J&K: भारत की तनख्वाह में लश्कर की सेवा! LG मनोज सिन्हा ने दो सरकारी कर्मचारियों को दिखाया बाहर का रास्ता
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आज संविधान के आर्टिकल 311 (2) (C) का हवाला देते हुए दो सरकारी कर्मचारियों को आतंकी संबंधों के आरोप में बर्खास्त कर दिया। जांच से स्पष्ट रूप से पता चला कि दोनों कर्मचारी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम कर रहे थे।
जांच में स्पष्ट रूप से स्थापित हुआ कि कुपवाड़ा के करनाह में एक शिक्षक और कुपवाड़ा के केरन में एक सहायक स्टॉकमैन, आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम कर रहे थे और लॉ एनफोर्समेंट और इंटेलिजेंस एजेंसियों ने उनके खिलाफ आपत्तिजनक साक्ष्य एकत्र किए थे।

पहले भी सरकारी कर्मचारी हो चुके हैं बर्खास्त
इस साल की शुरुआत में जून में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कथित तौर पर आतंकवादी समूहों लश्कर-ए-तैयबा और हिज्ब-उल-मुजाहिदीन के लिए काम करने वाले तीन सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया था।
आतंकवाद के खिलाफ मनोज सिन्हा की सख्ती
अगस्त 2020 में पदभार संभालने के बाद से उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकवाद के स्ट्रक्चर को कमजोर करने को प्राथमिकता दी। उन्होंने एक्टिव आतंकियों के साथ-साथ उनके नेटवर्क और सरकारी संस्थानों में मौजूद समर्थकों को भी निशाना बनाया।
बड़ी कार्रवाई और नतीजे
2020 से 2024 के बीच सुरक्षा बलों ने सैकड़ों आतंकियों को ढेर किया। साथ ही अनुच्छेद 311(2)(c) के तहत 70 से ज़्यादा ओवरग्राउंड वर्कर्स और आतंक समर्थकों को सरकारी नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। यह कदम पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के बाद उठाया गया।
ऑपरेशन महादेव की सफलता
28 जुलाई को श्रीनगर के पास दाचीगाम नेशनल पार्क के पास हुई मुठभेड़ में तीन आतंकी मारे गए। गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बताया कि ये वही आतंकी थे, जो पहलगाम हमले में शामिल थे।
शाह का कड़ा संदेश
पहलगाम हमले को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि , निर्दोष नागरिकों को धर्म पूछकर मारा गया, जो बेहद निंदनीय है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की। पहलगाम हमले के बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और Pok (पाक अधिकृत कश्मीर) में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले के साथ करारा जवाब दिया था।












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