Rajya Sabha Elections 2026: 27 सीटों पर नामांकन शुरू, कहां फंसेगा पेंच और किन राज्यों में होगी दिलचस्प लड़ाई?
Rajya Sabha Elections 2026: देश के उच्च सदन (राज्यसभा) और दो प्रमुख राज्यों की विधान परिषदों (MLC) के लिए चुनावी बिगुल बज चुका है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की आधिकारिक अधिसूचना के बाद सोमवार, 1 जून 2026 से राज्यसभा की 27 सीटों (24 द्विवार्षिक + 3 उपचुनाव) और बिहार व कर्नाटक विधान परिषद की 19 सीटों के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आगामी 18 जून 2026 को होने वाले इस चुनाव ने देश के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
इस बार का चुनाव केवल सीटों के जोड़-तोड़ तक सीमित नहीं है। इस चुनाव में मोदी सरकार के दो दिग्गज केंद्रीय मंत्रियों के राजनीतिक भविष्य और कैबिनेट की कुर्सी दांव पर लग गई है। वहीं, विपक्ष के कई कद्दावर नेताओं की साख भी इस अग्निपरीक्षा में परखी जानी है।

नामांकन से नतीजों तक का पूरा टाइमटेबल
चुनाव आयोग ने सभी संबंधित राज्यों में शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से मतदान संपन्न कराने के लिए रिटर्निंग ऑफिसर्स की नियुक्ति कर दी है। पूरा शेड्यूल इस प्रकार है:
- नामांकन की शुरुआत: 1 जून 2026 (सुबह 11:00 बजे से)
- नामांकन की आखिरी तारीख: 8 जून 2026 (दोपहर 3:00 बजे तक)
- नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी): 9 जून 2026
- नाम वापसी की अंतिम तिथि: 11 जून 2026
- मतदान एवं मतगणना: 18 जून 2026 (सुबह 9:00 से शाम 4:00 बजे तक वोटिंग, शाम 5:00 बजे से नतीजे)
किन राज्यों में कितनी सीटों पर चुनाव?
राज्यसभा की सीटें
- आंध्र प्रदेश - 4
- गुजरात - 4
- कर्नाटक - 4
- मध्य प्रदेश - 4
- राजस्थान - 3
- झारखंड - 2
- मणिपुर - 1
- मेघालय - 1
- अरुणाचल प्रदेश - 1
- मिजोरम - 1
- उपचुनाव
- महाराष्ट्र - 1
- तमिलनाडु - 1
- ओडिशा - 1
इसके अलावा बिहार विधान परिषद की 10 और कर्नाटक विधान परिषद की 9 सीटों के लिए भी चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
इन दो केंद्रीय मंत्रियों पर लटकी तलवार, दांव पर लगी कैबिनेट की कुर्सी!
इस राज्यसभा चुनाव का सबसे बड़ा पहलू मोदी सरकार के दो गैर-सांसद मंत्रियों से जुड़ा है, जिनका कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। यदि ये दोनों 18 जून को दोबारा चुनकर उच्च सदन में नहीं आते हैं, तो संविधान के नियमों के मुताबिक इन्हें केंद्रीय मंत्रिपरिषद (Cabinet) से इस्तीफा देना होगा:
रवनीत सिंह बिट्टू (केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण और रेलवे राज्य मंत्री): रवनीत सिंह बिट्टू फिलहाल राजस्थान से राज्यसभा सांसद हैं। पंजाब विधानसभा चुनाव के आगामी समीकरणों को देखते हुए भाजपा उन्हें दोबारा उच्च सदन में भेजने की रणनीति बना रही है, लेकिन राजस्थान में सीटों के बदलते गणित ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
जॉर्ज कूरियन (अल्पसंख्यक मामलों और मत्स्य पालन राज्य मंत्री): कूरियन मध्य प्रदेश कोटे से राज्यसभा सांसद हैं। उन्हें केरल के सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों को साधने के लिए केंद्र सरकार में जगह दी गई थी। अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा आलाकमान मध्य प्रदेश की अपनी सुरक्षित सीट से उन्हें दोबारा मौका देता है या किसी नए स्थानीय चेहरे पर दांव खेलता है।
इस चुनावी चक्र में कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह जैसे कद्दावर नेताओं का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है।
कहां फंसेगा पेंच? इन राज्यों में होगी 'कांटे की टक्कर'
विधानसभाओं के संख्या बल (Floor Metrics) के हिसाब से कई राज्यों में मुकाबला साफ है, लेकिन तीन राज्यों में शह-मात का खेल बेहद दिलचस्प होने जा रहा है:
कर्नाटक (4 राज्यसभा + 9 विधान परिषद सीटें): खरगे की सेफ एंट्री, देवेगौड़ा पर सस्पेंस
कर्नाटक की 4 राज्यसभा सीटों में से मौजूदा विधानसभा के संख्या बल के हिसाब से सत्तारूढ़ कांग्रेस आसानी से तीन सीटें जीत सकती है। कांग्रेस की इन तीन सीटों में से एक पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का दोबारा चुना जाना पूरी तरह तय माना जा रहा है।
पेंच कहां फंसेगा?
