Jharkhand Lok Sabha Chunav: बीजेपी के लिए इस बार झारखंड की राह क्यों है मुश्किल?
Jharkhand Lok Sabha Election: भाजपा पिछले दो लोकसभा चुनावों से झारखंड में विपक्षी गठबंधन पर पूरी तरह से हावी रही है। राज्य की 14 सीटों में से 2014 में वह अकेले 12 जीती थी और 2019 में ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (AJSU-1 सीट) को सहयोगी बनाकर भी गठबंधन के पास इतनी ही सीटें बरकरार रखी थी।
लेकिन, 2024 के लोकसभा चुनाव में राज्य में पांच साल से सत्ताधारी महागठबंधन या इंडी अलायंस आदिवासियों के मुद्दे पर उसे घेरने का ऐसा जाल बिछाया है, जिसका मुकाबला करना पार्टी और एनडीए के लिए आसान नहीं रहा है।

झारखंड में 26.21% है आदिवासियों की जनसंख्या
देश में लोकसभा की 47 सीटें अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं, इनमें से झारखंड की 14 में से 5 सीटें शामिल हैं। 2011 की जनगणना के मुताबिक राज्य में जो मुख्य रूप से हो, संथाल, मुंडा और ओरांव जनजातियां पाई जाती हैं, उनकी आबादी राज्य की कुल 3.2 जनसंख्या में से 26.21% है।
झारखंड में जेएमएम की अगुवाई में इंडिया ब्लॉक की है सरकार
झारखंड में 2019 के लोकसभा चुनावों के कुछ महीने बाद ही विधानसभा चुनाव भी हुए थे और तब वहां भाजपा की अगुवाई वाली सरकार की जगह झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली कांग्रेस और आरजेडी गठबंधन की सरकार सत्ता में आई थी। बीते वर्षों में राज्य में कई तरह के भ्रष्टाचार के मामले सामने आए। राज्य सरकार कई तरह के विवादों में भी घिरी।
भाजपा ने बाबूलाल मरांडी को सौंपी कमान
गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री रघुवर दास की अगुवाई में विधानसभा चुनावों में मुंह की खाने के बाद भाजपा ने आदिवासी नेता और झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी को न सिर्फ फिर से पार्टी में शामिल किया, बल्कि उन्हें पार्टी की कमान भी सौंप दी। तब से उनकी अगुवाई में पार्टी प्रदेश में दमदार विपक्षी की भूमिका में नजर आ रही थी।
हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी पर सहानुभूति बटोरना चाहता है इंडिया ब्लॉक
लेकिन, इस साल की शुरुआत में अवैध रूप से जमीन पर कब्जा करने के आरोपों में प्रवर्तन निदेशालय ने तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया, जिसकी वजह से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। भ्रष्टाचार के मामले में उनकी गिरफ्तारी को जेएमएम की अगुवाई वाले इंडिया ब्लॉक ने बहुत ही आसानी से 'आदिवासी अस्मिता' और 'संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग' से जोड़ना शुरू कर दिया।
इंडी अलायंस ने हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन को अपना प्रमुख चेहरा बनाकर आदिवासी मतदाताओं के बीच सहानुभूति वोट बटोरने की रणनीति अपना ली। अब यह चुनाव पूरी तरह से इस बात पर निर्भर लग रहा है कि झारखंड के आदिवासी मतदाता हेमंत सोरेन को एक भ्रष्ट नेता के तौर पर देखते हैं या फिर उन्हें 'राजनीतिक प्रतिशोध' के पीड़ित के रूप में लेते हैं।
भाजपा के पास विकास और कल्याणकारी योजनाओं का आसरा
भाजपा के सामने खनिज संपदा से संपन्न इस राज्य में अपनी विकास योजनाओं और खासकर बीते 10 वर्षों में आदिवासियों के लिए शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं की उम्मीद बची है। बाबूलाल मरांडी की छवि आज भी झारखंड में विकास पुरुष के रूप में कायम है।
आदिवासी मतदाताओं को रिझाने के लिए भाजपा के पास ये भी हैं मुद्दे
भाजपा के सामने पहली आदिवासी महिला द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाने का भी पक्ष है, जो कि झारखंड में राज्यपाल की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं। बिरसा मुंडा को आज भी आदिवासी समाज में भगवान का गौरव प्राप्त है और उनकी जयंती को मोदी सरकार ने जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की परंपरा शुरू की है।
PVTG योजना की भी हुई झारखंड में लॉन्चिंग
मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में आदिवासियों के लिए जो अनेकों योजनाएं शुरू की हैं, उनमें से एक 'विशेष तौर पर कमजोर आदिवासी समूहों' (PVTG) के समग्र विकास के साथ शुरू की गई योजना भी है। पिछले साल नवंबर में पीएम मोदी ने 24,000 करोड़ रुपए की इस योजना की शुरुआत झारखंड में ही बिरसा मुंडा की जयंती से की थी।
झारखंड में बीजेपी की असली चुनौती
पिछले कुछ विधानसभा चुनावों में खासकर छत्तीसगढ़ और गुजरात में भाजपा को आदिवासियों का भरपूर समर्थन मिलने की जानकारियां भी सामने आ रही हैं। लेकिन, झारखंड में पार्टी के सामने यही चुनौती है कि वह किस हद तक अपना संदेश इस वोट बैंक तक पहुंचा पाने में सफल हो पाती है, जिनके हाथ में राज्य के चुनाव परिणाम की चाबी हो सकती है।












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