट को 'आंख मूंदकर' स्वीकार करने की ओर इशारा किया है।
भ्रष्टाचार-विरोधी एजेंसी डीवीएमसी को बताया 'साजिश का केंद्र'
मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु की भ्रष्टाचार-विरोधी एजेंसी डीवीएमसी की ओर भी उंगली उठाई है और इसे 'साजिश का केंद्र' बताया है। अदालत के मुताबिक जब, जिसकी सरकार होती है, ये एजेंसी उसी की भाषा बोलने लगती है, कठपुतली बन जाती है।
राजनीतिक दलों में मची खलबली
तमिलनाडु की सत्ताधारी डीएमके में उसके शिक्षा, राजस्व और वित्त मंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार के मुकदमे खुलने से खलबली मचनी स्वाभाविक है। उन्होंने एआईएडीएमके के पूर्व सीएम ओ पन्नीरसेल्वम के खिलाफ भी मुकदमे की समीक्षा का फैसला किया है। 2012 के इस मामले में उन्हें आय से अधिक सपत्ति के केस में बरी कर दिया गया था।
'मेरे पास करने के लिए और भी बेहतर काम हैं'
उनके फैसलों से सत्ताधारी डीएमके तो बहुत ही ज्यादा तिलमिलाई हुई है। लेकिन, जस्टिस वेंकटेशन ने पार्टी के संगठन सचिव आरएस भारती के खिलाफ उनकी आलोचना के लिए अवमानना की कार्रवाई से मना कर दिया है। जस्टिस वेंकटेश ने सिर्फ यही कहा है कि 'मेरे पास करने के लिए और भी बेहतर काम हैं।' अब डीएमके इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाना चाहती है।
जज स्वर्ग से नहीं आते हैं-पूर्व सीजेआई
38 साल पहले पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया वाईवी चंद्रचूड़ ने कहा था, 'आज न्यायिक शुचिता में गिरावट की कानाफूसी सुनाई देती है....।' आज यह कानाफूसी तेज हो चुकी है। जैसे लगता है कि भ्रष्टाचार के प्रति एक सहिष्णुता की स्थिति बन चुकी है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने किसी वजह से ऐसी ही बातों की ओर इशारा किया है। शायद इन्हीं हालातों में 2021 में पूर्व सीजेआई और अभी के राज्यसभा सांसद रंजन गोगोई ने कहा था कि 'जज स्वर्ग से नहीं आते हैं।' इसलिए देश को आज ऐसे जजों की बहुत ज्यादा आवश्यकता है।












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