नहीं थे बैल खरीदने के पैसे, तो पिता के लिए दो बेटियों ने खुद हल खींचकर जोत डाला पूरा खेत
धारवाड़, 09 जुलाई। भारत कृषि प्रधान देश हैं और यहां बड़े पैमाने पर खेती की जाती है। चुनावी मौसम में किसान राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र का मुख्य एजेंडा होता है लेकिन सत्ता में आते ही नेता, किसानों को इस तरह नजरअंदाज करते हैं जैसे चाय की मलाई। देश में कई किसान ऐसे हैं जिनके पास खेत तो है लेकिन खेती करने के लिए बैल या मशीन नहीं है। आर्थिक तंगी से मजबूर और सरकार की नजरों से दूर ये किसान अपनी शारीरिक शक्ति से ही खेत जोतकर फसल पैदा करते हैं।

आर्थिक तंगी से मजबूर किसान
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक सोशल मीडिया पर ऐसे ही एक किसान की कहानी काफी वायरल हो रही है जो आर्थिक तंगी के चलते खेत की जुताई के लिए बैल या मशीनरी भी किराए पर नहीं ले सकता। ऐसे में किसान की दो बेटियों ने बैल की जगह हल खींचकर खेत जोतने में पिता की मदद की। खेत में हल खीचतें लड़कियों की फोटो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, उनकी हिम्मत की लोग प्रशंसा करते नहीं थक रहे हैं। मामला कर्नाटक के धारवाड़ जिले के गांव का बताया जा रहा है।

करानी पड़ी दो सर्जरी
धारवाड़ में मदकिहोन्नल्ली गांव के रहने वाले किसान कलप्पा जवूर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि वह अपनी एक एकड़ की जमीन को जोतने के लिए बैल या ट्रेक्टर भी किराए पर नहीं ले सकते। 43 साल के जूवर अपने खेत में फसल की बुवाई करना चाहते थे लेकिन खेत जोतने का कोई विकल्प ना होने की वजह से परेशान थे। कलप्पा जवूर बीते कुछ दिनों से एक बीमारी से भी जूझ रहे थे जिसके चलते उन्हें दो सर्जरी भी करानी पड़ी।

बेटियों ने खींचा हल
ऐसे में वह शारीरिक रूप से भी खेत में मेहनत नहीं कर सकते थे। बाद में कलप्पा जवूर की बेटियों मेघा और साक्षी ने खुद हल खींचकर खेत जोतने में उनकी मदद की। इस घटना की तस्वीर भी सोशल मीडिया पर सामने आई है जिसे लोग खूब पसंद कर रहे हैं। सर्जरी से ठीक होने के बाद कलप्पा जवूर अपनी जमीन पर बुवाई करना चाहते थे लेकिन वह खेत जोतने में असमर्थ थे।

पढ़ने में भी किसी से कम नहीं बेटियां
बेटियों ने पिता का साथ दिया और हल खींचकर एक एकड़ जमीन को जोत दिया। मेघा-साक्षी की मदद से जवूर ने खेत में सोयाबीन की बुवाई की। आपको जानकर हैरानी होगी कि किसान की दोनों बेटियां पढ़ने में भी काफी अच्छी हैं, बड़ी बेटी मेघा हुबली से कंप्यूटर साइंस में डिप्लोमा कर रही है। वहीं, छोटी बेटी साक्षी 10वीं कक्षा की छात्र है और तीसरी बेटी सरला गांव के ही स्कूल में 7वीं कक्षा में पढ़ती हैं।

पूर्व एमएलसी ने दिए एक जोड़ी बैल
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कलप्पा जवूर अपनी बेटियों की पढ़ाई और बेहतर भविष्य के लिए अधिक पैसा कमाना चाहते थे, लेकिन बीमारी ने उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया। कलप्पा कहते हैं, खेत जोतने में बेटियों ने साथ देकर मेरा आत्मविश्वास बढ़ाया है, मेघा और साक्षी दोनों हल खींचती थीं और मैं बुवाई करता था। प्राप्त जानकारी के मुताबिक जब बेटियों के जज्बे की खबर मीडिया में फैली तो हुबली से पूर्व एमएलसी नागराज चेब्बी ने जवूर के परिवार को एक जोड़ी बैल भेंट किया।
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