Iran War Impact: जंग के बीच भारत परेशान? किन चीजों के आयात-निर्यात को झटका, मोदी सरकार का क्या है प्लान B?
Iran Israel War Impact on India: मिडिल ईस्ट में छिड़ी ईरान-इजरायल जंग अब सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं रह गई है। अमेरिका की सीधी सैन्य भागीदारी, ईरान की मिसाइल और ड्रोन जवाबी कार्रवाई, खाड़ी के शहरों में धमाके और एयरस्पेस बंद होने से वैश्विक व्यवस्था हिल गई है। इस पूरे घटनाक्रम में अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की मौत ने हालात और विस्फोटक बना दिए हैं। सवाल यह है कि इस उथल-पुथल के बीच भारत क्यों बेचैन है और किन मोर्चों पर असर दिखने लगा है।
भारत-ईरान व्यापार की हकीकत (India-Iran Trade)
पहली नजर में भारत और ईरान का सीधा कारोबार बहुत बड़ा नहीं दिखता। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच करीब 168 करोड़ डॉलर का व्यापार हुआ, जो भारत के कुल द्विपक्षीय कारोबार का बेहद छोटा हिस्सा है। छह साल पहले यह आंकड़ा 1703 करोड़ डॉलर के आसपास था। गिरावट की बड़ी वजह अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ईरान से कच्चे तेल के आयात में भारी कमी है।

पिछले साल ईरान से भारत में करीब 44 करोड़ डॉलर का माल आया, जबकि भारत से 124 करोड़ डॉलर का निर्यात हुआ। भारत से मुख्य रूप से बासमती चावल, चाय, चीनी, दवाएं और ताजे फल गए। वहीं ईरान से सेब, पिस्ता, खजूर और कीवी का आयात हुआ। यानी सीधा असर सीमित दिखता है, लेकिन असली झटका सप्लाई चेन और भुगतान व्यवस्था में है।
▶️ चावल निर्यातकों की चिंता (Basmati Export Impact)
जंग का पहला असर हरियाणा के बासमती निर्यातकों पर दिखा है। अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान और अफगानिस्तान जाने वाले कई शिपमेंट अटक गए हैं। बंदर अब्बास पोर्ट के रास्ते जाने वाले माल की ढुलाई धीमी हो गई है। पेमेंट में देरी की शिकायतें आने लगी हैं।
हरियाणा देश के कुल चावल निर्यात में लगभग 35 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। करनाल, कैथल और सोनीपत जैसे हब सीधे प्रभावित हैं। बासमती के दामों में 4 से 5 रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई है, जो 400 से 500 रुपये प्रति क्विंटल बैठती है। निर्यातकों को यह भी डर है कि अगर लड़ाई लंबी चली तो बीमा कवर महंगा होगा और जोखिम बढ़ेगा।
भारत ने 2024-25 में करीब 6 मिलियन टन बासमती चावल निर्यात किया, जिसमें से लगभग 1 मिलियन टन ईरान को गया। सऊदी अरब के बाद ईरान भारत का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। ऐसे में तनाव लंबा खिंचा तो असर गहरा हो सकता है।
▶️ इजरायल के साथ रणनीतिक रिश्ते (India-Israel Strategic Trade)
ईरान के मुकाबले इजरायल के साथ भारत का रिश्ता ज्यादा रणनीतिक और तकनीकी है। पिछले दशक में डिफेंस और हाई-टेक उपकरणों के जरिए इजरायल को भारत का निर्यात 21 प्रतिशत बढ़ा है। हथियार और गोला-बारूद की खरीद 2013 में 10 लाख डॉलर से बढ़कर 2024 में 10.4 करोड़ डॉलर तक पहुंची। विमान और अंतरिक्ष यान से जुड़े पुर्जों का आयात भी तेजी से बढ़ा है।
अगर जंग लंबी चली तो इन आपूर्ति लाइनों पर असर पड़ सकता है। भारत की सुरक्षा जरूरतें इजरायल से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर निर्भर हैं, इसलिए किसी भी बाधा का असर रणनीतिक स्तर पर दिखेगा।
▶️ तेल और होर्मुज की चिंता (Strait of Hormuz Risk)
सबसे बड़ा खतरा ऊर्जा मोर्चे पर है। भारत हर महीने जितना कच्चा तेल आयात करता है, उसका लगभग आधा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है। अगर यह रास्ता बंद हुआ या खतरे में पड़ा, तो तेल कीमतों में तेज उछाल तय है। इससे ईंधन महंगा होगा, महंगाई बढ़ेगी और व्यापार संतुलन बिगड़ेगा।
रेड सी कॉरिडोर और खाड़ी के समुद्री रास्तों में बाधा आने से लॉजिस्टिक्स लागत भी बढ़ सकती है। इससे यूरोप और पश्चिम एशिया को होने वाला भारतीय निर्यात प्रभावित होगा।
▶️ उड्डयन क्षेत्र पर बड़ा झटका (Aviation Disruption)
हवाई मार्गों पर असर सबसे तेजी से दिखा है। पश्चिम एशिया के कई देशों ने अस्थायी रूप से अपना एयरस्पेस बंद किया है। भारत के नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार एक दिन में 444 उड़ानें रद्द होने की आशंका है, जबकि एक दिन पहले 400 से ज्यादा उड़ानें प्रभावित हुई थीं।
दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता और चेन्नई जैसे बड़े एयरपोर्ट अलर्ट पर हैं। एयर इंडिया, इंडिगो, एयर इंडिया एक्सप्रेस और एमिरेट्स जैसी एयरलाइंस ने कई सेवाएं रद्द या डायवर्ट की हैं। दुबई, दोहा और मनामा जैसे शहरों में धमाकों की खबरों के बाद वैश्विक एविएशन सेक्टर में उथल-पुथल मची है। भारतीय दूतावास ने सऊदी अरब में फंसे यात्रियों के लिए 24 घंटे हेल्पलाइन शुरू की है।
▶️ जम्मू-कश्मीर में विरोध (Kashmir Protests)
ईरान में सुप्रीम लीडर की मौत की पुष्टि के बाद जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए। बड़ी संख्या में शिया समुदाय के लोग सड़कों पर उतरे और ईरान के समर्थन में नारे लगाए। प्रशासन ने स्थिति पर नजर रखी हुई है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
▶️ मोदी सरकार का बैकअप प्लान (Government Backup Strategy)
भारत सरकार कई स्तरों पर तैयारी में जुटी है। ऊर्जा जरूरतों के लिए वैकल्पिक सप्लायर देशों से संपर्क तेज किया गया है। रणनीतिक तेल भंडार का इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर किया जा सकता है। उड्डयन मंत्रालय एयरलाइंस के साथ समन्वय कर वैकल्पिक मार्ग तय कर रहा है। विदेश मंत्रालय खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा पर नजर रखे हुए है। आर्थिक मोर्चे पर भी सरकार स्थिति की समीक्षा कर रही है ताकि निर्यातकों को राहत और बीमा सहायता मिल सके।
▶️ पश्चिम एशिया में जंग का खतरा गहराया, भारत पर सीधा असर
- अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर समन्वित हवाई हमले किए, जिससे क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया।
- जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इजरायली शहरों, अमेरिकी सैन्य ठिकानों और खाड़ी क्षेत्र के प्रतिष्ठानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
- इजरायल में एयर रेड सायरन बजने की खबरें आईं, जबकि दुबई और दोहा जैसे खाड़ी शहरों में धमाकों की आवाजें सुनी गईं।
- ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की हमलों में मौत की खबर ने दशकों पुराने टकराव को नए मोड़ पर ला दिया और लंबे अस्थिर दौर की आशंका बढ़ा दी।
- ईरान, इजरायल और इराक समेत पश्चिम एशिया के कई देशों ने अस्थायी रूप से अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया, जिससे वैश्विक उड्डयन मार्ग प्रभावित हुए।
- इस संकट के चलते हाल के वर्षों की सबसे बड़ी एविएशन बाधाओं में से एक देखने को मिल रही है, दुनिया भर की एयरलाइंस ने खाड़ी रूट पर उड़ानें मोड़ी या निलंबित कीं।
- भारत में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बताया कि 444 उड़ानें रद्द होने की आशंका है, जबकि एक दिन पहले ही 400 से अधिक उड़ानें प्रभावित हुई थीं।
- दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता और चेन्नई जैसे प्रमुख भारतीय हवाई अड्डे अलर्ट पर हैं और डायवर्जन, कैंसिलेशन व यात्रियों की सहायता संभाल रहे हैं।
- एयर इंडिया, इंडिगो और एयर इंडिया एक्सप्रेस जैसी भारतीय एयरलाइंस ने सुरक्षा कारणों से मध्य पूर्व और यूरोप की कई अंतरराष्ट्रीय सेवाएं रद्द या निलंबित कर दी हैं।
- सऊदी अरब में भारतीय दूतावास ने फंसे यात्रियों के लिए 24x7 हेल्पलाइन शुरू की है, जबकि एयरलाइंस अनिश्चित स्थिति के बीच रीबुकिंग और रिफंड की सुविधा दे रही हैं।
- होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान की चेतावनी से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की आशंका बढ़ी है, जिसका असर भारत में ईंधन कीमतों, महंगाई और व्यापार संतुलन पर पड़ सकता है।
▶️ आगे क्या?
ईरान-इजरायल जंग का असर भारत पर फिलहाल सीमित दिख रहा है, लेकिन खतरा गहरा है। तेल, चावल, डिफेंस सप्लाई, एविएशन और लॉजिस्टिक्स हर मोर्चे पर अनिश्चितता है। अगर संघर्ष लंबा चला तो इसका असर जेब से लेकर रणनीति तक हर स्तर पर महसूस होगा। भारत की चुनौती यही है कि संतुलन बनाए रखते हुए अपने आर्थिक और सुरक्षा हितों की रक्षा करे।
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