जेपी नड्डा: लो प्रोफाइल नेता की वो खूबियां जिसने पार्टी में पहुंचाया बुलंदी तक

नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के भरोसेमंद जगत प्रकाश नड्डा पर पार्टी ने जो भरोसा दिखाया है, उसके पीछे पार्टी के लिए किया गया उनका योगदान है। लोकसभा चुनावों के बाद अमित शाह को सरकार में बड़ी भूमिका मिल जाने की वजह से करीब सात महीने पहले नड्डा जब बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष बने, तभी साफ था कि संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ और बिना विवादों में रहे शांति से काम करते रहने की वजह से उनका अगला भाजपा अध्यक्ष बनना तय है। पीएम मोदी ने पांच वर्ष तक केंद्र में स्वास्थ्य मंत्रालय का जिम्मा देने के बाद जब उन्हें संगठन में भेजा तो जाहिर था कि नड्डा के लिए उनके मन में एक बहुत बड़ी सोच थी। दरअसल, मोदी भी संगठन के आदमी रहे हैं और नड्डा भी उसी के दम पर पार्टी में अपनी एक विशेष पहचान बनाए हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर उनमें ऐसी क्या खूबियां रही हैं, जिसकी वजह से आज वह सत्ताधारी दल के शिखर तक पहुंचे हैं।

एक दशक से राष्ट्रीय राजनीति में प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं

एक दशक से राष्ट्रीय राजनीति में प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से पहले भी जेपी नड्डा का भारतीय जनता पार्टी में कद कितना हाई प्रोफाइल था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तभी से बेहद करीबी नेताओं में शामिल रहे हैं, जब 1990 के दशक में मोदी भी पार्टी महासचिव हुआ करते थे। उस समय नड्डा पार्टी की युवा मोर्चा का जिम्मा संभाल रहे थे। लेकिन, इसके बावजूद नड्डा की लो प्रोफाइल रहने की उनकी खूबी ने ही उनकी पहचान संगठन के नेता की बनाई, जिसकी बदौलत आज वह दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी होने का दावा करने वाली और लगातार दो लोकसभा चुनावों में अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल कर सरकार बनाने वाली बीजेपी के अध्यक्ष चुने गए हैं। 2010 में बीजेपी अध्यक्ष के तौर पर नितिन गडकरी ने पहली बार उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया था और तभी से वह राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के अंदर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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    नड्डा की सबसे बड़ी खूबी- सहज उपलब्धता

    नड्डा की सबसे बड़ी खूबी- सहज उपलब्धता

    बीजेपी के किसी साधारण कार्यकर्ता से भी बात कर लीजिए, वह जेपी नड्डा की सबसे बड़ी खूबी यही बतलाएगा कि हाई प्रोफाइल होकर भी लो प्रोफाइल बने रहना ही उनकी सबसे बड़ी खासियत है। भले ही उनकी छवि किसी करिश्माई नेता की न हो, लेकिन बड़बोले बयानों से दूर रहकर उन्होंने संगठन पर इतनी मजबूत पकड़ बनाई है कि वह पार्टी कैडर में संगठन के आदमी के तौर ही जाने जाते हैं। हर आम कार्यकर्ता से मिलना-जुलना और एक बार मिलकर उन्हें हमेशा याद रखना उनकी बहुत बड़ी विशेषता है। पार्टी कार्यकर्ता और उनसे मिलने वाले आम लोग भी उनसे इसलिए खुश रहते हैं कि वह सबसे सामान्य बातें करते हैं और सहजता से मिल लेते हैं। होली हो या दिवाली नड्डा सबके लिए सहज उपलब्ध हैं और उनकी यह आदत तब भी नहीं बदली थी, जब प्रधानमंत्री ने अपने पहले कार्यकाल में उन्हें स्वास्थ्य मंत्री बनाया था। कार्यकर्ता हो या आम जनता नड्डा के पास जो भी गया उन्होंने उसकी पूरी सहायता की। यही वजह है कि आज बीजेपी के संगठन में उनकी पैठ बहुत गहरी है और पार्टी कार्यकर्ता उनकी बातों पर काफी भरोसा करता है।

    2019 लोकसभा चुनाव में यूपी में निभाई सबसे महत्वपूर्ण भूमिका

    2019 लोकसभा चुनाव में यूपी में निभाई सबसे महत्वपूर्ण भूमिका

    2014 के लोकसभा चुनाव में यूपी में पार्टी को जिताने का जिम्मा अमित शाह के कंधों पर था। लेकिन, 2019 के चुनाव में राष्ट्रीय अध्यक्ष होने की वजह से उनकी व्यस्तता देशभर में थी। इसलिए इस चुनाव में यूपी में पार्टी को सफलता दिलाने की पूरी जिम्मेदारी जेपी नड्डा पर आ गई थी। वह राजनीतिक तौर पर सबसे प्रमुख प्रदेश में पार्टी चुनाव अभियान के इंचार्ज बनाए गए थे। इस चुनाव में उनके सामने समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन की बहुत बड़ी चुनौती थी। लेकिन, इसके बावजूद बीजेपी यहां की 80 में से 62 सीटों पर अकेले जीतने में कामयाब हो गई। जाहिर है कि नड्डा की संगठन क्षमता को देखकर ही प्रधानमंत्री मोदी और तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने उन पर यूपी जैसे राज्य के लिए भरोसा किया था, जिसमें उन्होंने सफल होकर दिखाया। नड्डा का पार्टी में कद तब भी बहुत बड़ा था और वह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री रहने के अलावा बीजेपी की सबसे बड़ी निर्णय लेने वाली संस्था पार्लियामेंट्री बोर्ड के भी सदस्य थे।

    नड्डा का राजनीतिक करियर

    नड्डा का राजनीतिक करियर

    जेपी नड्डा ने राजनीति की शुरुआत भाजपा से पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य के तौर पर की थी। 1975 में इमरजेंसी के खिलाफ आंदोलन में वे 45 दिनों तक हिरासत में भी रहे। आगे चलकर वे सक्रिय राजनीति में आ गए और 1993 में तब सार्वजनिक जीवन में कदम रखा जब वे पहली बार हिमाचल प्रदेश में विधायक चुने गए। वह 1993,1998 और 2007 में हिमाचल प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे। हिमाचल सरकार में भी उन्होंने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, संसदीय कार्य, वन, पर्यावरण, विज्ञान और तकनीक जैसे विभागों की जिम्मेदारी संभाली थी। राष्ट्रीय राजनीति में 2010 में उतरने के बाद वे पहली बार अप्रैल, 2012 राज्यसभा के सदस्य चुने गए। बाद में जब 2014 में मोदी सरकार बनी तो प्रधानमंत्री ने उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय जैसा अहम मंत्रालय सौंपा।

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