Influenza A H3N2 सांस से जुड़ी बीमारी का प्रमुख कारण, ICMR और डॉक्टरों ने बचाव के उपाय बताए, जानिए
इन्फ्लुएंजा का एक प्रकार A H3N2 लोगों की बीमारी का कारण बनता जा रहा है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने पुष्टि की है कि वायरस का ये वैरिएंट इन्फ्लूएंजा (फ्लू) का कारण बनता है।

Influenza A H3N2 वायरस से संक्रमित लोग बड़े पैमाने पर बीमार पड़ रहे हैं। देश में तेज बुखार और खांसी का मौजूदा प्रकोप इन्फ्लुएंजा के उपप्रकार A H3N2 के कारण है। वायरस का यह वैरिएंट इन्फ्लूएंजा (फ्लू) का कारण बनता है। भारत की शीर्ष स्वास्थ्य अनुसंधान एजेंसी- भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने बताया कि A H3N2 वायरस अन्य इन्फ्लुएंजा वैरिएंट की तुलना में अधिक लोगों को बीमार कर रहा है। बड़ी संख्या में लोगों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ रहा है।
डेटा के आधार पर Influenza
बता दें कि ICMR देश भर में अपने वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरीज (VRDLs) के नेटवर्क के माध्यम से सांसों से फैलने वाले वायरस और इससे होने वाली बीमारियों की निरंतर निगरानी करता है। आईसीएमआर में महामारी विज्ञान की प्रमुख डॉ. निवेदिता गुप्ता के अनुसार 15 दिसंबर से आज तक 30 वीआरडीएलएस के निगरानी डेटा से इन्फ्लूएंजा A H3N2 के मामलों में उछाल का संकेत मिलता है। टाइम्स ऑफ इंडिया (टीओआई) की रिपोर्ट के अनुसार डॉ निवेदिता ने कहा, "इनपेशेंट सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन (SARI) और आउट पेशेंट इन्फ्लुएंजा जैसी बीमारी से पीड़ित लगभग आधे लोगों में इन्फ्लुएंजा A H3N2 पाया गया।
86 फीसद लोगों को खांसी
डॉ निवेदिता के अनुसार ने मार्च के अंत या अप्रैल के पहले सप्ताह से A H3N2 वायरस के कारण होने वाले संक्रमण में गिरावट की संभावना है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इस सीजन में अधिकांश प्रदेशों में तापमान बढ़ना शुरू हो जाता है। ICMR के मुताबिक, अस्पताल में भर्ती H3N2 वाले मरीजों में 92% मरीजों में बुखार, 86% को खांसी, 27% को सांस फूलना, 16% को घरघराहट की समस्या थी. इसके अतिरिक्त, ICMR निगरानी में पाया गया कि ऐसे 16% रोगियों को निमोनिया था और 6% को दौरे पड़ते थे।
1968 में हांगकांग में इन्फ्लुएंजा का कहर
इन्फ्लुएंजा की चिंताओं के बीच शीर्ष स्वास्थ्य अनुसंधान एजेंसी के अनुसार, H3N2 के कारण होने वाले गंभीर और सांस के तेज संक्रमण से पीड़ित लगभग 10% रोगियों को ऑक्सीजन की जरूरत होती है। 7% को ICU में देखभाल की जरूरत पड़ती है। टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुड़गांव में इंटरनल मेडिसिन के निदेशक डॉ. सतीश कौल ने कहा कि H3N2 अन्य इन्फ्लुएंजा वायरस की तुलना में अधिक गंभीर लक्षण पैदा करने के लिए जाना जाता है। डॉ कौल ने कहा कि यह नया वैरिएंट नहीं है। दशकों से प्रचलन में है, लेकिन इन्फ्लुएंजा का सब वैरिएंट H3N2 करीब 54 साल पहले 1968 में हांगकांग में बड़े पैमाने पर भीषण प्रकोप का कारण बना था।

ज्वर और खांसी से पीड़ित रोगियों की संख्या बढ़ी
डॉ कौल के अनुसार, H3N2 के कारण होने वाले संक्रमण सामान्य इन्फ्लुएंजा से अलग होते हैं। बीमारी के क्लिनिकल लक्षण बहुत अधिक गंभीर होते हैं। हमेशा ठंड लगने के साथ तेज बुखार के साथ शुरू होने ये इन्फ्लुएंजा लगातार खांसी का कारण भी बनता है। टीओआई की रिपोर्ट में राष्ट्रीय राजधानी के साकेत मैक्स में आंतरिक चिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ रोमेल टिक्कू ने भी इन्फ्लुएंजा पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पिछले दो महीनों से उनके पास ज्वर और खांसी से पीड़ित रोगियों की संख्या बढ़ी है।
बुजुर्ग और दूसरी बीमारियों से पीड़ित लोगों पर खतरा अधिक
डॉ रोमेल टिक्कू के अनुसार, "कई रोगियों को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ती है। मौसमी इन्फ्लुएंजा के कारण होने वाली बीमारियों में ये असामान्य है। उन्होंने कहा, बुजुर्ग और दूसरी बीमारियों से पीड़ित लोग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
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करीब 6.5 लाख लोगों की मौत सांस की बीमारी के कारण
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, वैश्विक स्तर पर हर साल मौसमी इन्फ्लुएंजा के कारण गंभीर बीमारी के लगभग 3 से 5 मिलियन मामले सामने आते हैं। संयुक्त राष्ट्र के स्वास्थ्य निकाय- WHO के आंकड़ों में बताया गया है कि लगभग 2.9 लाख से 6.5 लाख मरीजों की मौत सांस से जुड़ी परेशानियों के कारण होती है।
ताजी हवा में सांस समेत कई उपाय जरूरी हैं
WHO का कहना है कि बीमारी को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका टीकाकरण है। टीकाकरण और एंटीवायरल उपचार के अलावा, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन में व्यक्तिगत सुरक्षात्मक उपाय भी शामिल हैं। इन उपायों में हाथों को अच्छी तरह से सुखाने के साथ नियमित रूप से हाथ धोना, साफ, खुली और ताजी हवा में सांस लेना जरूरी है। कुछ अन्य उपायों पर भी ध्यान देना जरूरी है-
- खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढंकना
- रुमाल न होने पर टिशू पेपर का उपयोग और उनका सही तरीके से निपटान
- तबीयत ठीक नहीं है, ऐसा एहसास होने पर खुद को जल्दी से आइसोलेट करना
- बुखार से पीड़ित और इन्फ्लूएंजा के अन्य लक्षण होने पर सामाजिक समारोह से दूरी
- बीमार लोगों के साथ निकट संपर्क से बचना












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