Jagdeep Dhankhar: उपराष्ट्रपति रहते जगदीप धनखड़ के 5 विवादित बयान, जिसने राजनीति की गलियों में छेड़ दी थी बहस
Jagdeep Dhankhar: देश की राजनीति में सोमवार की शाम एक बड़ा मोड़ आया जब उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर पद छोड़ने वाले धनखड़ ने राष्ट्रपति को पत्र भेजते हुए तत्काल प्रभाव से अपने फैसले की जानकारी दी। अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति बनने वाले धनखड़ का कार्यकाल 2027 तक था, लेकिन कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उन्होंने यह चौंकाने वाला कदम उठाया।
धनखड़ न सिर्फ अपने संवैधानिक पद के कारण, बल्कि अपने तीखे और बिना लाग-लपेट के बयानों के कारण भी लगातार सुर्खियों में बने रहे। सबसे ज्यादा सुर्खियां उन्होंने अपने साफ और तीखे बयानों से बटोरीं। उपराष्ट्रपति रहते उन्होंने कई संवेदनशील मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखी, जो कई बार बहस का कारण भी बनीं। उनके बयान कई बार राजनीतिक हलकों से लेकर न्यायपालिका और प्रशासनिक संस्थाओं तक में गहरी चर्चा और बहस का विषय बने। आइए, जानते हैं कि उपराष्ट्रपति रहते उन्होंने किन-किन मुद्दों पर अपने विचार रखकर हलचल मचाई थी।

अनुच्छेद 142 को बताया 'न्यूक्लियर मिसाइल'
एक भाषण में धनखड़ ने संविधान के अनुच्छेद 142 की तुलना न्यूक्लियर मिसाइल से करते हुए कहा था कि यह शक्ति अब लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए खतरे जैसी हो गई है। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति को निर्देश देना न्यायपालिका की ताकत का दुरुपयोग है।"
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संसद को बताया सर्वोच्च संस्था
दिल्ली विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम के दौरान धनखड़ ने साफ कहा था कि "भारत में संसद सबसे बड़ी संस्था है और कोई भी उससे ऊपर नहीं हो सकता।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि सांसद आम जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए संसद की सर्वोच्चता बरकरार रहनी चाहिए।
धर्मांतरण पर चेतावनी
धनखड़ ने सुनियोजित धर्मांतरण को लेकर चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था, "एक खास तरह की शुगर कोटेड सोच के जरिए समाज के कमजोर वर्गों को बहकाया जा रहा है। आदिवासी समाज को लालच देकर धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है, जो हमारे मूल्यों और संविधान के खिलाफ है।"
राजनीतिक बहसों में संयम की सलाह
एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को राजनीतिक भड़काऊ बहसों से बचना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमारी संस्थाएं कठिन परिस्थितियों में देश की सेवा करती हैं, उन्हें कमजोर करने वाले बयान बचने चाहिए। हमें अपने संवैधानिक आदर्शों की रक्षा करनी चाहिए।"
BBC डॉक्युमेंट्री विवाद पर टिप्पणी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बनी BBC की डॉक्युमेंट्री के खिलाफ बोलते हुए धनखड़ ने इसे "भारत की छवि को धूमिल करने की साजिश" बताया था। उन्होंने इसे "पूर्वनियोजित हमला" करार दिया, जिसे लेकर विपक्षी नेताओं ने उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
धनखड़ का कार्यकाल कई मामलों में अलग रहा। उनके विचारों और बयानों ने संसद से लेकर जनता तक को सोचने पर मजबूर किया। इस्तीफे के साथ ही एक ऐसे उपराष्ट्रपति का अध्याय समाप्त हो गया, जो हमेशा मुखर और स्पष्टवादी रहा।
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