राहुल गांधी की आलोचना करने पर उपराष्ट्रपति को जयराम रमेश ने बताया 'चीयरलीडर', लगाए गंभीर आरोप

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के राहुल गांधी को लेकर दिए गये बयान पर कांग्रेस ने पलटवार किया है। जयराम रमेश ने कहा कि, राज्यसभा के सभापति सभी के लिए 'अंपायर और रेफरी' होते हैं, लेकिन वह सत्तापक्ष के 'चीयरलीडर' नहीं हो सकते।

Delhi: कांग्रेस ने लंदन में राहुल गांधी की टिप्पणी की आलोचना करने पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) पर जमकर निशाना साधा। पार्टी महासचिव जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने कहा कि, राज्यसभा के सभापति सभी के लिए 'अंपायर और रेफरी' होते हैं, लेकिन वह सत्तापक्ष के 'चीयरलीडर' नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि, धनखड़ की टिप्पणियां निराशाजनक हैं। संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति को पूर्वाग्रह और किसी दल के प्रति झुकाव से मुक्त होना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने राहुल गांधी के भाषण पर की थीं टिप्पणियां
दरअसल, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने संसद में माइक्रोफोन बंद करने के राहुल गांधी के आरोपों पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि, अगर वह इस मुद्दे पर चुप रहते हैं तो वह संविधान के 'गलत पक्ष' में होंगे। उन्होंने कहा कि, विदेशी धरती से यह कहना मिथ्या प्रचार और देश का अपमान है कि भारतीय संसद में माइक बंद कर दिया जाता है। जयराम रमेश ने कहा कि, गुरुवार को एक पुस्तक के विमोचन के मौके पर एक कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति ने ब्रिटेन में दिए गए गांधी के भाषण पर कुछ टिप्पणियां कीं। 'कुछ कार्यालय ऐसे हैं जिनके लिए हमें अपने पूर्वाग्रहों, अपनी पार्टी की निष्ठाओं को त्यागने की आवश्यकता होती है, और हमें जो भी प्रचार हो सकता है, उससे खुद को दूर करने के लिए मजबूर करना पड़ता है।

गांधी पर उपराष्ट्रपति का बयान आश्चर्यजनक था- जयराम रमेश
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि, 'भारत के उपराष्ट्रपति का कार्यालय एक ऐसा कार्यालय जिसे संविधान राज्यसभा के अध्यक्ष होने की अतिरिक्त जिम्मेदारी देता है, वह इनमें सबसे प्रमुख है।' उन्होंने कहा कि, गांधी पर उपराष्ट्रपति का बयान आश्चर्यजनक था। रमेश ने कहा कि इस तरह का बयान भ्रमित करने के साथ-साथ निराशाजनक भी था।'

उन्होंने कहा कि गांधी ने विदेश में ऐसा कुछ नहीं कहा है जो उन्होंने यहां कई बार नहीं कहा है। रमेश ने यह भी तर्क दिया कि गांधी का बयान तथ्यात्मक था और जमीन पर वास्तविकता का प्रतिनिधि था। उन्होंने कहा कि, 'पिछले दो हफ्तों में विपक्षी दलों से संबंधित संसद के बारह से अधिक सदस्यों को संसद में उनकी आवाज को दबाने का विरोध करने के लिए विशेषाधिकार हनन के नोटिस दिए गए हैं, जो सत्तारूढ़ शासन के लिए असुविधाजनक है।'

सरकार की कार्रवाई पर उठाए सवाल
रमेश ने आरोप लगाया कि पिछले आठ वर्षों में चैनलों और समाचार पत्रों को ब्लैक आउट किया गया, छापे मारे गए और इस हद तक धमकाया गया कि केवल सरकार की ही आवाज सुनाई दे रही है। उन्होंने दावा किया कि अतीत की सरकारों से एक अध्ययन दूरी बनाए रखने वाली संस्थाएं अब इस हद तक अधीन हो गई हैं कि वे किसी भी आदेश या सत्तारूढ़ शासन के प्रतिकूल होने पर घुट जाती हैं। रमेश ने कहा कि, 'असहमति रखने वालों को दंडित किया जाता है। आपातकाल की घोषणा नहीं हो सकती है, लेकिन कोई गलती न करें, इस शासन की कार्रवाई एक सुरक्षित सरकार की नहीं है जो संविधान का सम्मान करती है।'

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रमेश ने कहा कि, 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में हम इस शासन के विरोध में सबसे सुसंगत आवाज रहे हैं और आगे भी ऐसा करते रहेंगे।' हालांकि, अध्यक्ष एक अंपायर, एक रेफरी, एक मित्र, दार्शनिक और सभी के लिए मार्गदर्शक है। वह किसी भी सत्तारूढ़ व्यवस्था के लिए चीयरलीडर नहीं हो सकते। दिग्गज कांग्रेसी नेता और पूर्व सांसद करण सिंह की मुंडक उपनिषद पर लिखी किताब के विमोचन के मौके पर धनखड़ ने गांधी की लंदन में की गई टिप्पणी पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा, "दुनिया हमारी ऐतिहासिक उपलब्धियों और कार्यात्मक, जीवंत लोकतंत्र की सराहना कर रही है। हममें से कुछ, जिनमें सांसद भी शामिल हैं, बिना सोचे-समझे, हमारे सुपोषित लोकतांत्रिक मूल्यों का अनुचित अपमान करने में लगे हुए हैं।'

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