Shukrayaan-1: भयानक ग्रीनहाउस गैस, एसिड वाली बारिश..., जानिए कैसा है शुक्र ग्रह, जहां ISRO भेजेगा शुक्रयान?
ISRO's mission to Venus Shukrayaan-1: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने घोषणा की कि अंतरिक्ष एजेंसी अपने शुक्र मिशन में प्रगति की ओर बढ़ रहा है। इसरो ने इस मिशन को फिलहाल अनौपचारिक रूप से 'शुक्रयान-1' का नाम दिया है।
इसरो ने शुक्र ग्रह का व्यापक अध्ययन करने के लिए इस मिशन की घोषणा की है। शुक्र ग्रह को "पृथ्वी का जुड़वां" ग्रह कहा जाता है। इसरो का शुक्रयान मिशन शुक्र की सतह और वातावरण दोनों की जांच करेगा और जीवन की संभावना के लिए इसकी भूवैज्ञानिक संरचना का विश्लेषण भी करेगा। शुक्र ग्रह एक बहुत ही अनोखा और विचित्र ग्रह है। आइए जानें शुक्र ग्रह कैसा है?

इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने कहा, "शुक्र एक बहुत ही दिलचस्प और विचित्र ग्रह है। यहां वायुमंडल भी है। इसका वायुमंडल बहुत घना है। यहां वायुमंडलीय दबाव पृथ्वी से 100 गुना अधिक है। यह एसिड से भरा है। ऐसा दिन आ सकता है जब शुक्र ग्रह पर पृथ्वी जैसा जीवन हो।''
सोमनाथ ने कहा, "हो सकता है कि 10,000 साल बाद पृथ्वी अपनी विशेषताएं बदल लें। पृथ्वी कभी ऐसी नहीं थी। यह बहुत समय पहले रहने योग्य जगह नहीं थी।" सोमनाथ ने कहा कि शुक्रयान मिशन को कॉन्फिगर किया गया है और कई पेलोड वर्तमान में विकास चरण में हैं।

जानिए शुक्र ग्रह के बारे में 10 अहम बातें
1. शुक्र ग्रह को अंग्रेजी में Venus कहा जाता है। ये सौर मंडल का दूसरा ग्रह है। आसमान में सूरज और चंद्रमा के बाद सबसे ज्यादा चमकीला ग्रह यही है।
2. शुक्र ग्रह का नाम Venus प्रेम और सौंदर्य की रोमन देवी के नाम पर हुआ है। शुक्र ग्रह की अहमियत अलग-अलग देशों और भाषाओं में अलग-अलग बताई गई है। भारत में इसे वैभव का स्वामी माना जाता है।
3. शुक्र ग्रह की चुंबकीय शक्ति बहुत कम है। शुक्र ग्रह पर कार्बन डाईऑक्साइड से भरा वायुमंडल है। यही शुक्र ग्रह पर सल्फ्यूरिक एसिड का बादल बनाता है, जिससे एसिड वाली बारिश होती है।

4. शुक्र ग्रह पर भयानक मात्रा में ग्रीनहाउस गैसें निकलती हैं। यहां तापमान कई बार 464 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है।
5. शुक्र ग्रह को पृथ्वी का 'छोटा भाई' भी कहा जा सकता है क्योंकि इस ग्रह का वजन, मास और क्षेत्रफल सबकुछ पृथ्वी से थोड़ा ही कम है। शुक्र आकार और दूरी दोनों में पृथ्वी के निकटतम है।
6. शुक्र ग्रह के वायुमंडल का दबाव धरती के वायुमंडलीय दबाव 92 गुना अधिक है। यहां एसिडिक बादलों की ऊंचाई 50 किलोमीटर तक रहती है।
7. शुक्र ग्रह सूरज के चारों तरफ एक चक्कर 583.92 दिनों में पूरा करता है।

8. शुक्र ग्रह का रेडियस धरती के रेडियस से थोड़ा सा कम है। इसका एक साल पृथ्वी के साल से डेढ़ गुना ज्यादा अधिक है।
9. कार्बन को चट्टानों और सतही भूआकृतियों में वापस जकड़ने के लिए शुक्र ग्रह पर कोई कार्बन चक्र मौजूद नहीं है और ना ही जीवद्रव्य को इसमे अवशोषित करने के लिए कोई कार्बनिक जीवन है।
10. शुक्र ग्रह पर सबसे पहला स्पेस मिशन सोवियत संघ ने वेनेरा-1 (Venera 1) स्पेसक्राफ्ट 1961 में भेजा गया था। लेकिन ये असफल रहा था। इसके बाद 1962 में अमेरिका का मरीनर 2 (Mariner 2) मिशन शुक्र पर पहुंचा था।












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