ISRO के मंगलयान ने भेजी मंगल ग्रह के सबसे बड़े चंद्रमा की तस्वीर, जानिए ये क्यों है इतनी खास

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के मंगलयान यानी मार्स ऑर्बिटर मिशन (एमओएम) ने मंगल ग्रह के नजदीकी और सबसे बड़े चंद्रमा फोबोस की तस्वीर भेजी है। ये तस्वीर मंगलयान में लगे मार्स कलर कैमरा (एमसीसी) के जरिए ली गई है। एमओएम (MOM) पर लगे कैमरा ने इस तस्वीर को 1 जुलाई को लिया है। बताया जा रहा है कि तस्वीर लेते वक्त एमओएम मंगल से 7200 किलोमीटर और फोबोस से 4200 किलोमीटर दूर था।

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    मार्स ऑर्बिटर ने ली तस्वीर

    मार्स ऑर्बिटर ने ली तस्वीर

    इस तस्वीर को अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर करते हुए इसरो ने लिखा, मंगल के रहस्यमई चांद, फोबोस की तस्वीर भारत के मार्स ऑर्बिटर मिशन द्वारा ली गई है। इस तस्वीर को जारी कर बयान में कहा गया है कि ये 6 एमसीसी फ्रेस से ली गई समग्र तस्वीर है। इसके रंग को ठीक किया गया है। इसरो के अनुसार, फोबोस यानी चंद्रमा पर जो बहुत बड़ा गड्ढा दिखाई दे रहा है, इसे स्टिकनी नाम दिया गया है। जो फोबोस से आकाशीय पिंडों के टकराने से उत्पन्न हुआ था। इसके अलावा तस्वीर में और भी कई छोटे-छोटे गड्ढे दिखाई दे रहे हैं। जिनका नाम रोश, ग्रिलड्रिग और स्लोवास्की रखा गया है।

    कई वर्षों तक सेवा देगा मंगलयान

    कई वर्षों तक सेवा देगा मंगलयान

    आपको बता दें इसरो (Indian Space Research Organistion) ने साल 2014 में 24 सितंबर के दिन मार्स ऑर्बिटर मिशन (Mars Orbiter Mission) के तहत मंगलयान को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में मंगल की कक्षा में स्थापित किया था। पहले तो इसरो ने कहा था कि इस मिशन का उद्देश्य महज छह महीनों तक का होगा। लेकिन बाद में इसरो ने कहा कि ये कई वर्षों तक अपनी सेवा देता रहेगा क्योंकि इसमें पर्याप्त मात्रा में ईंधन मौजूद है। जानकारी के लिए बता दें इसरो ने पहली ही कोशिश में मंगलयान को मंगल की कक्षा में स्थापित किया था।

    खनिजों का अध्ययन करना है उद्देश्य

    खनिजों का अध्ययन करना है उद्देश्य

    इस मिशन के साथ भारत मंगल की कक्षा में जाने वाले एलिट समूह में शामिल हो चुका था। इसरो ने इस परीक्षण को 2013 में पांच नवंबर को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी रॉकेट (PSLV Rocket) के जरिए प्रक्षेपण किया था। जिसमें करीब 450 करोड़ रुपये की लागत आई थी। इस मिशन का उद्देश्य मंगल पर मौजूद खनिजों और उसकी सतह का अध्ययन करना है। इसके साथ ही वहां के वायुमंडल में मिथेन की मौजूदगी के बारे में भी पता करना है। बता दें मंगल पर मिथेन की मौजूदगी जीवन का संकेत देती है।

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