कोलकाता के कौन-कौन से मुद्दे नोट हो गये हैं नरेंद्र मोदी की डायरी में

Narendra Modi
लाखों करोड़ों लोगों को अपने नमो-नमो के शंखनाद से प्रभावित करने वाले नरेंद्र मोदी के शंख कि गूंज आज कोलकाता में गूंजेगी। ब्रिगेड परेड ग्राउंड में जन सैलाब उमड़ने लगा है। भारतीय जनता पार्टी के झंडे बैनर लग चुके हैं, मंच सज चुका है और नेताओं के भाषण शुरू हो चुके हैं। इंतजार है तो बस मोदी का। यूं तो मोदी की जनचेतना रैली अब तक जहां भी हुई है वहां उनके नाम का डंका सफलतापूर्वक बजा है। बांग्लावासियों पर मोदी का क्या जादू चलेगा, यह तो लोकसभा चुनाव की ईवीएम बतायेंगी, लेकिन बांग्लावासी उनसे क्या चाहते हैं, यह हम आपको बता सकते हैं।

समस्यायों के श‍िकंजे में कसी जनता हमेशा इस उम्मीद में जीती है कि कभी तो कोई आकर उन्हें इन समस्याओं से निज़ात दिलाएगा ऐसे में मोदी जनता की इस उम्मीद का सहारा बनते नज़र आ रहे हैं। कहने को तो कोलकाता एक महानगर है, परंतु यह आज भी गरीबी, बेरोजगारी जैसे मूलभूत समस्याओं से ग्रस्त है। ऐसा नहीं है की ये समस्याएं देश के अन्य अन्य हिस्सों में नहीं हैं, पर एक महानगर होते हुए भी ये मुददे व्यापक स्तर पर यहां की जनता को प्रभावित कर रहें हैं। जनता क्या चाहती है, यह जानने के लिये हमने टटोली इंडिया272 डॉटकॉम । यह वो प्लेटफॉर्म है, जहां पर देश का कोई भी नागरिक अपनी समस्या नरेंद्र मोदी तक पहुंचा सकता है। या फिर अपनी बात कह सकता है।

ज्यादातर कोलकाता वासियों ने बंगाल के शैक्ष‍िक स्तर, महिलाओं की सुरक्षा के स्तर, औधोगिक स्तर, संरचनात्मक के विकास के स्तर पर अपनी बात रखी और इन सभी में सुधार के सुझाव दिये। निसंदेह कोलकाता की सिथति अन्य महानगरों की अपेक्षा पिछड़ी हुई है सोचनीय है।

जनता ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि वे चाहते हैं कि मोदी के विकास माडल से यहां नए उधोग पनपें, नई नीतियां लागु हों, बेरोजगारी खत्म हो जाये और राज्य आगे बढ़ सके। जनता चाहती है कि कलकत्ता विश्वविद्यालय का नाम देश के सर्वश्रेश्ठ विश्वविद्यालयों में फिर से शुमार हो। कलकत्ता की जनता मोदी से सुरक्षा का भरोसा चाहती है, विकास का वादा चाहती है पर ऐसा वादा नहीं, जो ममता बनर्जी की तृणमुल काग्रेस ने किया।

अब देखना यह है कि क्या मोदी अपनी इस रैली से बंगालवासियों को उनकी इन आशाओं के प्रति आश्वस्त कर पाएगें, क्या मोदी जनता के इन मुददों का समाधान कर पाने का भरोसा जीत पाएगें, क्या मोदी के शंख से जनता की आत्मवेदना की आह का स्वर प्रस्फूटित होगा, क्या सच में मोदी उस कोलकाता के नवनिर्माण का संकल्प लेगें जिसकी आशा वहां की जनता को है।

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