Shehla Rashid: PM Modi की कटु आलोचक का कैसा बदला मन? JNU की पूर्व छात्रा शेहला रशीद ने बताई समर्थन की वजह
Shehla Rashid On Modi Government: जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) की पूर्व स्टूडेंट शेहला रशीद किसी वक्त में पीएम मोदी और भाजपा सरकारी की कट्टर विरोधी थीं, लेकिन हाल ही के कुछ सालों में उनका मन पूरी तरह से परिवर्तित हो चुका है। ऐसे में मोदी आलोचक रहीं शेहला रशीद ने अपने 'यू-टर्न' पर बयान दिया है।
शेहला रशीद कई सालों तक केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की तीखी आलोचना करने को लेकर सुर्खियों में रही, लेकिन अब वो कई मुद्दों पर केंद्र सरकार का खुला समर्थन करती दिखी है। ऐसे उनको लेकर कई सवाल भी उठाए गए, लेकिन अपने 'समर्थन' का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि वह नहीं बदलीं, बल्कि कश्मीर की स्थिति बदल गई है।

अपने यूटर्न पर क्या बोलीं शेहला?
नरेंद्र मोदी के प्रति अपने रुख में 'यू-टर्न' के बारे में बताते हुए कभी प्रधानमंत्री की कटु आलोचक रहीं एक्टिविस्ट शेहला रशीद ने कहा कि वह नहीं बदली हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर में जमीनी हालात में सकारात्मक बदलाव आया है।
2015-16 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) की उपाध्यक्ष रहीं शेहला ने कहा, "हमने देखा कि कैसे आम कश्मीरी हाल ही में पीएम मोदी की रैली के लिए कतार में खड़े थे। मेरा एजेंडा शासन को बदनाम करना नहीं है। ऐसा नहीं है कि घाटी लगातार प्रधानमंत्री के नाम का जाप कर रही है, बल्कि लोग अब उस सरकार से शिकायतें कर रहे हैं जिसे वे अपना मानते हैं।''
बताए कश्मीर में बदलाव के मुद्दे
उन्होंने सीएनएन न्यूज18 के राइजिंग भारत समिट में कश्मीर के मुद्दे पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे जमीन पर उठाए जाने वाले मुद्दों में बदलाव आया। शेहला ने कहा, "मैं इस बात से सहमत हूं कि ऐसे मुद्दे हैं, जिनका समाधान अभी भी होना बाकी है, जैसे बिजली कटौती। लेकिन, ये अपने आप में एक बदलाव है कि अब आपके सामने सड़क और बिजली कटौती से जुड़े मुद्दे हैं। वर्षों पहले, एकमात्र ज्वलंत मुद्दा स्वतंत्रता की मांग थी।"
कब पीएम मोदी को लेकर बदले विचार
फिर शेहला रशीद से पूछा गया कि ऐसा कब हुआ कि प्रधानमंत्री के लिए उनके विचार बदलने लगे। उन्होंने जवाब दिया कि कोविड-19 महामारी ने उनके विचार बदल दिए। पूर्व छात्र नेता, जिन्होंने जेएनयू से पीएचडी की है, उन्होंने खुलकर बताया कि "मुझे एहसास हुआ कि कभी-कभी, हम मास्किंग, वैक्सीन और लॉकडाउन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों का विरोध कर रहे थे। आपका विरोध कभी-कभी बनाए गए 'शिविरों' के कारण होता है। सरकार के पास बदलाव का एक अलग सिद्धांत था और हमारे पास भी एक है। उदाहरण के लिए, 10 साल पहले हम सर्विलांस के मुद्दे पर आधार का विरोध कर रहे थे, लेकिन अब, हम डिजी यात्रा और डिजी लॉकर जैसे ऐप का उपयोग करते हैं।''
आपको बता दें कि शेहला रशीद पहली बार फरवरी 2016 में अपने साथी जेएनयू छात्रों कन्हैया कुमार और उमर खालिद के साथ देशद्रोह विवाद के दौरान चर्चाओं में आईं, जिसके कारण तत्कालीन-जेएनयूएसयू अध्यक्ष कन्हैया कुमार, खालिद और अन्य की गिरफ्तारी हुई थी।












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