J&K DDC elections:कैसे श्रीनगर में फारूक अब्दुल्ला-महबूबा मुफ्ती से भी बड़ी ताकत बन गई BJP ?
नई दिल्ली- जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में आर्टिकल 370 (Article 370) के खात्मे के बाद हुए पहले चुनाव में 7 दलों के गुपकार गठबंधन (Gupkar Alliance) को सबसे ज्यादा सीटें मिली हैं। वह 280 में से 112 सीटें जीत चुकी है। अनुमानों के मुताबिक ही कश्मीर घाटी में उसने ज्यादा अच्छा प्रदर्शन किया है। लेकिन, चौंकाने वाली खबर ये नहीं है। सबसे बड़ी बात ये है कि पहली बार भारतीय जनता पार्टी(BJP) जम्मू-कश्मीर में सबसे बड़ी पार्टी (Single Largest Party) बन गई है। यही नहीं उसने पहली बार कश्मीर घाटी (Kashmir Vally)की तीन सीटों पर जीतकर भगवा तो लहराया ही है, ये पार्टी राजधानी श्रीनगर (Srinagar) में नेशनल कांफ्रेंस (National Confrene) के फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) और पीडीपी (PDP) की महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti)के अगुवाई वाले पीपुल्स एलायंस फॉर गुपकार डिक्लरेशन (PAGD)के सात दलों के गुपकार गठबंधन पर भी भारी साबित हुई है।

पहली बार जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी पार्टी बनी
जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir)में आर्टिकल 370 हटने के बाद यह पहला बड़ा चुनाव है। इससे पहले साल 2014 में विधानसभा का चुनाव हुआ था। तब फारूक अब्दुल्ला की नेशनल कांफ्रेंस (National Confrene)और महबूबा मुफ्ती की पीडीपी (PDP)अलग-अलग थी। बाकी दलों का भी बड़ा गठबंधन नहीं था। फिर भी तब बीजेपी (BJP) दूसरे नंबर पर रही थी। वह जम्मू में धमाकेदार प्रदर्शन के बावजूद कुल सीटों के मामले में पीडीपी से तीन सीटों से पिछड़ गई थी। लेकिन, अबकी बार सात दलों के गुपकार गठबंधन (Gupkar Alliance)का मुकाबला करके भी वह 75 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी (Single Largest Party)बनी है। इस बात में दो राय नहीं है कि बीजेपी को अधिकतर सीटें (72) अभी भी जम्मू डिविजन में ही मिली हैं, लेकिन घाटी में एंट्री और श्रीनगर (Srinagar) में उसके प्रत्यक्ष या परोक्ष प्रदर्शन के मायने और भी बड़े माने जा सकते हैं। जबकि, जो पीडीपी पिछले विधानसभा चुनाव में पूरे जम्मू-कश्मीर में (लद्दाख समेत) 28 सीटें जीती थी, वह बगैर लद्दाख के हुए इस स्थानीय निकाय के चुनाव में भी उतनी सीटें नहीं जीत पाई है।
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'अपनी पार्टी' की जीत के पीछे भाजपा!
इस चुनाव परिणाम से बीजेपी बहुत ज्यादा उत्साहित सिर्फ इस बात से नहीं है कि उसने घाटी में भी जीत दर्ज की और प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। बल्कि, बड़ी संख्या में निर्दलीय (Independent) उम्मीदवारों की जीत और अपनी पार्टी (Apni Party) की कामयाबी को भी उसकी एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। मसलन, अपनी पार्टी को किंग्स पार्टी (Kings Party) कहकर सिर्फ इसलिए बुलाया जाता है, क्योंकि कथित रूप से उसके पीछे भाजपा का ही समर्थन है। अधिकतर निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए भी ऐसी ही जानकारी सामने आ रही है। अभी तक के परिणाम के मुताबिक अपनी पार्टी (Apni Party)12 सीटें जीत गई हैं। वहीं, 49 निर्दलीय(Independent) भी जीते हैं। कई काउंसिल में उन्हें ही तय करना है कि गवर्निंग काउंसिल कैसी होगी। निर्दलीयों की जीत भाजपा की परोक्ष जीत इसलिए भी मानी जा रही है, क्योंकि ये वो लोग हैं, जो गुपकार गठबंधन से अलग अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरे हैं और उनमें से कई को भाजपा ने भी पीछे से सक्रिय सहयोग दिया है।

श्रीनगर में भाजपा की ताकत सबपर भारी!
गुपकार गठबंधन के नेता भाजपा से ज्यादा सीटें जीतने पर भले ही अपनी पीठें थपथपा रहे हों, लेकिन उन्हें जरा श्रीनगर(Srinagar)के चुनाव क्षेत्रों के नतीजों पर भी गौर करनी चाहिए। यहां की 14 सीटों में से 7 सीटें निर्दलीयों के खातों में गई हैं। घाटी में यही इलाका है, जहां भाजपा बीते कुछ समय में अपना बहुत अधिक प्रभाव कायम कर पाई है। यहां की तीन सीटें अपनी पार्टी (Apni Party)जीती है, जिसे भाजपा की 'प्रॉक्सी' पार्टी कहा जा रहा है। बाकी एक-एक सीटें पीडीपी,एनसी, बीजेपी और जम्मू कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट को मिली हैं। यानि सिर्फ बीजेपी (BJP) और अपनी पार्टी (Apni Party) को ही जोड़ें तो इनका आंकड़ा गुपकार गठबंधन पर भारी पड़ेगा और सात में से अगर कुछ भी निर्दलीय बीजेपी के समर्थन से जीते हैं तो उसकी ताकत और ज्यादा बढ़ी हुई मानी जा सकती है।

केंद्र को भी मिली ताकत
इस चुनाव से न सिर्फ केंद्र में सत्ताधारी भाजपा के हौसले बुलंद हुए हैं, बल्कि आर्टिकल 370 हटाने के केंद्र सरकार के फैसले की भी तस्दीक हुई है, ऐसा माना जा रहा है। एक सरकारी अधिकारी ने इसके बारे में बताया है कि सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि ऐसा पहली बार होगा कि जम्मू-कश्मीर में चुनाव जीतने वाले सभी जनप्रतिनिधि भारत के संविधान की शपथ लेंगे, न कि जम्मू-कश्मीर के संविधान की। उन्होंने कहा 'इस तरह से जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 खत्म करने के केंद्र के फैसला आखिरकार स्थापित हो गया है।' नहीं तो यही कश्मीर था, जहां भारत पाकिस्तान से क्रिकेट मैच हारता था तो सड़कों पर पटाखे जलते थे।
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