'कोई भी देवता ब्राह्मण नहीं, भगवान शिव भी एससी या एसटी हैं', JNU वीसी के बयान पर उठा विवाद

जेएनयू वीसी ने यह भी कहा कि मनुस्मृति ने सभी महिलाओं को शूद्र की श्रेणी में बांट दिया है।

नई दिल्ली, 23 अगस्त: दिल्ली स्थित जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) की वाइस चांसलर (वीसी) शांतिश्री धूलिपुडी पंडित के एक बयान को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया है। जेएनयू परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम में वीसी शांतिश्री धूलिपुडी पंडित ने कहा कि अगर मानव विज्ञान के नजरिए से देखें तो कोई भी हिंदू देवी-देवता ऊंची जाति से नहीं है। दरअसल, केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की तरफ से सोमवार को जेएनयू में डॉ. बी आर अंबेडकर व्याख्यान कार्यक्रम रखा गया था, जहां शांतिश्री धूलिपुडी पंडित ने ये बातें कहीं।

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    JNU VC Shantishree Dhulipudi का दावा, 'कोई भी भगवान ब्राह्मण नहीं' | वनइंडिया हिंदी |*News
    'श्मशान में सांप के साथ रहते हैं शिव'

    'श्मशान में सांप के साथ रहते हैं शिव'

    इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, इस कार्यक्रम में 'लैंगिक न्याय पर डॉ बीआर अंबेडकर के विचार: समान नागरिक संहिता' विषय रखा गया था, जिसपर बोलते हुए शांतिश्री धूलिपुडी पंडित ने कहा, 'कृपया मानव शास्त्र और विज्ञान के नजरिए से हमारे देवताओं की उत्पत्ति पर गौर कीजिए। हमारा कोई भी भगवान ब्राह्मण नहीं है। सबसे ऊंचे क्षत्रीय हैं। भगवान शिव को भी अगर देखें तो वो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से होने चाहिए। इसकी वजह है, क्योंकि वो श्मशान में एक सांप के साथ रहते हैं, उन्होंने कपड़े भी बहुत कम पहने हुए हैं।'

    'इसमें लक्ष्मी, शक्ति और सभी देवी-देवता भी शामिल'

    'इसमें लक्ष्मी, शक्ति और सभी देवी-देवता भी शामिल'

    शांतिश्री धूलिपुडी पंडित ने आगे कहा, 'मुझे बिल्कुल नहीं लगता कि कोई ब्राह्मण श्मशान में इस तरह बैठ सकता है। तो अगर आप गहराई से और मानव-शास्त्र के आधार पर देखें, तो पूरी तरह स्पष्ट है कि हिंदू देवी-देवता ऊंची जाति से नहीं आते हैं। इसमें लक्ष्मी, शक्ति और सभी देवी-देवता भी शामिल हैं। वहीं, आप अगर भगवान जगन्नाथ को देखें, तो वो भी आदिवासी हैं। तो, फिर हम अब तक इस भेदभाव को क्यों जारी रखे हुए हैं, जो बहुत ही अमानवीय है।'

    'कोई महिला दावा नहीं कर सकती कि वो ब्राह्मण है'

    'कोई महिला दावा नहीं कर सकती कि वो ब्राह्मण है'

    इसके अलावा जेएनयू वीसी ने यह भी कहा कि मनुस्मृति ने सभी महिलाओं को शूद्र की श्रेणी में बांट दिया है। शांतिश्री धूलिपुडी पंडित ने कहा, 'मनुस्मृति के आधार पर देखें तो सभी महिलाएं शूद्र हैं। इसलिए, कोई भी महिला यह दावा नहीं कर सकती कि वो ब्राह्मण है या कुछ और है। मेरा मानना है कि केवल शादी के जरिए ही आपको पति या पिता की जाति मिलती है।'

    'जाति, जन्म के आधार पर ही तय होती है'

    'जाति, जन्म के आधार पर ही तय होती है'

    अपने भाषण में राजस्थान में 9 साल के दलित बच्चे की मौत के मामले का जिक्र करते हुए शांतिश्री धूलिपुडी पंडित ने कहा, 'ये दुर्भाग्य ही है कि बहुत सारे लोग हैं, जो मानते हैं कि जाति, जन्म के आधार पर तय नहीं होती, लेकिन आज ऐसा नहीं है, और जाति, जन्म के आधार पर ही तय होती है। अगर कोई ब्राह्मण या दूसरी जाति का व्यक्ति मोची का काम करे, तो क्या वो दलित माना जाएगा?'

    'यहां सवाल मानव अधिकारों का है'

    'यहां सवाल मानव अधिकारों का है'

    शांतिश्री धूलिपुडी पंडित ने कहा, 'नहीं, उसे दलित नहीं माना जाएगा। मैं ऐसा इसलिए कह रही हूं, क्योंकि हाल ही में राजस्थान में एक दलित लड़के को इस वजह से पीट-पीटकर मार डाला गया, क्योंकि उसने एक ऐसे पानी को छू लिया, पिया नहीं केवल छू लिया, जो ऊंची जाति के शख्स का था। कृपया इस बात को समझिए कि यहां सवाल मानव अधिकारों का है। हम अपने ही साथ के एक इंसान के साथ ऐसा व्यवहार कैसे कर सकते हैं।'

    'जाति का विनाश बहुत ज्यादा जरूरी है'

    'जाति का विनाश बहुत ज्यादा जरूरी है'

    डॉ. अंबेडकर की ऐतिहासिक किताब 'जाति का विनाश' का जिक्र करते हुए जेएनयू वीसी ने कहा, 'हमारा समाज अगर वाकई एक अच्छा भारत बनाना चाहता है तो जाति का विनाश बहुत ज्यादा जरूरी है। मुझे समझ नहीं आता कि जो पहचान हमें आपस में बांट रही है, हम उसे लेकर इतने भावुक क्यों हैं। और यही नहीं, हम इस तथाकथित बनावटी पहचान के लिए किसी की जान लेने तक को तैयार हैं।'

    'बौद्ध धर्म दुनिया के सबसे महान धर्मों में से एक'

    'बौद्ध धर्म दुनिया के सबसे महान धर्मों में से एक'

    शांतिश्री धूलिपुडी पंडित ने आगे कहा, 'अगर आप एक महिला हैं और आरक्षित वर्ग से आती हैं तो फिर आप दो तरह से हाशिए पर हैं। पहला- क्योंकि आप एक महिला हैं और दूसरा, क्योंकि आप एक ऐसी तथाकथित जाति से आती हैं, जो हर तरह की रूढिवादिताओं में घिरी है। मेरा मानना है कि बौद्ध धर्म दुनिया के सबसे महान धर्मों में से एक है। इसकी वजह है, क्योंकि यह इस बात को सिद्ध करता है कि भारतीय सभ्यता असहमति, विविधता और अंतर को स्वीकार करती है।'

    कौन हैं शांतिश्री धूलिपुडी पंडित

    कौन हैं शांतिश्री धूलिपुडी पंडित

    जेएनयू की वीसी शांतिश्री धूलिपुडी पंडित इससे पहले सावित्री फुले पुणे यूनिवर्सिटी में राजनीति और लोक प्रशासन विभाग की प्रोफेसर रह चुकी हैं। तेलुगु, तमिल, मराठी, हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी भाषा का ज्ञान रखने वालीं शांतिश्री धूलिपुडी पंडित जेएनयू की पहली महिला वीसी हैं और उन्हें इसी साल फरवरी में पांच साल के लिए इस पद पर नियुक्त किया गया था।

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