Waqf Amendment Bill 2024: जेपीसी की पहली बैठक आज, तमाम विवादित मुद्दों पर होगी चर्चा
संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) आज वक्फ संशोधन विधेयक 2024 पर चर्चा के लिए अपनी पहली बैठक करेगी। दिल्ली के संसद भवन एनेक्सी में सुबह 11 बजे होने वाली इस बैठक की अध्यक्षता भाजपा सांसद जगदंबिका पाल करेंगे। समिति का लक्ष्य अगले संसद सत्र के पहले सप्ताह के अंत तक विधेयक की समीक्षा करना और अपने निष्कर्ष प्रस्तुत करना है।
केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा 8 अगस्त को लोकसभा में पेश किए गए वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। हंगामे के कारण इसे जेपीसी के पास भेज दिया गया, जिसमें संसद के दोनों सदनों के सदस्य शामिल हैं। जेपीसी में लोकसभा से 21 सांसद और राज्यसभा से 10 सांसद हैं।

विपक्ष का विरोध
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने इस विधेयक को मुस्लिम विरोधी और संविधान पर हमला बताया। इंडिया अलायंस के कई दलों ने संसद में भी इसका विरोध किया। जवाब में अल्पसंख्यक मंत्री किरेन रिजिजू ने आश्वासन दिया कि यह विधेयक किसी की धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं करेगा और इसका उद्देश्य पिछले कानून द्वारा अनसुलझे मुद्दों को संबोधित करना है।
जेपीसी में लोकसभा के सदस्य
जेपीसी में लोकसभा से निशिकांत दुबे, तेजस्वी सूर्या, अपराजिता सारंगी, संजय जयसवाल, दिलीप सैकिया, अभिजीत गंगोपाध्याय, डीके अरुणा, गौरव गोगोई, इमरान मसूद, मोहम्मद जावेद, मौलाना मोहिबुल्लाह, कल्याण बनर्जी, ए राजा, लावु श्री कृष्ण देवरायलु, दिलेश्वर कामेत, अरविंद सावंत, एम सुरेश गोपीनाथ, नरेश गणपत म्हस्के, अरुण भारती और असदुद्दीन ओवैसी शामिल हैं।
जेपीसी में राज्यसभा के सदस्य
वहीं राज्यसभा से बृज लाल, मेधा विश्राम कुलकर्णी, गुलाम अली, राधा मोहन दास अग्रवाल, सैयद नसीर हुसैन, मोहम्मद नदीमुल हक, वी विजयसाई रेड्डी, एम मोहम्मद अब्दुल्ला, संजय सिंह और डी वीरेंद्र हेगड़े शामिल हैं। ये सदस्य आज की बैठक के दौरान विधेयक के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श करेंगे।
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के प्रतिनिधि वक्फ संशोधन विधेयक 2024 में प्रस्तावित संशोधनों पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। इन संशोधनों से संबंधित कानूनी पहलुओं पर भी उपस्थित विधि मंत्रालय के अधिकारियों के साथ चर्चा की जाएगी।
आज की बैठक में विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए सभी विवादास्पद मुद्दों पर विचार किया जाएगा। इसमें संवैधानिक प्रावधानों के संभावित उल्लंघन की चिंताएं भी शामिल हैं। उत्तर प्रदेश के डुमरियागंज से भाजपा सांसद जगदम्बिका पाल आज की चर्चा का नेतृत्व करेंगे। समिति की रिपोर्ट से उम्मीद है कि विधेयक के निहितार्थों का व्यापक विश्लेषण होगा और आवश्यक बदलावों का सुझाव दिया जाएगा।
वक्फ अधिनियम 1995 की आलोचना इस बात के लिए की गई है कि यह अपने निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाया। अल्पसंख्यक मंत्री किरेन रिजिजू के अनुसार "यह संशोधन उन कार्यों को पूरा करने के लिए लाया गया है जो कांग्रेस सरकार नहीं कर पाई।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस प्रक्रिया में किसी भी संवैधानिक अनुच्छेद का उल्लंघन नहीं किया गया है।












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