Jai Bhim movie: प्रकाश राज के किरदार पर क्यों हो रहा है विवाद ? जानिए
नई दिल्ली, 3 नवंबर: फिल्म जय भीम को लेकर एक बहुत बड़ा विवाद छिड़ चुका है। सोशल मीडिया पर फिल्म के एक सीन की वजह से लोग दावा कर रहे हैं कि इसके जरिए हिंदी भाषियों के खिलाफ नफरत फैलाने का एजेंडा चलाने की कोशिश की गई है। जबकि, कुछ लोग उस आपत्तिजनक सीन को लेकर भी बचाव में उतर आए हैं। वहीं ऐसे भी सोशल मीडिया यूजर्स हैं, जिन्हें लगता है कि यह सब सस्ती लोकप्रियता हथियाने का हथकंडा है। बहरहाल, वह सीन क्या है और उसको लेकर क्या कहा जा रहा है और इस फिल्म को बनाने का आधार क्या है, यह जानकर ही को राय बनाई जा सकती है।

प्रकाश राज के किरदार पर क्यों हो रहा है विवाद ?
सूर्या शिवकुमार और प्रकाश राज के किरदारों वाली फिल्म 'जय भीम' को लेकर एक वर्ग की ओर से काफी कुछ दावा किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि फिल्म में महत्वपूर्ण सामाजिक मसले को उठाने की कोशिश की गई है। लेकिन, जब से फिल्म का एक सीन ट्विटर पर वायरल हुआ है, इसको लेकर जबर्दस्त विवाद छिड़ गया है। सीन में दिख रहा है कि पुलिस ऑफिसर का रोल निभा रहे अभिनेता प्रकाश राज एक अधेड़ उम्र के शख्स को सिर्फ इस बात पर तमाचा मार रहे हैं कि उसने 'हिंदी बोलने की गुस्ताखी' की। फिल्म में प्रकाश ने उस व्यक्त को हिदायत दी कि तमिल में बात करे। ट्विटर पर यूजर इसी बात पर आहत हैं कि फिल्म के जरिए 'हिंदी के खिलाफ नफरत' फैलाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन, विवाद बढ़ता देख यूजर का एक और गुट उतर आया है, जो किरदार को बचाने के लिए तरह-तरह की दलीलें देने की कोशिश कर रहा है।
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'हिंदी बोलने पर प्रकाश राज ने मारा थप्पड़'
फिल्म 'जय भीम' हाल ही में समीक्षा के लिए रिलीज हुई है। लेकिन, फिल्म की जो क्लिप चल रही है, उसके एक सीन को लेकर लोगों को सख्त आपत्ति है। यूजर्स के मुताबिक उस सीन में पुलिस अधिकारी की भूमिका निभा रहे प्रकाश राज एक शख्स को सिर्फ हिंदी बोलने के लिए तमाचा मार रहे हैं और उसे तमिल में ही बात करने को कह रहे हैं। एक यूजर ने लिखा है, 'जय भीम देखने के बाद सच में मेरा दिल टूट गया, ऐक्टर या किसी और से दिक्कत नहीं है, लेकिन सही में बुरा लग रहा है....फिल्म में एक सीन है, जिसमें एक व्यक्ति हिंदी बोल रहा है और प्रकाश राज उसे थप्पड़ मार रहे हैं और कह रहे हैं कि तमिल में बोलो। सच में ऐसे सीन की कोई जरूरत नहीं थी। उम्मीद करता हूं कि वह इसे हटा देंगे.....' उसने आगे लिखा है कि 'उन लोगों ने फिल्म को सपोर्ट किया, पूरे भारत में रिलीज करने की गुजारिश की। हम सिर्फ प्रेम की बात कर रहे थे....अगर प्रेम नहीं तो कम से कम अपमान भी तो नहीं किया जाए....'
संविधान के कौन से अनुच्छेद......?
एक यूजर ने उस क्लिप को शेयर करते हुए लिखा है, 'डियर प्रकाश राय उर्फ प्रकाश राज, संविधान का कौन सा अनुच्छेद किसी भी व्यक्ति को सिर्फ इसलिए मारने का अधिकार देता है, क्योंकि वह हिंदी या कोई भारतीय भाषा नहीं बोल रहा है? यदि ऐसा है, तो दूसरी फिल्मों में हिंदी, तमिल, मलयालम, तेलुगु में बोलने के लिए कितने कन्नड़ों को आपको मारना चाहिए (इस तरह से).....?' एक और यूजर ने लिखा है, 'प्रकाश राज फिल्म 'जय भीम' में अपने प्रोपेगेंडा के साथ जहां वह हिंदी में बोलने वाले व्यक्ति को थप्पड़ मारते हैं।'

'सीन हिंदी-भाषी भारतीयों के खिलाफ नहीं'
लेकिन, कुछ यूजर ऐसे भी हैं जो प्रकाश राज और फिल्म के किरदार के बचाव में कूद पड़े हैं। ऐसे लोगों का दावा है कि प्रकाश राज ने फिल्म में उस व्यक्ति को इसलिए नहीं मारा कि उसने हिंदी बोला, बल्कि इसलिए क्योंकि ऐसा करके वह उन्हें कंफ्यूज करना चाहता था, क्योंकि वह हिंदी नहीं समझ सकते थे और वह शख्स तमिल बोल सकता था। एक यूजर ने लिखा है, 'यह सीन हिंदी-भाषी भारतीयों के खिलाफ नहीं है। वह किरदार हिंदी बोलकर बच निकलना चाहता था (क्योंकि प्रकाश राज यह नहीं समझ पाते) और उसकी यह मंशा समझकर उन्होंने उसे थप्पड़ मारा और तमिल में बताने को कहा। तमिल फिल्मकार हिंदी भाषा के खिलाफ नहीं हैं (इस तरह से)।'

'विवाद से बचा जा सकता था'
एक और यूजर ने विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है, 'हिंदी वर्जन देखिए, वह कहते हैं कि सच बताओ, लेकिन तमिल और तेलुगु वर्जन में वह कहते हैं तमिल में बताओ या तेलुगु में बताओ। सभी वर्जन में एक ही तरह से बात क्यों नहीं रखी गई। सिर्फ इतना रखो 'सच बताओ', इसकी जगह कि तमिल में बोलो। यह बिना मतलब की सस्ती भाषाई राजनीति है। जोमैटो का मुद्दा याद कीजिए (ऐसे ही)।' दावे के मुताबिक जय भीम की कहानी 1993 की एक सच्ची घटना पर आधारित है। इसमें पुलिस ज्यादती बयां की गई है। जय भीम इरुलर जनजाति की एक दंपति सेंगगेनी और राजकन्नू पर आधारित है ।












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