JDS के दिग्गज नेता और पूर्व पीएम एच. डी. देवेगौड़ा का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है। चौथी सीट के लिए बीजेपी-जेडीएस गठबंधन और कांग्रेस के बीच एक-एक अतिरिक्त वोट के लिए खींचतान मची है। इसके अलावा 9 विधान परिषद सीटों के लिए भी दोनों खेमों में 'क्रॉस-वोटिंग' का डर सता रहा है, जिससे रिजॉर्ट पॉलिटिक्स की सुगबुगाहट शुरू हो गई है।
राजस्थान (3 सीटें): बिट्टू बनाम गहलोत और पवन खेड़ा का सस्पेंस
राजस्थान में राज्यसभा की 3 सीटें खाली हो रही हैं। विधानसभा के गणित के अनुसार यहाँ भाजपा को दो और कांग्रेस को एक सीट मिलना तय है। भाजपा की ओर से केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का नाम सबसे आगे चल रहा है। वहीं, कांग्रेस के हिस्से आने वाली इकलौती सीट के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पणन खेड़ा के नामों की चर्चा जोरों पर है। यदि भाजपा अपने दो आधिकारिक उम्मीदवारों के अलावा किसी निर्दलीय या तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारकर छोटे दलों व असंतुष्ट विधायकों को साधने की कोशिश करती है, तो कांग्रेस की एक सीट पर भी संकट खड़ा हो सकता है।
मध्य प्रदेश (3 सीटें): दिग्विजय सिंह की सीट पर बीजेपी की नजर
मध्य प्रदेश की 3 सीटों पर चुनाव होने हैं, जिनमें से एक सीट कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह की है। राज्य विधानसभा में भाजपा के पास प्रचंड बहुमत है, जिसके चलते 3 में से 2 सीटों पर भाजपा की जीत तय है। भाजपा की कोशिश दिग्विजय सिंह वाली तीसरी सीट पर भी अपना दबदबा बनाने की है। वहीं, केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कूरियन को दोबारा एडजस्ट करने के लिए भाजपा की अंदरूनी लिस्टिंग काफी पेचीदा हो चुकी है।
राज्यसभा के भीतर कितना बदलेगा समीकरण
इन 27 सीटों के नतीजों का सीधा असर संसद के उच्च सदन में सरकार और विपक्ष के संख्या बल पर पड़ेगा। महत्वपूर्ण विधेयकों को पास कराने के लिए बीजेपी नीत एनडीए को जहाँ कुछ और सहयोगियों की दरकार होगी, वहीं विपक्ष अपनी ताकत को बनाए रखने की पुरजोर कोशिश करेगा। 8 जून को नामांकन प्रक्रिया खत्म होने के बाद यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि किस सीट पर मुकाबला निर्विरोध होगा और कहां 'रिजॉर्ट पॉलिटिक्स' का नाटक दोबारा देखने को मिलेगा।














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