Yoga Day: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बोले- गरीब लोगों से योग की नौटंकी कराना क्रूरता की हद
योग दिवस को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने कहा नौटकीं, बोले- भूखे लोगों से योग कराना क्रूरता
नई दिल्ली, 21 जून: दुनियाभर में आज 7वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। इस मौके पर ना सिर्फ देश बल्कि दुनियाभर में कार्यक्रम हुए हैं। राजनीति, बॉलीवुड और दूसरे तमाम क्षेत्रों के लोगों ने योग करते हुए तस्वीरें शेयर की हैं और लोगों को शुभकामनाएं दी हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्केंडेय काटजू ने कहा है कि एक ऐसे समय पर जब बेरोजगारी और गरीबी ने देश में कई दशक के रिकॉर्ड तोड़ दिए है, लोगों को योग करने को कहना और इसका उत्सव करना क्रूरता है।

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जस्टिस मार्केंडेय काटजू ने योग दिवस को लेकर कई ट्वीट किए हैं। उन्होंने लिखा- 21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस है। मैं इसे एक नौटंकी के रूप में देखता हूं। 50 फीसदी भारतीय बच्चे कुपोषित हैं, हमारी 50 फीसदी महिलाएं एनीमिक हैं। देश में रिकॉर्ड बेरोजगारी है। ऐसे वक्त में लोगों को योग करने के लिए कहना क्रूरता की हद है। ये ऐसा ही है जैसे रानी मैरी एंटोनेट ने लोगों के रोटी मांगने पर कहा था कि रोटी नहीं है तो केक खाइए।
एक और ट्वीट में काटजू ने कहा, पेट खाली और योग कराया जा रहा है। जेब खाली और खाता खुलवाया जा रहा है। घर है नहीं और शौचालय बनवाया जा रहा है। इसके बाद काटजू ने लिखा- भूखे योग ना होय गोपाला। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रह चुके जस्टिस मार्केंडय काटजू ने ये भी कहा कि योगा करने से सेहत अच्छी होने और दिमाग को शांति और सुकून मिलने का दावा किया जाता है लेकिन क्या भूखे-गरीब और बेरोजगारों को भी वैसा ही फायदा मिलेगा? क्या योग कुपोषित बच्चे और खून की कमी से जूझती महिलाएं सेहतमंद हो पाएंगी?
जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने बीते हफ्ते देश में कोरोना महामारी के चलते चरमराती स्वास्थ्य सेवाओं, अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट और देश में रिकॉर्डतोड़ महंगाई को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने पेट्रोल और सरसों के तेल के दाम, कोरोना से मौतों को लेकर किए ट्वीट में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तंज कसते हुए पूछा है कि क्या अच्छे दिन आ गए हैं।












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