जम्मू कश्मीर में सेना के खिलाफ हत्या, हत्या की कोशिश के मामले में FIR दर्ज
नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर में जिस तरह से सेना की गाड़ी पर गुस्सायी भीड़ ने पत्थरबाजी की उसके बाद आत्मरक्षा में सेना की फायरिंग में दो पत्थरबाजों की मौत हो गई थी। जम्मू कश्मीर पुलिस ने सेना के खिलाफ इस मामले में एफआईआर दर्ज कर दी है। पुलिस ने यह एफआईआर सेना की 10वीं गढ़वाल यूनिट के खिलाफ दर्ज की है, एफआईआर में सेना के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। यह घटना दक्षिण कश्मीर के शोपिया जिले में शनिवार को हुई थी।

गढ़वाल यूनिट के खिलाफ एफआईआर
सेना की गोलीबारी में जावीद भट और सुहैल लोन की मौत हो गई थी, साथ ही एक व्यक्ति भी इसमें घायल हो गया था, जोकि श्रीनगर के शेर ए कश्मीर इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। सेना के खिलाफ एफआईआर की पुलिस अधिकारी ने पुष्टि करते हुए कहा कि 26 जनवरी को शोपिया पुलिस स्टेशन में 10वीं गढ़वाल यूनिट के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। सेना के खिलाफ धारा 302, 307 व 336 के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं इस पूरी घटना के बारे में सेना का कहना है कि सेना ने आत्मरक्षा में गोली चलाई थी, क्योंकि बटालियन को चारो तरफ से घेरकर पत्थरबाजी शुरू कर दी गई थी, लोगों ने जवानों ने उनके हथियार भी छीनने की कोशिश की ।

पोस्टर को लेकर विवाद
स्थानीय अखबार के अनुसार कुछ लोगों ने बताया कि सेना जिस वक्त मिलिटेंट का पोस्टर हटा रही थी उस वक्त लोगों की जवानों से झड़प हो गई, जिसके बाद सेना ने गोली चला दी। फिरदौस अहमद जिसकी 24 जनवरी को गनोपोरा में एनकाउंटर में मौत हो गई थी। वहीं इस पूरी घटना के बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं सरकार की उन कोशिशों को झटका दे सकती हैं जिसमे लोगों से बातचीत करने के लिए केंद्र की ओर से प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है

मिलिटेंट को मुख्यधारा में लाने की कोशिश
गौरतलब है कि हाल ही में केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर में सभी पक्षो से बात करने के लिए विशेष प्रतिनिधि दिनेश्वर शर्मा को नियुक्त किया है, ताकि घाटी में शांति आ सके। राज्य की पुलिस ने भी इस बात को दोहराया है कि वह स्थानीय मिलिटेंट को मुख्य धारा में लाने की पूरी कोशिश कर रही है और उन्हें सरेंडर करने के लिए कह रही है। पुलिस ने यहां तक कहा था कि उन्हें सरेंडर करने के लिए पुलिस स्टेशन भी आने की जरूरत नहीं है वह बस अपने परिवार के पास वापस लौट जाए, उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।

20 दिन के भीतर दें रिपोर्ट
इससे पहले रविवार को अलगाववादियों ने घाटी में बंद का ऐलान किया था, जिसके चलते सड़क, ट्रेन, सहित तमाम यातायात के साधन बंद कर दिए गए थे, दुकानें बंद थी। यही नहीं श्रीनगर के कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया था, साथ ही कई जगहों पर इंटरनेट की स्पीड को कम कर दिया गया था, जिससे कि हालात बिगड़ने नहीं पाए। सेना की गोलीबारी में मारे गए लोगों के मामले की जांच शोपिया के डेप्युटी कमिश्नर को दी गई है और उन्हे इसकी रिपोर्ट 20 दिन के भीतर देने को कहा गया है।












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