Jammu Kashmir Statehood: पूर्ण राज्य का दर्जा अभी क्यों नहीं है आसान? उमर अब्दुल्ला को करना होगा ये काम
Jammu and Kashmir Statehood restoration: नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष और केंद्र शासित प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे उमर अब्दुल्ला इसे पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिलाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध होने का संदेश देना चाहते हैं। लेकिन, अब्दुल्ला जितनी जल्दबाजी दिखाना चाह रहे हैं, वह इतना भी आसान नहीं है। जम्मू और कश्मीर अब पूर्ण राज्य का दर्जा पाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुका है, इसके लिए उमर अब्दुल्ला सरकार को केंद्र का भरोसा जीतना पड़ेगा।
नेशनल कांफ्रेंस नेता ने चुनाव नतीजे आने के साथ ही कहा है कि नई सरकार को जम्मू और कश्मीर के राज्य के दर्जा बहाली के लिए प्रस्ताव पास करना चाहिए। अब्दुल्ला खुद सीएम बनने जा रहे हैं और इसलिए कैबिनेट में और यहां तक की नई विधानसभा से भी उन्हें इस तरह का प्रस्ताव पास कराने से कौन रोक सकता है। लेकिन, सिर्फ प्रस्ताव पास कर लेने और उसे अंजाम तक पहुंचाने में बहुत बड़ा फर्क है।

जम्मू और कश्मीर फिर राज्य बनेगा लेकिन कब, सवाल यह है
जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम में ही इस बात की पुख्ता गुंजाइश रखी गई है कि भविष्य में इस केंद्र शासित प्रदेश को फिर से राज्य का दर्जा मिल जाए। यह बात एक नहीं कई बार स्थापित हो चुकी है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कश्मीर की धरती पर पहुंचकर इसका भरोसा दे चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार से इसपर विचार करने का आग्रह कर रखा है। लेकिन, इन आश्वासनों के बीच एक पतली रेखा है। 'समय आने पर' यह फैसला लिया जाएगा और इसपर फैसला केंद्र सरकार ही लेगी, इस बात में भी भी कोई दो राय नहीं है।
चुनावों में नेशनल कांफ्रेंस गठबंधन ने इसे बनाया था मुद्दा
जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव के दौरान नेशनल कांफ्रेंस की अगुवाई वाले गठबंधन ने बार-बार राज्य के दर्जे की बहाली को मुख्य मुद्दा बनाने की कोशिश की। यह जानते हुए भी कि यह व्यवस्था तो एक न एक दिन तय ही है, लेकिन इसकी कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं है।
'उचित समय पर' फैसला लिया जाएगा-केंद्र सरकार
अब्दुल्ला की मांग पर पीएमओ में मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी यही बात दोहराई है कि, 'जम्मू और कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाली अब कोई मुद्दा नहीं है, क्योंकि खुद प्रधानमंत्री ने इसका भरोसा दिया है।' लेकिन, उन्होंने साथ ही यह भी कहा है कि एक प्रक्रिया का पालन होना है और 'उचित समय पर' फैसला लिया जाएगा।
पूर्ण राज्य के दर्जे के लिए उमर अब्दुल्ला को करना होगा ये काम
शायद केंद्रीय मंत्री होने के नाते जितेंद्र सिंह जो बात खुलकर नहीं कह रहे हैं, उसे भाजपा के वरिष्ठ नेता और जम्मू और कश्मीर चुनाव में पार्टी के चुनाव अभियान की बड़ी जिम्मेदारी निभा चुके राम माधव ने संकेतों में ही सही ज्यादा स्पष्टता के साथ बता दिया है।
उन्होंने कहा, 'पिछले 5-10 वर्षों में जम्मू और कश्मीर बहुत दूरी तय कर चुका है। यह आतंकवाद वाली अपनी पहचान मिटा चुका है, अलगाववाद के नजरिए से यह एक शांतिपूर्ण राज्य है...लेकिन जो यहां सत्ता में हैं, उन्हें दिल्ली के लोगों को भरोसा दिलाना चाहिए कि वे इस क्षेत्र में उन बुरे दिनों को वापस नहीं लाएंगे, तभी पूर्ण राज्य का दर्जा संभव है।'
आर्टिकल 370 की बहाली पर उमर अब्दुल्ला की बोलती बंद!
नेशनल कांफ्रेंस चुनावों में जम्मू और कश्मीर की जनता से दो प्रमुख वादे करके सत्ता में आई है। पहले वादे को तो वह प्रस्तावों के माध्यम से पूरा करके जनता को उसपर खरे उतरने की कोशिश करती हुई दिखाना चाह रही है। लेकिन, आर्टिकल 370 की वापसी के मसले पर उमर अब्दुल्ला की अभी बोलती बंद हो चुकी है।
उमर का सिर्फ इतना कहना है, 'जब देश में सरकार बदल जाएगी, तब हम उस सरकार से इसके (आर्टिकल-370) बारे में बात करेंगे और जम्मू और कश्मीर को कुछ दिलाने की कोशिश करेंगे।'












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