Twisha Sharma Death: पुतले से ‘मौत का सीन’ रीक्रिएट, Giribala-Samarth बॉडी थामे, क्या-क्या जांच रही CBI?
Twisha Sharma Death Case: ट्विशा शर्मा मौत मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच अब बेहद अहम मोड़ पर पहुंच गई है। मामले की सच्चाई तक पहुंचने के लिए एजेंसी ने घटनास्थल पर क्राइम सीन रीक्रिएशन (Crime Scene Recreation) कराया। इस दौरान ट्विशा के कद और वजन के बराबर एक डमी (पुतले) का इस्तेमाल किया गया। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, रीक्रिएशन के दौरान रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह की मौजूदगी में उस रात के घटनाक्रम को दोहराया गया।
सूत्रों का दावा है कि घटनास्थल पर पुतले के जरिए यह समझने की कोशिश की गई कि 12 मई की रात आखिर क्या हुआ था? इसी दौरान कुछ ऐसे बिंदु सामने आए हैं, जिन्होंने जांच को नई दिशा दे दी है। हालांकि, CBI ने आधिकारिक तौर पर किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की है, लेकिन रीक्रिएशन के दौरान सामने आए तथ्यों को अब फॉरेंसिक और डिजिटल सबूतों से मिलाया जा रहा है। क्या हुआ क्राइम सीन रीक्रिएशन में?

जानकारी के अनुसार, CBI टीम घटनास्थल पर ट्विशा के समान वजन और लंबाई वाला पुतला लेकर पहुंची। जांचकर्ताओं ने कमरे की स्थिति, फंदे की ऊंचाई, फर्श की दूरी और उस रात मौजूद परिस्थितियों को हूबहू दोहराने की कोशिश की।
सूत्रों के मुताबिक, रीक्रिएशन के दौरान एक चरण में गिरिबाला सिंह को पुतले के फंदे वाले हिस्से को पकड़ते हुए दिखाया गया, जबकि समर्थ सिंह कथित रूप से पुतले की बॉडी को संभालते नजर आए। एजेंसी यह समझना चाहती थी कि यदि घटनाक्रम आरोपियों के बताए अनुसार हुआ था, तो उसकी भौतिक परिस्थितियां क्या थीं और क्या वह फॉरेंसिक साक्ष्यों से मेल खाती हैं। CBI ने पूरे घटनाक्रम की वीडियोग्राफी भी कराई ताकि, बाद में विशेषज्ञ उसकी तकनीकी समीक्षा कर सकें।
Twisha Sharma Death Case Scene Recreation With Dummy: पुतले के साथ बार-बार दोहराया गया घटनाक्रम

सूत्रों के अनुसार, एजेंसी ने केवल एक बार नहीं बल्कि कई बार अलग-अलग एंगल से रीक्रिएशन कराया। इसका उद्देश्य यह देखना था कि शरीर का वजन, फंदे की स्थिति और कमरे की संरचना के बीच क्या संबंध बनता है। जांच अधिकारी यह भी समझना चाहते थे कि अगर कोई व्यक्ति फंदे से लटका हो तो, उसे नीचे उतारने या संभालने की प्रक्रिया कैसी होगी। इसी कारण डमी के साथ कई प्रयोग किए गए। CBI का मानना है कि इस तरह के वैज्ञानिक परीक्षण किसी भी संदिग्ध मौत के मामले में बेहद महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि वे केवल बयानों पर नहीं बल्कि भौतिक परिस्थितियों पर आधारित होते हैं।
Giribala Singh और Samarth से घंटों पूछताछ, कई नए सवाल!
क्राइम सीन रीक्रिएशन के दौरान और उसके बाद गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह से डिटेल में पूछताछ भी की गई। सूत्रों का कहना है कि दोनों से उस रात की घटनाओं के बारे में कई बार सवाल पूछे गए। CBI अधिकारियों ने यह जानने की कोशिश की कि घटना के समय कौन कहां मौजूद था? सबसे पहले कमरे में कौन पहुंचा? फंदे को किसने देखा और बाद में क्या-क्या कदम उठाए गए? बताया जा रहा है कि एजेंसी ने उनके बयानों का मिलान पहले दर्ज किए गए बयानों और घटनास्थल से मिले सबूतों से भी किया।
क्या-क्या जांच रही है CBI?

CBI की जांच कई बिंदुओं पर केंद्रित है...
- घटनास्थल की वास्तविक स्थिति क्या थी?
- फंदे और शरीर की स्थिति फॉरेंसिक रिपोर्ट से मेल खाती है या नहीं?
- घटनास्थल पर मौजूद लोगों के बयान कितने सुसंगत हैं?
- घटना के समय कमरे में कौन-कौन मौजूद था?
- मौत से पहले और बाद की गतिविधियों का क्रम क्या था?
- डिजिटल साक्ष्य और घटनास्थल के भौतिक साक्ष्य क्या संकेत देते हैं?
इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए क्राइम सीन रीक्रिएशन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ट्विशा की मौत क्यों बनी राष्ट्रीय चर्चा का विषय?

ट्विशा शर्मा की मौत ने इसलिए भी सुर्खियां बटोरीं क्योंकि परिवार ने शुरू से ही इसे सामान्य आत्महत्या मानने से इनकार किया। परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद ट्विशा को लगातार मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।
परिवार का दावा है कि उसने कई बार मदद की गुहार लगाई थी और अपने हालात को लेकर चिंता जताई थी। यही कारण रहा कि मामले ने धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया और अंततः CBI जांच तक पहुंच गया।
फॉरेंसिक रिपोर्ट से मिलाए जा रहे हैं तथ्य
CBI केवल रीक्रिएशन पर निर्भर नहीं है। एजेंसी अब इस दौरान सामने आए हर तथ्य को मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट से मिला रही है। जांचकर्ता यह देख रहे हैं कि...
- शरीर की स्थिति और फंदे का कोण क्या था?
- कमरे में मौजूद वस्तुओं की स्थिति क्या थी?
- घटनास्थल की तस्वीरें और वर्तमान रीक्रिएशन कितने मेल खाते हैं?
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट क्या संकेत देती है?
- क्या बयानों और वैज्ञानिक तथ्यों में कोई विरोधाभास है?
इन्हीं सवालों के जवाब से आगे की जांच की दिशा तय होगी।
CBI के लिए क्यों अहम है यह प्रयोग?
किसी भी हाई-प्रोफाइल मौत के मामले में क्राइम सीन रीक्रिएशन एक महत्वपूर्ण जांच तकनीक मानी जाती है। इससे एजेंसी को घटनास्थल की वास्तविक परिस्थितियों को समझने में मदद मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार गवाहों या आरोपियों के बयान समय के साथ बदल जाते हैं, लेकिन भौतिक परिस्थितियां झूठ नहीं बोलतीं। इसलिए रीक्रिएशन को जांच का मजबूत वैज्ञानिक आधार माना जाता है। ट्विशा केस में भी CBI यही जानना चाहती है कि घटनास्थल की वास्तविक स्थिति क्या थी और क्या वह उपलब्ध साक्ष्यों से मेल खाती है।
परिवार को अब भी अंतिम रिपोर्ट का इंतजार
ट्विशा शर्मा के परिवार का कहना है कि उन्हें जांच एजेंसी पर भरोसा है और वे चाहते हैं कि मामले की पूरी सच्चाई सामने आए। परिजनों का कहना है कि जब तक अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आता, तब तक कई सवाल अनुत्तरित रहेंगे। उनका मानना है कि CBI की जांच से उन सवालों के जवाब मिल सकते हैं जो शुरुआती जांच में स्पष्ट नहीं हो पाए थे।
अदालत की नजर भी जांच पर
मामला न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में भी है। इसलिए जांच एजेंसी की हर कार्रवाई पर अदालत की नजर बनी हुई है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर क्राइम सीन रीक्रिएशन से कोई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आता है तो उसका असर जमानत, आरोपपत्र और आगे की सुनवाई पर पड़ सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय अदालत द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और जांच एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर ही लिया जाएगा।
क्या सामने आ सकती है नई कहानी?
CBI की जांच अभी जारी है और एजेंसी ने किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया है। क्राइम सीन रीक्रिएशन का उद्देश्य केवल यह समझना था कि घटनाक्रम किस प्रकार हुआ हो सकता है। अब एजेंसी रीक्रिएशन, फॉरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्य, कॉल रिकॉर्ड, चैट और गवाहों के बयानों को एक साथ जोड़कर पूरी तस्वीर तैयार करने में जुटी है। अगर, इनमें कोई बड़ा विरोधाभास सामने आता है तो मामले में नए खुलासे हो सकते हैं। वहीं यदि सभी तथ्य एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं तो जांच अपने अंतिम निष्कर्ष की ओर बढ़ सकती है।
ट्विशा शर्मा मौत मामले में CBI द्वारा कराया गया क्राइम सीन रीक्रिएशन जांच का सबसे अहम चरण माना जा रहा है। ट्विशा के बराबर वजन वाले पुतले के जरिए घटनास्थल पर उस रात की परिस्थितियों को दोबारा बनाया गया। सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह की भूमिकाओं को भी परखा गया। हालांकि अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन इतना तय है कि इस रीक्रिएशन ने जांच को नई दिशा दी है। अब सबकी नजर CBI की अंतिम रिपोर्ट और अदालत में पेश होने वाले साक्ष्यों पर टिकी है, जो इस हाई-प्रोफाइल मामले की सच्चाई सामने ला सकते हैं।













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